CJP Protest: भारत की शिक्षा व्यवस्था में सुधार और NEET पेपर लीक के खिलाफ शुरू हुआ छात्र आंदोलन अपने पहले चरण में एक अहम मोड़ पर पहुंच गया है। लंबे विरोध-प्रदर्शनों और सरकार पर बढ़ते दबाव के बाद आखिरकार बातचीत का रास्ता खुला। इसके बाद केंद्र सरकार ने CJP (कॉकरोच जनता पार्टी) की प्रमुख मांगों को स्वीकार कर लिया। इसी बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया, जिसके बाद CJP ने आंदोलन समाप्त करने का ऐलान किया।
आंदोलन के दौरान जहां CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के बीच रहकर नेतृत्व कर रहे थे, वहीं सरकार के साथ औपचारिक वार्ता की जिम्मेदारी संगठन के दो नए चेहरों ने संभाली। केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा के साथ हुई महत्वपूर्ण बैठकों में CJP की ओर से सौरव दास और आशुतोष रांका ने प्रतिनिधित्व किया। इन बैठकों के बाद दोनों नाम अचानक राष्ट्रीय चर्चा का विषय बन गए।
ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर सौरव दास और आशुतोष रांका कौन हैं, CJP में उनकी भूमिका क्या है और वे संगठन के प्रमुख रणनीतिकार कैसे बने? साथ ही, इस पूरे घटनाक्रम के दौरान अचानक चर्चा में आए विजेता दहिया को संगठन से बाहर का रास्ता क्यों दिखाया गया? आइए जानते हैं पूरी कहानी।
कौन हैं सौरव दास: आंदोलन की कड़क आवाज और मुख्य प्रवक्ता
सौरव दास वर्तमान में ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के मुख्य प्रवक्ता हैं और हालिया छात्र आंदोलन के दौरान सरकार के साथ हुई वार्ताओं में संगठन की ओर से प्रमुख भूमिका निभाते नजर आए। CJP ने जून में देशव्यापी प्रदर्शनों से ठीक पहले उन्हें अपना मुख्य कम्युनिकेशन फेस बनाया था। पेशे से खोजी पत्रकार रहे सौरव ने कानूनी, न्यायिक और सामाजिक मुद्दों पर लंबे समय तक काम किया है। उन्होंने वर्ष 2016 से 2019 के बीच नोएडा स्थित एमिटी यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में बीए की पढ़ाई पूरी की। इसके अलावा, वह प्रदूषण विरोधी अभियानों समेत कई नागरिक आंदोलनों से भी सक्रिय रूप से जुड़े रहे हैं।
आंदोलन में भूमिका: छात्र आंदोलन के तेज होने के साथ ही सौरव दास CJP के सबसे प्रमुख और चर्चित चेहरों में शामिल हो गए। मीडिया के सामने संगठन का पक्ष रखना, CJP की मांगों को तथ्यों और तर्कों के साथ प्रस्तुत करना, साथ ही केंद्र सरकार के साथ हुई वार्ताओं में केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा के सामने छात्रों की बात मजबूती से रखना उनकी अहम जिम्मेदारियों में शामिल रहा। आंदोलन के दौरान संगठन की ओर से सार्वजनिक संवाद की कमान मुख्य रूप से सौरव ने ही संभाली।
कौन हैं आशुतोष रांका: आंदोलन के पीछे का ‘पॉलिसी माइंड’
अगर सौरव दास आंदोलन की आवाज बने, तो आशुतोष रांका को उसकी रणनीति का प्रमुख सूत्रधार माना जा रहा है। CJP के आधिकारिक प्रवक्ता के रूप में वह शिक्षा सुधारों से जुड़े नीतिगत मसलों पर पार्टी का पक्ष तैयार करने और उसे प्रभावी ढंग से पेश करने की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
कॉर्पोरेट से आंदोलन तक: आशुतोष रांका का शैक्षणिक और पेशेवर अनुभव काफी मजबूत माना जाता है। उन्होंने IIT कानपुर और लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स (LSE) जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में पढ़ाई की है। CJP से जुड़ने से पहले वह लंदन स्थित ग्लोबल कंसल्टिंग फर्म मैकिन्से एंड कंपनी (McKinsey & Company) में कंसलटेंट के तौर पर कार्यरत थे।
आंदोलन में भूमिका: जून में CJP ने अपने प्रवक्ताओं के पैनल की घोषणा करते समय ही स्पष्ट कर दिया था कि शिक्षा सुधारों से जुड़े मुद्दों पर आशुतोष की विशेषज्ञता का उपयोग किया जाएगा। यही कारण रहा कि केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा के साथ हुई अहम बैठकों में सौरव दास के साथ आशुतोष रांका ने भी संगठन का प्रतिनिधित्व किया।
बैकस्टेज हीरो: एक ओर सौरव दास और आशुतोष रांका सरकार के साथ बातचीत में जुटे थे, वहीं दूसरी ओर CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के बीच रहकर आंदोलन का नेतृत्व कर रहे थे। बताया जाता है कि बेरोजगार युवाओं की तुलना “कॉकरोच” से किए जाने वाले एक वायरल बयान के बाद दिपके ने इसी नाम से ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ की शुरुआत की थी, जो बाद में छात्र आंदोलन का प्रमुख मंच बन गई।
विजेता दहिया को क्यों हटाया गया?
इस आंदोलन के दौरान जहां सौरव दास और आशुतोष रांका की भूमिका लगातार मजबूत होती गई, वहीं CJP के तीसरे आधिकारिक प्रवक्ता विजेता दहिया विवादों के चलते संगठन से बाहर हो गए। एक विवाद सामने आने के बाद पार्टी ने उन्हें प्रवक्ता पद से निलंबित कर दिया। विजेता दहिया पेशे से लेखक, फिल्ममेकर और डिजिटल कंटेंट प्लेटफॉर्म्स में पूर्व रिसर्चर रह चुके हैं। छात्र आंदोलन की शुरुआत में CJP ने उन्हें भी अपने प्रमुख चेहरों में शामिल किया था, लेकिन बाद में विवाद के चलते उनकी सक्रिय भूमिका समाप्त हो गई।
क्या था विवाद?
छात्र आंदोलन के दौरान एक ओर संसद के पास प्रदर्शनकारी छात्रों पर दिल्ली पुलिस की कार्रवाई जारी थी, वहीं दूसरी ओर विजेता दहिया का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। वीडियो में वह आराम से बैठकर बर्गर खाते नजर आए और अपने इस व्यवहार को लेकर सफाई भी देते दिखे। वीडियो सामने आने के बाद आंदोलन से जुड़े छात्रों और समर्थकों ने कड़ी नाराजगी जताई। बढ़ते विवाद के बीच CJP ने इसे आंदोलन की भावना के विपरीत और संवेदनशील समय में गैर-जिम्मेदाराना आचरण बताते हुए विजेता दहिया को प्रवक्ता पद से हटा दिया।
विजेता का पक्ष: प्रवक्ता पद से हटाए जाने के बाद विजेता दहिया ने अपने ऊपर लगे आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि उनके खिलाफ उठ रही आपत्तियां राजनीतिक वजहों से प्रेरित हैं। उन्होंने अपने पक्ष में सफाई भी पेश की, लेकिन साथ ही यह स्पष्ट किया कि यदि उनके पद छोड़ने से छात्र आंदोलन और उसके व्यापक उद्देश्य को मजबूती मिलती है, तो उन्हें संगठन के फैसले पर कोई आपत्ति नहीं है। उन्होंने कहा कि आंदोलन का हित किसी भी व्यक्ति से बड़ा है और इसी सोच के साथ वह पार्टी के निर्णय को स्वीकार करते हैं।
अब आगे क्या?
हालिया घटनाक्रम के बाद CJP का आंदोलन केवल NEET या छात्र हितों तक सीमित नहीं दिख रहा, बल्कि यह एक संगठित राजनीतिक और नीतिगत दबाव समूह के रूप में अपनी पहचान बना रहा है। सरकार के साथ वार्ता में सौरव दास और आशुतोष रांका जैसे पेशेवर और शिक्षित चेहरों की सक्रिय भूमिका ने संगठन की रणनीतिक तैयारी को सामने रखा है। वहीं, विजेता दहिया विवाद में पार्टी द्वारा तत्काल कार्रवाई किए जाने से यह भी संकेत मिला कि CJP संगठनात्मक अनुशासन को लेकर सख्त रुख अपनाना चाहती है। इसी बीच 26 जुलाई 2026 को जारी अपने वीडियो संदेश में संस्थापक अभिजीत दिपके ने साफ कहा कि CJP का सफर अभी लंबा है। ऐसे में आने वाले समय में यदि यह संगठन छात्र आंदोलन से आगे बढ़कर सक्रिय राजनीति में अपनी मौजूदगी दर्ज कराता है, तो इसे अप्रत्याशित नहीं माना जाएगा।

