क्या है मुख्तार अंसारी काे बांदा जेल ही लाए जाने का राज ? जानिए इनसाइड स्टोरी

Special Report उत्तर प्रदेश क्राइम

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद मुख्तार को बांदा जेल शिफ्ट किया गया है। बता दें कि यूपी पुलिस की पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था के बीच मुख्तार के काफिले ने 900 किलोमीटर का सफर 16 घंटे में तय किया। इस दौरान तीन बार उसका रूट भी चेंज किया गया। जेल आने से एक घंटे पहले पूरी रोड को बैरिकेड कर दिया गया।

हत्यारोपित बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी विधायक मुख्तार अंसारी को 30 मार्च 2017 को लखनऊ से बांदा स्थित मंडल जेल में शिफ्ट किया गया था। 21 जनवरी 2019 तक मंडल जेल में रहा। इसके बाद यहां से प्रोटक्शन वारंट पर पंजाब भेजा गया, तब से वहां की जेल में था। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को मुख्तार अंसारी को यूपी की जेल में शिफ्ट किए जाने का आदेश दिया। शुक्रवार देर शाम तक बांदा मंडल जेल प्रशासन के बाद दोबाारा मुख्तार अंसारी को शिफ्ट किए जाने का कोई आदेश तो नहीं आया था। लेकिन दोबारा शिफ्टिंग की आशंका में प्रशासन तैयारियों को लेकर अलर्ट रहा। ऐसी चर्चा जोरों पर रही। हालांकि जेल प्रशासन ने मुख्तार असंारी के शिफ्टिंग का कोई भी आदेश मिलने से साफ इनकार किया। बाहुबली विधायक ने लखनऊ जेल में हत्या की आशंका जताई थी, जिसके बाद उसे एंबुलेंस से बांदा स्थित मंडल जेल लाया गया था। उसे यहां अलग कोठरी में कड़ी सुरक्षा की निगरानी में रखा गया था। सुरक्षा की दृष्टि से जेल में दो डिप्टी जेलर की अतिरिक्त तैनाती की गई थी।

मुख्तार अंसारी ने बांदा मंडल जेलमें 21 माह 21 दिन बिताए थे। चर्चाओं के मुताबिक, बाहुबली विधायक को विशेष सुविधा मुहैया कराने के आरोप में तत्कालीन एक डिप्टी जेलर का निलंबन, जेल अधीक्षक और कुछ अन्य कर्मचारी भी विभागीय कार्रवाई की जद में आए थे।

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मुख्तार अंसारी पर बीजेपी विधायक कृष्णानंद राय की हत्या का आरोप है। उस वक्त ये जेल में बंद था। बीजेपी विधायक कृष्णानंद राय को उनके 6 अन्य साथियों को सरेआम गोलीमार उनकी हत्या कर दी गई। हमलावरों ने 6 एके-47 राइफलों से 400 से ज्यादा गोलियां चलाई थी। मारे गए सातों लोगों के शरीर से 67 गोलियां बरामद की गई थी। इस हमले का एक महत्वपूर्ण गवाह शशिकांत राय 2006 में रहस्यमई परिस्थितियों में मृत पाया गया था। उसने कृष्णानंद राय के काफिले पर हमला करने वालों में से अंसारी और बजरंगी के निशानेबाजों अंगद राय और गोरा राय को पहचान लिया था। इससे पहले जमीनों पर कब्जे के विवाद में उनकी जंग पूर्व सांसद और बाहुबली ब्रजेश सिंह से भी हुई थी। मुख्तार के खिलाफ हत्या, अपहरण, धमकी जैसे कई मामले दर्ज हैं।

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