CEC को हटाने की क्या है कानूनी प्रक्रिया? ज्ञानेश कुमार पर क्यों एकजुट हुआ विपक्ष, जानें पूरा मामला

CEC Gyanesh Kumar News: मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर सामने आई एक रिपोर्ट के बाद मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार विपक्ष के निशाने पर हैं। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि SIR की प्रक्रिया से जुड़े कुछ फैसलों को लेकर चुनाव आयुक्तों के बीच मतभेद थे। इसके बाद विपक्ष CEC को पद से हटाने और उनके इस्तीफे की मांग कर रहा है। इस मांग को लेकर कांग्रेस ने शुक्रवार को देशभर में प्रदर्शन भी किया। वहीं, चुनाव आयोग ने रिपोर्ट पर सफाई देते हुए कहा कि चुनाव आयुक्तों के बीच किसी मुद्दे पर असहमति होना असामान्य नहीं है। आयोग के मुताबिक, मतभेद के बावजूद फैसले सहमति से लिए जाते हैं और SIR से जुड़े फैसले भी सभी चुनाव आयुक्तों की सहमति से लिए गए थे। हालांकि, इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि तीन में से दो चुनाव आयुक्तों ने SIR से जुड़े कई फैसलों पर अपनी असहमति जताई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, SIR से संबंधित कुछ फैसलों की जानकारी मुख्य चुनाव आयुक्त ने अन्य आयुक्तों को नहीं दी और उन्हें इसकी जानकारी बाद में मिली।

महाभियोग प्रस्ताव लाने की तैयारी में विपक्ष
इस रिपोर्ट के बाद पूरा विपक्ष एकजुट है और वह ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने के लिए महाभियोग प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रहा है। सवाल यह है कि क्या यह प्रस्ताव कानूनी रूप से मुमकिन है? और अगर मुमकिन है, तो इसका रास्ता कितना कठिन है? कांग्रेस के सूत्रों के मुताबिक, संयुक्त विपक्ष जल्द ही दोनों सदनों में सीईसी ज्ञानेश कुमार को हटाने का प्रस्ताव लाएगा। यह खबर एक दिन बाद आई है जब इंडियन एक्सप्रेस की जांच में यह सामने आया कि निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने आयोग के फैसलों और प्रक्रियाओं पर आंतरिक रूप से गंभीर सवाल उठाए हैं। यहां यह बात समझनी जरूरी है कि चुनाव आयोग में सीईसी कोई ‘सुप्रीम बॉस’ नहीं होता, बल्कि वह ‘बराबरी वालों में’ पहला होता है। सैद्धांतिक रूप से फैसले तीनों आयुक्तों की सहमति से लिए जाने चाहिए।

यहां भी SC के जज को हटाने वाली प्रक्रिया का पालन
मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) की नियुक्ति और उन्हें पद से हटाने के प्रावधान संविधान के अनुच्छेद 324 और 2023 के CEC एवं अन्य चुनाव आयुक्त अधिनियम में दिए गए हैं। मौजूदा कानून के तहत CEC और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति राष्ट्रपति करते हैं, जो प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और प्रधानमंत्री द्वारा नामित केंद्रीय कैबिनेट मंत्री वाली चयन समिति की सिफारिश पर होती है। उनका कार्यकाल 6 साल या 65 वर्ष की आयु तक होता है, जो भी पहले हो।

CEC को हटाने की प्रक्रिया बेहद कड़ी रखी गई है। संविधान के अनुच्छेद 324(5) के मुताबिक, मुख्य चुनाव आयुक्त को उसी तरीके और उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है, जिस तरह सुप्रीम कोर्ट के जज को हटाया जाता है। यानी केवल राजनीतिक असहमति या किसी फैसले से नाराजगी हटाने का आधार नहीं बनती। कानून में CEC को हटाने के लिए ‘सिद्ध कदाचार’ या ‘अक्षमता’ जैसे आधारों की संवैधानिक व्यवस्था है।

CEC को हटाने के हैं दो आधार
यही प्रावधान 2023 के अधिनियम की धारा 11(2) में भी देखा जा सकता है। अनुच्छेद में आगे कहा गया है कि ‘किसी अन्य निर्वाचन आयुक्त या क्षेत्रीय निर्वाचन आयुक्त को मुख्य निर्वाचन आयुक्त की सिफारिश के अलावा पद से नहीं हटाया जा सकता।’ संविधान के अनुच्छेद 124(4) के अनुसार, जिसमें सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश को हटाने की प्रक्रिया निर्धारित है, किसी न्यायाधीश को केवल ‘सिद्ध कदाचार या अक्षमता’ के आधार पर ही हटाया जा सकता है। कदाचार में भ्रष्ट आचरण या पद का दुरुपयोग शामिल हो सकता है। समय के साथ अदालतों ने इसकी व्याख्या में ऐसे कार्यों को भी शामिल किया है, जो CEC के पद की गरिमा और जिम्मेदारियों के अनुरूप नहीं हैं, या CEC द्वारा अपने आधिकारिक कर्तव्यों का निर्वहन करने में विफलता को भी इसमें शामिल माना गया है। वहीं, अक्षमता से आशय ऐसी स्थिति से है, जिसमें संबंधित अधिकारी अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने में सक्षम न हो।

CEC को हटाने की प्रक्रिया
•सबसे पहले, दोनों सदनों में इस आरोप के साथ एक नोटिस लाना होता है
•लोकसभा में कम से कम 100 सांसदों और राज्यसभा में 50 सांसदों के हस्ताक्षर जरूरी हैं
•सदन के पीठासीन अधिकारी यानी स्पीकर या चेयरमैन इसे स्वीकार करें या खारिज करें, यह उनके विवेक पर है
•अगर स्वीकार हो जाए, तो एक जांच समिति बनती है जो आरोपों की पड़ताल करती है
•अंत में, दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत से प्रस्ताव पास होना जरूरी है -तभी राष्ट्रपति हटाने का आदेश जारी करते हैं

दो-तिहाई बहुमत जुटा पाना विपक्ष के लिए चुनौती
CEC को हटाने की प्रक्रिया में राष्ट्रपति की भूमिका संवैधानिक प्रावधानों तक सीमित होती है। संसद की निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद राष्ट्रपति उसी के अनुरूप कार्रवाई करते हैं। संविधान के अनुच्छेद 324(5) के तहत CEC को हटाने की प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के जज को हटाने जैसी है। इस साल मार्च में भी TMC के नेतृत्व में विपक्ष ने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ लोकसभा में 130 और राज्यसभा में 63 सांसदों के हस्ताक्षर वाला प्रस्ताव दिया था। दोनों सदनों के पीठासीन अधिकारियों ने अप्रैल में इसे स्वीकार नहीं किया। अब SIR को लेकर सामने आई नई रिपोर्ट के बाद विपक्ष फिर से हटाने की प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी में है। हालांकि, प्रस्ताव को अंतिम रूप से पारित कराने के लिए संसद के दोनों सदनों में विशेष बहुमत की जरूरत होगी। इसलिए मौजूदा संसदीय संख्या को देखते हुए इसका आगे बढ़ना विपक्ष के लिए चुनौतीपूर्ण है।

सीईसी के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज
टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने गुरुवार को दिल्ली के संसद मार्ग थाने में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ शिकायत दर्ज कर प्राथमिकी की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि CEC को अन्य चुनाव आयुक्तों की दर्ज असहमति के बावजूद आयोग के नाम पर फैसले या संदेश जारी करने का अधिकार नहीं है। मोइत्रा ने SIR प्रक्रिया में सरकारी धन के इस्तेमाल पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि CEC और चुनाव आयुक्तों को 2023 के कानून की धारा 16 के तहत आधिकारिक कामकाज के लिए कानूनी संरक्षण मिला है, लेकिन यह प्रावधान पुलिस में शिकायत दर्ज करने या जांच से संबंधित कार्रवाई को स्पष्ट रूप से नहीं रोकता।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

बिहार के इन 2 हजार लोगों का धर्म क्या है? विश्व का सबसे अमीर क्रिकेट बोर्ड कौन सा है? दंतेवाड़ा एक बार फिर नक्सली हमले से दहल उठा SATISH KAUSHIK PASSES AWAY: हंसाते हंसाते रुला गए सतीश, हृदयगति रुकने से हुआ निधन India beat new Zealand 3-0. भारत ने किया कीवियों का सूपड़ा साफ, बने नम्बर 1