राष्ट्रीय एकता दिवस के अवसर पर सरदार वल्लभभाई पटेल के रिश्तेदार भूपेंद्र मनुभाई पटेल ने उनसे जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा साझा किया। उन्होंने बताया कि सरदार पटेल सरकारी गाड़ी का इस्तेमाल निजी कामों के लिए करने से हमेशा परहेज करते थे। एक बार उन्होंने अपने परिचित को कहीं भेजने के लिए सरकारी वाहन उपलब्ध होने के बावजूद टैक्सी बुलवाई थी। सरदार पटेल का मानना था कि सरकारी गाड़ी और जनता के पैसों का उपयोग केवल सरकारी कामों के लिए ही किया जाना चाहिए। उनका यह व्यवहार सार्वजनिक जीवन में ईमानदारी और सादगी की बड़ी मिसाल है।
प्रधानमंत्री मोदी से जुड़ा अनुभव भी किया साझा
भूपेंद्र मनुभाई पटेल ने यह किस्सा ‘मोदी स्टोरी’ पर जारी एक वीडियो के जरिए साझा किया। इस वीडियो में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जुड़ा एक अनुभव भी बताया। उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी के एक कार्यक्रम के दौरान उन्हें प्रधानमंत्री के परिवार से मिलने का मौका मिला था।
सरदार पटेल को PM मोदी ने दिया बड़ा सम्मान
भूपेंद्र मनुभाई पटेल ने सरदार वल्लभभाई पटेल को मिले सम्मान पर बात करते हुए कहा कि आज तक किसी ने उन्हें इतना बड़ा सम्मान नहीं दिया। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरदार पटेल के योगदान और उनकी दूरदर्शी सोच से बेहद प्रभावित हैं। भूपेंद्र के अनुसार, सरदार पटेल में भविष्य को भांपने और दूर की सोच रखने की जो क्षमता थी, वैसी ही झलक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के व्यक्तित्व में भी देखने को मिलती है।
बारडोली सत्याग्रह से जुड़ा सुनाया पुराना किस्सा
भूपेंद्र पटेल ने बारडोली सत्याग्रह के समय सरदार वल्लभभाई पटेल के करीबी रहे एक व्यक्ति से जुड़ा दिलचस्प किस्सा भी साझा किया। उन्होंने बताया कि एक बार सरदार पटेल दिल्ली में सरकारी गाड़ी से जा रहे थे। इसी दौरान रास्ते में उन्हें वह व्यक्ति दिखाई दिया। उसे देखते ही उन्होंने ड्राइवर को गाड़ी रोकने के लिए कहा और उसे पास बुलाकर दिल्ली आने की वजह पूछी। उस व्यक्ति ने बताया कि वह शहर घूमने आया है। इसके बाद सरदार पटेल उसे अपने घर ले गए और लगातार दो दिनों तक दिल्ली के विभिन्न ऐतिहासिक और प्रमुख स्थानों की सैर कराई।
निजी काम के लिए टैक्सी मंगवाई, सरकारी गाड़ी नहीं दी
दिल्ली में दो दिन घूमने के बाद जब उस व्यक्ति ने वापस लौटने की बात कही, तो सरदार पटेल ने उसके लिए एक निजी टैक्सी की व्यवस्था कराई। इस पर उस व्यक्ति ने हैरानी जताते हुए पूछा कि जब उनके पास खुद की गाड़ी मौजूद है, तो टैक्सी बुलाने की क्या जरूरत है? इसके जवाब में सरदार पटेल ने स्पष्ट किया कि उनके पास मौजूद गाड़ी सरकारी है और उसका इस्तेमाल सिर्फ सरकारी कामों के लिए ही किया जा सकता है। निजी काम के लिए सरकारी वाहन का उपयोग करना उन्हें उचित नहीं लगता था।
सरकारी पैसे का निजी इस्तेमाल नहीं करते थे पटेल
भूपेंद्र मनुभाई पटेल के मुताबिक, सरदार वल्लभभाई पटेल ने अपने निजी कार्यों के लिए कभी भी सरकारी खजाने से एक पैसा खर्च नहीं किया। वह जनता के धन और सरकारी संसाधनों के इस्तेमाल को लेकर बेहद सजग रहते थे। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक धन के निजी उपयोग को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सोच भी सरदार पटेल से काफी मिलती-जुलती है। गौरतलब है कि सरदार पटेल के विचार और उनका सादगीपूर्ण जीवन आज भी लाखों लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।

