G7 देशों ने ईंधन की बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए अपने रणनीतिक तेल भंडार से करीब 10 करोड़ बैरल तेल जारी करने पर सहमति जताई है। इस अभियान की शुरुआत बड़े पैमाने पर डीजल की सप्लाई बढ़ाने से होगी। अमेरिका में ईंधन की कीमतों के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने के बाद यह फैसला लिया गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी इस कदम की जानकारी देते हुए कहा कि रणनीतिक भंडार से डीजल जारी करने की प्रक्रिया तुरंत शुरू की जाएगी। G7 के इस फैसले से बाजार में ईंधन की उपलब्धता बढ़ने और कीमतों पर दबाव कम होने की उम्मीद जताई जा रही है।
डोनाल्ड ट्रंप और रिपब्लिकन पार्टी पर भारी दबाव
नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनाव से पहले अमेरिका में बढ़ती कीमतों को लेकर डोनाल्ड ट्रंप और रिपब्लिकन पार्टी पर दबाव बढ़ रहा है। इसी बीच ट्रंप ने शुक्रवार को सोशल मीडिया के जरिए G7 के फैसले की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि यूरोप अपने रणनीतिक भंडार में मौजूद बड़ी मात्रा में डीजल जारी करने पर सहमत हो गया है। ट्रंप के मुताबिक, डीजल जारी करने की प्रक्रिया तुरंत शुरू की जाएगी।
गैस और ईंधन की कीमतों में जोरदार बढ़ोतरी
ईरान के साथ जारी युद्ध और व्यापारिक तनाव के चलते अमेरिका में तेल समेत कई जरूरी वस्तुओं की कीमतों में तेज बढ़ोतरी हुई है। इस महंगाई का असर डोनाल्ड ट्रंप की लोकप्रियता पर भी पड़ता दिख रहा है। करीब 8 महीने से जारी संघर्ष के दौरान अमेरिका सहित कई देशों में गैस और ईंधन की कीमतें काफी बढ़ गई हैं। ट्रंप लगातार यह कहते रहे हैं कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने के लिए बढ़ती कीमतों की यह कीमत जरूरी है। उनका कहना है कि युद्ध खत्म होने के बाद ईंधन की कीमतों में कमी आएगी। हालांकि, फिलहाल इस संघर्ष के जल्द खत्म होने के स्पष्ट संकेत नजर नहीं आ रहे हैं।
बड़े पैमाने पर डीजल जारी करेंगे G7 के सदस्य देश
ईंधन की बढ़ती कीमतों को काबू में करने के लिए इस पूरी प्रक्रिया का समन्वय अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) करेगी। फ्रांस के मुताबिक, G7 और उसके सहयोगी देश करीब 10 करोड़ बैरल तेल जारी करने की योजना को तुरंत लागू करेंगे। यह प्रक्रिया चार महीने तक चलेगी, जबकि शुरुआती 20 दिनों में बड़े पैमाने पर डीजल बाजार में उतारा जाएगा। वहीं, AP-NORC के ताजा सर्वे में सामने आया है कि ज्यादातर अमेरिकी बढ़ती कीमतों के लिए ट्रंप को जिम्मेदार मानते हैं। सर्वे के मुताबिक, अर्थव्यवस्था को संभालने के मुद्दे पर ट्रंप की लोकप्रियता रेटिंग भी नए निचले स्तर पर पहुंच गई है।

