साउथ अफ्रीका के खिलाफ डरबन में खेले जा रहे टेस्ट मुकाबले में ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज मैट रेनशॉ ने शानदार शतक जड़कर लंबे समय से चले आ रहे इंतजार को खत्म कर दिया। उन्होंने अपने टेस्ट करियर का दूसरा शतक लगाया। रेनशॉ ने इससे पहले जनवरी 2017 में टेस्ट में सेंचुरी बनाई थी। इसके बाद वह करीब 9 साल और 18 पारियों तक शतक लगाने में नाकाम रहे, लेकिन इस बार दमदार बल्लेबाजी करते हुए उन्होंने शतकों के सूखे को खत्म कर दिया। खास बात यह है कि बांग्लादेश के खिलाफ सीरीज में उन्हें तीन साल के लंबे अंतराल के बाद टेस्ट टीम में खेलने का मौका मिला था, जिसका फायदा उठाते हुए उन्होंने अपनी काबिलियत साबित की।
रेनशॉ ने पाकिस्तान के खिलाफ लगाया था पहला शतक
मैट रेनशॉ के लिए यह शतक बेहद खास है, क्योंकि करीब 9 साल के लंबे इंतजार के बाद उन्होंने टेस्ट क्रिकेट में सेंचुरी लगाई है। इससे पहले उन्होंने जनवरी 2017 में पाकिस्तान के खिलाफ सिडनी टेस्ट में 184 रनों की शानदार पारी खेली थी। रेनशॉ का यह शतक रिकॉर्ड के लिहाज से भी काफी अहम है। साल 2014 के बाद यह पहला मौका है, जब साउथ अफ्रीका की धरती पर किसी ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज ने टेस्ट शतक लगाया है। वहीं, डरबन के किंग्समीड मैदान पर साल 2009 के बाद किसी ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी के बल्ले से निकला यह पहला टेस्ट शतक है।
2016 में रेनशॉ ने किया था टेस्ट डेब्यू
मैट रेनशॉ के क्रिकेट करियर पर नजर डालें तो उन्होंने साल 2016 में साउथ अफ्रीका के खिलाफ ही टेस्ट क्रिकेट में डेब्यू किया था। अब तक वह 16 टेस्ट मैच खेल चुके हैं, जिनकी 26 पारियों में उनके नाम 750 रन दर्ज हैं। इस दौरान उन्होंने 2 शतक और 3 अर्धशतक लगाए हैं। वहीं, फर्स्ट क्लास क्रिकेट में रेनशॉ का रिकॉर्ड और भी शानदार रहा है। उन्होंने इस फॉर्मेट में 8200 से अधिक रन बनाए हैं, जिसमें 27 शतक और 24 अर्धशतक शामिल हैं। फर्स्ट क्लास क्रिकेट में उनका सर्वश्रेष्ठ स्कोर नाबाद 200 रन है।
रेनशॉ में मुश्किल समय में की अच्छी बल्लेबाजी
मैच में ऑस्ट्रेलिया की स्थिति उस समय मुश्किल हो गई थी, जब टीम ने महज 84 रन के स्कोर पर अपने तीन अहम विकेट गंवा दिए। ऐसे वक्त पर मैट रेनशॉ ने क्रीज पर उतरकर जिम्मेदारी संभाली और साउथ अफ्रीका के गेंदबाजों का मजबूती से सामना किया। उन्होंने संभलकर बल्लेबाजी करते हुए 117 गेंदों में अपना अर्धशतक पूरा किया। इसके बाद भी रेनशॉ ने अपना धैर्य बनाए रखा और दूसरे दिन के पहले सत्र में ही अर्धशतक को शानदार शतक में तब्दील कर दिया। उनकी इस दमदार और संयम भरी पारी ने ऑस्ट्रेलियाई टीम को मुश्किल परिस्थिति से उबारने में अहम भूमिका निभाई और टीम का स्कोर 300 रन के पार पहुंचाने में मदद की।

