भारत की कंपनियों को 2005 से 2024 के बीच चीनी कंपनियों की तुलना में काफी कम सरकारी सहायता मिली। आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन (OECD) की एक रिपोर्ट के अनुसार, 15 प्रमुख उद्योगों की 525 बड़ी विनिर्माण कंपनियों का अध्ययन किया गया, जिसमें सब्सिडी, कर रियायतों और कम ब्याज दर वाले ऋण जैसे सरकारी समर्थन का आकलन किया गया। रिपोर्ट में भारतीय और चीनी कंपनियों को मिलने वाली सहायता के स्तर में बड़ा अंतर सामने आया है।
चीनी कंपनियों को मिली औसतन 3 से 8 गुना ज्यादा सरकारी मदद
OECD की रिपोर्ट के अनुसार, 2005 से 2024 के बीच चीनी कंपनियों को OECD देशों की कंपनियों की तुलना में औसतन 3 से 8 गुना अधिक सरकारी सहायता मिली। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि चीन को मिला समर्थन भारत, ब्राजील और इंडोनेशिया जैसी गैर-OECD अर्थव्यवस्थाओं की कंपनियों से भी कहीं ज्यादा रहा। OECD 38 विकसित देशों का एक अंतर-सरकारी संगठन है, जो आर्थिक विकास, व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने के लिए काम करता है।
चीनी कंपनियों की वैश्विक बाजार हिस्सेदारी में सरकारी मदद से 60 प्रतिशत की बढ़ोतरी
OECD की रिपोर्ट के मुताबिक, 2005 से 2023 के बीच वैश्विक बाजार में कंपनियों की बढ़ती हिस्सेदारी का करीब 22 प्रतिशत हिस्सा सरकारी सब्सिडी की वजह से रहा। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि चीनी कंपनियों की वैश्विक बाजार हिस्सेदारी में हुई लगभग 60 प्रतिशत बढ़ोतरी को सीधे तौर पर उन्हें मिली सरकारी सहायता और प्रोत्साहन योजनाओं से जोड़ा जा सकता है।
वैश्विक बाजारों में कम हुआ भरोसा
OECD की रिपोर्ट के अनुसार, सब्सिडी से जुड़ी जानकारी साझा नहीं करने वाले WTO सदस्य देशों की संख्या 1995 में 26 से बढ़कर 2025 में 117 हो गई है। इससे वैश्विक व्यापार में पारदर्शिता और भरोसे पर असर पड़ा है। वहीं, भारत स्टील, सीमेंट, उर्वरक, भारी मशीनरी और ग्लास-सिरेमिक जैसे कई प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
