पश्चिम बंगाल की राजनीति में टीएमसी को एक और बड़ा झटका लगा है। पार्टी की वरिष्ठ नेता सायानी घोष के भी बागी सांसदों के समूह में शामिल होने की चर्चा तेज हो गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्होंने लोकसभा स्पीकर को पत्र लिखकर अलग बैठने और एनडीए को समर्थन देने की इच्छा जताई है। इससे पहले सुष्मिता देव के पार्टी और राज्यसभा से इस्तीफा देने के बाद टीएमसी की मुश्किलें और बढ़ती नजर आ रही हैं।
कौन हैं सयानी घोष?
टीएमसी की प्रमुख नेताओं में शामिल सायानी घोष पश्चिम बंगाल की जानी-मानी अभिनेत्री, गायिका और सांसद हैं। वह वर्तमान में जादवपुर लोकसभा सीट का प्रतिनिधित्व करती हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने पार्टी नेतृत्व से दूरी बनाते हुए टीएमसी के बागी सांसदों के साथ जाने का फैसला किया है, जिसे पार्टी के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है।
चर्चा और विवादों से रहा है सयानी का नाता
सायानी घोष अपने बेबाक बयानों और लोकसभा में सत्ता पक्ष पर किए जाने वाले तीखे कटाक्षों के लिए जानी जाती हैं। बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान उनके एक गीत ने भी काफी चर्चा बटोरी थी। इस गाने को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया था, जिसके बाद विपक्षी दलों ने टीएमसी और ममता बनर्जी पर निशाना साधते हुए तुष्टीकरण की राजनीति के आरोप लगाए थे।
आखिर क्यों बागी बनी सायनी?
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सायानी घोष को पार्टी में अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर असमंजस महसूस हो रहा था। बताया जा रहा है कि चुनाव प्रचार के दौरान विपक्ष के निशाने पर आने के बावजूद उन्हें नेतृत्व का अपेक्षित समर्थन नहीं मिला। सूत्रों का दावा है कि उस दौर में उन्होंने खुद को अलग-थलग महसूस किया, जिससे उनकी नाराजगी बढ़ी। हालांकि, इन दावों पर अब तक न तो सायानी घोष और न ही टीएमसी की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया आई है।
