आने वाले महीनों में महंगाई बढ़ने से आम लोगों की जेब पर बोझ बढ़ सकता है। सिस्टेमैटिक्स इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में महंगाई दर आगामी तिमाहियों में बढ़कर 6-7% तक पहुंच सकती है। ऐसे में महंगाई पर लगाम लगाने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) रेपो रेट में बढ़ोतरी कर सकता है। रिपोर्ट में मौजूदा 5.50% रेपो रेट के बढ़कर 6.5-7% तक पहुंचने की आशंका जताई गई है। हालांकि, यह विश्लेषकों का अनुमान है, RBI की ओर से अभी ऐसा कोई आधिकारिक फैसला नहीं लिया गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, कमजोर मानसून और अल नीनो की आशंका आने वाले समय में महंगाई को और बढ़ा सकती हैं। वहीं, कंपनियों की उत्पादन लागत में भी तेजी से इजाफा हो रहा है। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में गैर-वित्तीय कंपनियों की इनपुट लागत सालाना आधार पर करीब 40% बढ़ गई, जबकि कच्चे तेल के दाम में 45% की तेजी दर्ज की गई। बढ़ती लागत का पूरा बोझ ग्राहकों पर डालना कंपनियों के लिए मुश्किल हो रहा है, जिससे उनके मुनाफे पर भी असर पड़ रहा है।
लोगों की महंगाई को लेकर चिंता बढ़ी
रिपोर्ट में RBI के घरेलू महंगाई अपेक्षा सर्वे का जिक्र करते हुए बताया गया है कि सितंबर 2026 में परिवारों की औसत महंगाई अपेक्षा 9.1% रही। इससे संकेत मिलता है कि लोगों को आने वाले महीनों में वस्तुओं और सेवाओं की कीमतें बढ़ने की आशंका है। रिपोर्ट के मुताबिक, खाने-पीने की चीजों, ऊर्जा और उर्वरकों पर सरकार की ओर से मिलने वाली सहायता ने महंगाई के असर को कुछ हद तक कम किया है। अगर इस सहायता में कटौती होती है, तो आम लोगों पर महंगाई का दबाव और बढ़ सकता है।
रेपो रेट बढ़ने से EMI पर क्या असर होगा?
रिपोर्ट के मुताबिक, RBI पहले ही रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी कर इसे 5.50% कर चुका है। अब सिस्टेमैटिक्स इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज का अनुमान है कि महंगाई के बढ़ते जोखिम को देखते हुए ब्याज दरों में 100 से 150 बेसिस पॉइंट तक की अतिरिक्त बढ़ोतरी करनी पड़ सकती है। अगर ऐसा होता है, तो होम लोन, कार लोन और अन्य कर्ज महंगे हो सकते हैं। हालांकि, इसका वास्तविक असर RBI के अगले फैसले और बैंकों की ओर से ब्याज दरों में किए जाने वाले बदलाव पर निर्भर करेगा।
शेयर बाजार और सरकारी बॉन्ड पर भी असर
रिपोर्ट में आगाह किया गया है कि महंगाई में तेजी और ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर रहने से कंपनियों की लागत बढ़ सकती है। इसका असर शेयर बाजार में कंपनियों के वैल्यूएशन पर भी पड़ सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, 10 साल के सरकारी बॉन्ड की यील्ड करीब 7.24% थी। यदि महंगाई का अनुमान उम्मीद से ज्यादा रहता है, तो इसके बढ़कर 7.5% के पार जाने की आशंका है।

