तेलंगाना कांग्रेस में जारी विवाद के बीच मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने मंत्री कोंडा सुरेखा को मंत्रिमंडल से हटाने का फैसला किया है। इसके लिए राज्यपाल को सिफारिश भेज दी गई है। यह कार्रवाई प्रदेश कांग्रेस की अनुशासनात्मक समिति की सिफारिश के बाद हुई, जिसने सुरेखा की बेटी के विवादित बयानों को लेकर कार्रवाई की बात कही थी। समिति ने प्लानिंग बोर्ड के पद से चिन्ना रेड्डी को हटाने की भी सिफारिश की थी। उन्हें पद से हटाकर अब गडवाल विजयलक्ष्मी को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है।
कोंडा सुरेखा से जुड़ा विवाद उनकी बेटी कोंडा सुष्मिता पटेल के अगस्त में दिए गए एक बयान के बाद शुरू हुआ। एक सार्वजनिक कार्यक्रम में सुष्मिता ने मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी और उनके परिवार को लेकर टिप्पणी की थी। सुरेखा ने इसे बेटी की निजी राय बताते हुए खुद को इससे अलग कर लिया था, लेकिन इसके बावजूद कांग्रेस के भीतर रेवंत खेमे के विधायकों ने सुरेखा के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग तेज कर दी।
रेवंत ने की थी कार्रवाई की मांग
विवाद बढ़ने के बाद मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने दिल्ली दौरे के दौरान कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल के सामने भी सुरेखा का मुद्दा उठाया और सख्त कार्रवाई की मांग की। हालांकि, बढ़ते दबाव के बावजूद सुरेखा ने इस्तीफा देने से इनकार कर दिया। बुधवार को उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से मुलाकात की, लेकिन उन्हें संकेत दे दिया गया कि पार्टी उनके खिलाफ कार्रवाई करने जा रही है।
डैमेज कंट्रोल शुरू
ओबीसी महिला नेता कोंडा सुरेखा को कैबिनेट से हटाने के बाद संभावित राजनीतिक नुकसान की भरपाई के लिए रेवंत रेड्डी सरकार ने वारंगल की तीन ओबीसी महिला नेताओं को अहम जिम्मेदारियां सौंपी हैं। गडवाल विजयलक्ष्मी को तेलंगाना योजना बोर्ड का उपाध्यक्ष, नेरेला शारदा को राज्य महिला आयोग का अध्यक्ष और पूर्व राज्यसभा सांसद जी. सुधा रानी को काकतीय शहरी विकास प्राधिकरण का अध्यक्ष बनाया गया है। इससे पहले भी तेलंगाना की सियासत में विवादों को लेकर काफी हलचल देखने को मिली थी।

