जम्मू-कश्मीर के कुलगाम जिले में शुक्रवार शाम आतंकियों ने प्रवासी श्रमिकों को निशाना बनाकर हमला किया। इस हमले में छत्तीसगढ़ के दो मजदूरों की मौत हो गई। आतंकियों की गोलीबारी में दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए थे। अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने दीपक को मृत घोषित कर दिया, जबकि दूसरे घायल भूपेंद्र कुमार ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। इस दर्दनाक घटना पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पीड़ित परिवारों के साथ पूरी मजबूती से खड़ी है और हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। मुख्यमंत्री ने एक्स पर पोस्ट कर कहा था कि कुलगाम में हुए कायराना आतंकी हमले में एक श्रमिक की मौत और दूसरे के घायल होने की खबर बेहद दुखद है। उस समय तक दूसरे घायल श्रमिक का अस्पताल में इलाज चल रहा था। उन्होंने अधिकारियों को आवश्यक निर्देश देने की बात भी कही और मृतक को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए घायल के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की थी। बाद में इलाज के दौरान घायल श्रमिक भूपेंद्र कुमार की भी मौत हो गई।
इलाज के दौरान भूपेंद्र ने भी दम तोड़ा
शुक्रवार देर शाम कुलगाम के केलम इलाके में स्थित एक ईंट-भट्ठे पर काम कर रहे प्रवासी मजदूरों पर आतंकियों ने अचानक हमला कर दिया। हमलावरों ने मजदूरों को निशाना बनाकर गोलीबारी की, जिसमें 24 वर्षीय दीपक रात्रे की मौके पर ही मौत हो गई। हमले में 28 वर्षीय भूपेंद्र गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें पहले सरकारी मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) अनंतनाग में भर्ती कराया गया, जहां से हालत नाजुक होने पर श्रीनगर के एसकेआईएमएस सौरा अस्पताल रेफर किया गया। डॉक्टरों के तमाम प्रयासों के बावजूद इलाज के दौरान भूपेंद्र ने भी दम तोड़ दिया।
10 दिन पहले हुई थी पुलिसकर्मी की हत्या
कश्मीर में हाल के दिनों में आतंकी गतिविधियों में एक बार फिर तेजी देखने को मिली है। करीब 10 दिन पहले अनंतनाग में आतंकियों ने एक पुलिस अधिकारी की गोली मारकर हत्या कर दी थी। अब कुलगाम में प्रवासी मजदूरों को निशाना बनाकर किए गए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ा दी है। घटना के बाद सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सतर्क हो गई हैं। सुरक्षाबलों ने हमले वाले इलाके की घेराबंदी कर व्यापक तलाशी अभियान शुरू कर दिया है ताकि हमलावरों का जल्द पता लगाया जा सके। इसी बीच श्रीनगर में सुरक्षा जांच के दौरान एक संदिग्ध कार ने भी अधिकारियों का ध्यान खींचा। चेकपॉइंट पर बिना नंबर प्लेट की कार पहुंची और सुरक्षाकर्मियों को देखकर चालक भागने की कोशिश करने लगा। पुलिस ने उसका पीछा किया और बाद में वाहन को बरामद कर लिया। फिलहाल कार को कब्जे में लेकर मामले की जांच की जा रही है।
टीआरएफ ने ली हमले की जिम्मेदारी
सुरक्षा एजेंसियों के शुरुआती इनपुट के अनुसार, कुलगाम हमले की जिम्मेदारी पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठन द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) ने ली है। TRF को प्रतिबंधित आतंकी संगठन Lashkar-e-Taiba का प्रॉक्सी संगठन माना जाता है। सोशल मीडिया पर वायरल संदेशों में इस संगठन ने बाहरी लोगों और जम्मू-कश्मीर पुलिसकर्मियों को आगे भी निशाना बनाने की धमकी दी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 22 जुलाई को अनंतनाग में पुलिसकर्मी की हत्या की घटना के पीछे भी इसी संगठन का हाथ बताया जा रहा है। उस हमले में जम्मू-कश्मीर पुलिस के हेड कॉन्स्टेबल आशिक हुसैन कुरैशी की अनंतनाग के लाल चौक इलाके में बेहद करीब से गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। यह वारदात अमरनाथ यात्रा मार्ग पर स्थित एक व्यस्त बाजार क्षेत्र में हुई थी। लगातार सामने आ रही इन घटनाओं ने घाटी में सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। करीब दस दिनों के भीतर हुए दो बड़े आतंकी हमले इस बात के संकेत माने जा रहे हैं कि आतंकवादी एक बार फिर टारगेटेड किलिंग की रणनीति अपनाने की कोशिश कर रहे हैं।
घाटी में चुनिंदा हत्याओं की घटनाएं बढ़ीं
हालिया आतंकी घटनाओं ने घाटी में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर नई चिंताएं खड़ी कर दी हैं। लगातार हो रहे हमलों से आशंका जताई जा रही है कि आतंकवादी एक बार फिर सुरक्षाकर्मियों और बाहरी नागरिकों को चुनकर निशाना बनाने की रणनीति अपना रहे हैं। अनुच्छेद 370 हटने के बाद और सुरक्षा अभियानों के तेज होने से पिछले कुछ वर्षों में आतंकी घटनाओं में उल्लेखनीय गिरावट आई थी, जिसके चलते इस तरह की टारगेटेड किलिंग की घटनाएं भी काफी कम हो गई थीं। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि टीआरएफ जैसे संगठन खुद को स्थानीय प्रतिरोध समूह के रूप में पेश करने की कोशिश करते हैं, जबकि उनकी कार्यशैली पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठनों से मिलती-जुलती है। ऐसे संगठन अक्सर बाहरी मजदूरों, सुरक्षाबलों और अन्य आसान लक्ष्यों को निशाना बनाकर दहशत फैलाने, आर्थिक गतिविधियों को प्रभावित करने और व्यापक प्रचार हासिल करने की कोशिश करते हैं।
दोनों हमलों की जांच कर रहीं एजेंसियां
कश्मीर में हर साल छत्तीसगढ़, बिहार और उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों से बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर रोजगार के लिए पहुंचते हैं। ये श्रमिक मुख्य रूप से निर्माण कार्य, ईंट-भट्टों और बागवानी जैसे क्षेत्रों में काम करते हैं। सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, आतंकवादी अक्सर ऐसे मजदूरों को निशाना बनाकर बाहरी लोगों के बीच भय का माहौल पैदा करने की कोशिश करते हैं। हालिया घटनाएं इस बात का संकेत हैं कि भले ही पिछले कुछ वर्षों में जम्मू-कश्मीर में आतंकी हिंसा में कमी आई हो, लेकिन सीमा पार से समर्थित आतंकी नेटवर्क अब भी सक्रिय हैं। ये संगठन सुरक्षाबलों और बाहरी नागरिकों को निशाना बनाकर हाई-प्रोफाइल हमलों के जरिए दहशत फैलाने और अपनी मौजूदगी का संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं। फिलहाल अनंतनाग और कुलगाम, दोनों आतंकी हमलों की जांच जारी है। सुरक्षा एजेंसियां हमलों के पीछे सक्रिय आतंकी मॉड्यूल की पहचान कर उसे पूरी तरह ध्वस्त करने के लिए अभियान चला रही हैं।

