प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार (26 जुलाई) को प्रसारित ‘मन की बात’ कार्यक्रम में देशवासियों से जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाने की अपील की। उन्होंने ‘कैच द रेन’ अभियान का उल्लेख करते हुए इसमें सक्रिय भागीदारी निभाने वाले लोगों की सराहना की और सभी नागरिकों से बारिश की हर बूंद को सहेजने का आग्रह किया। पीएम मोदी ने कहा कि आज बचाया गया वर्षा जल आने वाली पीढ़ियों के लिए अमूल्य संपत्ति साबित होगा। उन्होंने दोहराया कि ‘कैच द रेन’ अभियान का मूल मंत्र है— “जहां बारिश हो, वहीं और जब बारिश हो, तभी वर्षा जल का संरक्षण करें।”
ऐसे में सवाल उठता है कि इस साल देश में अब तक कितनी बारिश हुई है, अल नीनो का मौसम पर कितना असर देखने को मिला है, आने वाले महीनों में मौसम का मिजाज कैसा रह सकता है और आखिर प्रधानमंत्री इस अभियान पर लगातार इतना जोर क्यों दे रहे हैं? आइए इन सभी सवालों के जवाब विस्तार से समझते हैं।
अल नीनो क्या है
अल नीनो एक प्राकृतिक जलवायु घटना है, जिसमें प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से का समुद्री सतही तापमान सामान्य से अधिक हो जाता है। यह स्थिति आमतौर पर हर तीन से सात वर्ष के अंतराल पर विकसित होती है और वैश्विक मौसम प्रणाली पर व्यापक असर डालती है। भारत के संदर्भ में अल नीनो इसलिए महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इसके दौरान मानसून कमजोर पड़ सकता है और सामान्य से कम वर्षा होने की संभावना बढ़ जाती है। हालांकि, इसका प्रभाव हर बार एक जैसा नहीं होता। उदाहरण के लिए, 1997-98 के मजबूत अल नीनो के बावजूद हिंद महासागर की अनुकूल परिस्थितियों के कारण भारत में सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई थी।
2026 का मानसून अब तक कैसा रहा
साल 2026 के जून महीने में देश में मानसून बेहद कमजोर रहा। इस दौरान सामान्य से लगभग 40 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई, जो 1901 के बाद जून की पांचवीं सबसे कम वर्षा मानी जा रही है। जुलाई की शुरुआत में मानसून ने रफ्तार पकड़ी और 7 जुलाई तक बारिश की कमी घटकर 12 प्रतिशत रह गई। हालांकि, कुछ दिनों बाद यह आंकड़ा 9 जुलाई को 14 प्रतिशत तक पहुंच गया। जुलाई के मध्य में मानसून फिर कमजोर पड़ा, जिससे 15 जुलाई तक वर्षा की कमी बढ़कर 23 प्रतिशत हो गई। बाद में मानसून दोबारा सक्रिय हुआ और 22 जुलाई तक यह कमी घटकर 19 प्रतिशत रह गई। नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, फिलहाल देश में सामान्य से करीब 16 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की जा रही है।
किन इलाकों में कम बारिश हुई
बारिश की कमी को लेकर सबसे अधिक चिंता उत्तर-पश्चिम और पश्चिम भारत में बनी हुई है। राजस्थान और उत्तर प्रदेश में मानसून की रफ्तार लगातार सुस्त है, जबकि पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में भी सामान्य से कम वर्षा दर्ज की जा रही है। इसके अलावा मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के कुछ हिस्से भी कम बारिश की मार झेल रहे हैं। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने अपने जुलाई के मासिक पूर्वानुमान में पहले ही संकेत दिया था कि पूरे महीने देशभर में होने वाली औसत वर्षा दीर्घकालिक औसत (LPA) के 94 प्रतिशत से कम रह सकती है।
किन इलाकों में ज्यादा बारिश हुई
दूसरी ओर, पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में सक्रिय मानसून ने कई राज्यों में भारी बारिश कराई, जिससे जनजीवन प्रभावित हुआ। बिहार, पश्चिम बंगाल, असम, मेघालय, ओडिशा और झारखंड में सामान्य से लेकर सामान्य से अधिक वर्षा दर्ज की गई। वहीं, हाल के दिनों में ओडिशा, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, विदर्भ और कोंकण-गोवा के कई इलाकों में भी मध्यम से भारी बारिश देखने को मिली। जुलाई के अंतिम सप्ताह में कुछ क्षेत्रों में एक-दो दिनों के दौरान सामान्य से 170 से 180 प्रतिशत तक अधिक वर्षा रिकॉर्ड की गई, जिससे पूरे मानसून सीजन में बनी बारिश की कमी कुछ हद तक कम होने में मदद मिली।
कितने इलाके सूखे जैसी स्थिति में हैं
भारतीय मौसम विभाग (IMD) के मानकों के अनुसार, किसी क्षेत्र में तब सूखे की स्थिति मानी जाती है, जब पूरे मानसून सीजन के दौरान होने वाली वर्षा दीर्घकालिक औसत (LPA) के 75 प्रतिशत से भी कम रह जाए। फिलहाल देश में ऐसी स्थिति नहीं बनी है और न ही कहीं आधिकारिक तौर पर सूखे की घोषणा की गई है। इसकी वजह यह है कि वर्तमान में बारिश की करीब 16 से 19 प्रतिशत की कमी अब भी आईएमडी के सामान्य उतार-चढ़ाव की सीमा (±19 प्रतिशत) के भीतर है। हालांकि, राजस्थान और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में लगातार कम बारिश के कारण मिट्टी की नमी तेजी से घट रही है। यदि मानसून में लंबे समय तक ब्रेक जारी रहा, तो इन क्षेत्रों में सूखे जैसी परिस्थितियां बनने की आशंका बढ़ सकती है।
आने वाले दिनों में कितनी बारिश की उम्मीद है
दक्षिण-पश्चिम राजस्थान के ऊपर बने कम दबाव के क्षेत्र के प्रभाव से गुजरात के कई हिस्सों में भारी से अत्यधिक भारी बारिश की संभावना जताई गई है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, अगले कुछ दिनों तक उत्तर-पश्चिम, मध्य, उत्तरी प्रायद्वीपीय, पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में मानसून सक्रिय बना रहेगा, जिससे व्यापक स्तर पर वर्षा होने के आसार हैं। विशेष रूप से 27 से 29 जुलाई के बीच उत्तर भारत में बारिश की गतिविधियों में तेजी आने की उम्मीद है। यदि अनुमान के मुताबिक अच्छी बारिश होती है, तो इस मानसून सीजन में दर्ज वर्षा की कमी और घट सकती है। हालांकि, पूरे सीजन की तस्वीर काफी हद तक अगस्त महीने में होने वाली बारिश पर भी निर्भर करेगी।
किसानों और आम लोगों पर क्या असर होगा
जून में सामान्य से कम बारिश का सबसे बड़ा असर खरीफ फसलों की बुआई पर पड़ा। धान, दलहन और तिलहन जैसी प्रमुख फसलों की बुवाई कई इलाकों में प्रभावित हुई। जिन क्षेत्रों में अब भी वर्षा की कमी बनी हुई है, वहां किसानों को कम पानी में होने वाली फसलों को प्राथमिकता देने और सिंचाई के बेहतर प्रबंधन की सलाह दी जा रही है।
पानी और बिजली पर असर: कम बारिश का असर सिर्फ खेती तक सीमित नहीं रहता। यदि जलाशयों में पानी भरने की रफ्तार धीमी रहती है, तो इसका प्रभाव पीने के पानी की उपलब्धता, सिंचाई और जलविद्युत उत्पादन पर भी पड़ सकता है।
गर्मी और उमस: भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने जुलाई के दौरान देश के अधिकांश हिस्सों में अधिकतम और न्यूनतम तापमान सामान्य से अधिक रहने का अनुमान जताया है। ऐसे में कम बारिश के साथ गर्मी और उमस बढ़ने की संभावना है, जिससे लोगों को अतिरिक्त परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
इलाकावार अंतर: हालांकि, मानसून की स्थिति पूरे देश में एक जैसी नहीं है। कुछ क्षेत्रों में बारिश सामान्य या उससे अधिक हुई है, जबकि कई इलाकों में कमी बनी हुई है। ऐसे में पश्चिमी और उत्तर-पश्चिमी राज्यों में चुनौतियां ज्यादा रहने की आशंका है, जबकि पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में हालात अपेक्षाकृत बेहतर बने रहने की उम्मीद है।
अल नीनो का कितना असर
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, अल नीनो की परिस्थितियां 2026 के वसंत (मार्च-मई) के दौरान विकसित होना शुरू हो गई थीं और आने वाले महीनों में इसके और मजबूत होने की संभावना है। अनुमान है कि अगस्त-सितंबर 2026 तक यह प्रबल अवस्था में पहुंच सकता है तथा नवंबर-दिसंबर 2026 तक इसका प्रभाव बना रह सकता है। वहीं, हिंद महासागर द्विध्रुव (Indian Ocean Dipole-IOD) फिलहाल तटस्थ स्थिति में है, लेकिन अगस्त-सितंबर के दौरान इसके सकारात्मक चरण में जाने की संभावना जताई जा रही है। यदि ऐसा होता है, तो यह अल नीनो के प्रतिकूल प्रभाव को कुछ हद तक कम कर सकता है। यानी अल नीनो का असर अभी जारी रहने की संभावना है, लेकिन अनुकूल IOD की स्थिति शेष मानसून सीजन (अगस्त-सितंबर) में इसके प्रभाव को शुरुआती अनुमान की तुलना में कम कर सकती है।
पानी बचाने पर क्यों जोर दे रहे पीएम मोदी
इस वर्ष मानसून का असर पूरे देश में एक समान नहीं रहा। एक ओर पूर्वोत्तर राज्यों में लगातार हो रही भारी बारिश ने बाढ़ जैसे हालात पैदा कर दिए हैं। असम में बड़ी संख्या में लोग बाढ़ से प्रभावित हैं, जबकि गुजरात और महाराष्ट्र के तटीय इलाकों में जलभराव की स्थिति देखने को मिली। जम्मू-कश्मीर के कुछ हिस्सों में भी बाढ़ ने जनजीवन प्रभावित किया। वहीं दूसरी ओर, देश के कई क्षेत्रों में सामान्य से कम बारिश होने के कारण सूखे जैसे हालात बनने लगे हैं। लगातार तेज धूप और वर्षा की कमी का असर खेती पर भी साफ दिखाई दे रहा है। ऐसे में भविष्य में जल संकट की आशंका को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ‘कैच द रेन’ अभियान के जरिए वर्षा जल संरक्षण पर विशेष जोर दे रहे हैं, ताकि बारिश की हर बूंद को सहेजकर आने वाले समय में पानी की कमी से निपटा जा सके।

