बिहार की राजनीति में लालू यादव के परिवार को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज है। सिंगापुर से पटना लौटीं रोहिणी आचार्य को लेकर कयास लगाए जा रहे हैं कि उन्हें राष्ट्रीय जनता दल यानी RJD में कोई बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है। हालांकि, रोहिणी आचार्य ने खुद अपने पटना लौटने को राजनीति से जोड़ने से इनकार किया है।
1 अक्टूबर को पटना पहुंचने के बाद रोहिणी आचार्य ने कहा कि उनके पिता लालू प्रसाद यादव ने उन्हें बुलाया था और वह अपने माता-पिता से मिलने आई हैं। उन्होंने साफ कहा कि उनके आने को राजनीतिक रंग नहीं दिया जाना चाहिए।
इसके बावजूद उनकी वापसी ने बिहार के सियासी गलियारों में चर्चाओं को बढ़ा दिया है। कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया है कि RJD में उनकी संभावित भूमिका को लेकर पार्टी के भीतर विचार-विमर्श चल रहा है। हालांकि, रोहिणी आचार्य को पार्टी की कोई नई बड़ी जिम्मेदारी दिए जाने की आधिकारिक घोषणा अभी नहीं हुई है।
रोहिणी की पटना वापसी ऐसे समय हुई है जब RJD पहले से ही नेतृत्व और परिवार से जुड़े सवालों को लेकर चर्चा में है। जनवरी 2026 में तेजस्वी यादव को RJD का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाने के बाद भी रोहिणी आचार्य ने पार्टी नेतृत्व को लेकर कई सवाल उठाए थे।
अब लालू यादव के बुलावे पर उनकी वापसी को परिवार के साथ रिश्तों में आई गर्माहट के संकेत के तौर पर भी देखा जा रहा है। लेकिन क्या रोहिणी आचार्य को RJD में कोई अहम जिम्मेदारी मिलेगी, इसका जवाब पार्टी के आधिकारिक फैसले के बाद ही साफ होगा।

