जम्मू कश्मीर के लेफ्टिनेंट गवर्नर मनोज सिन्हा ने सोमवार को श्री अमरनाथ जी की पवित्र गुफा में ‘पहली पूजा’ की। लेफ्टिनेंट गवर्नर ने बाबा बर्फानी का आशीर्वाद लिया और सभी की शांति, खुशहाली, सेहत और कल्याण के लिए प्रार्थना की। इसके साथ ही साल में एक बार होने वाली अमरनाथ यात्रा की औपचारिक शुरुआत हुई। श्रद्धालुओं के लिए अमरनाथ यात्रा तीन जुलाई से शुरू होगी। यात्रियों की सुरक्षा के लिए सभी इंतजाम पूरे किए गए हैं। उम्मीद की जा रही है कि इस वर्ष रिकॉर्ड श्रद्धालु बाबा अमरनाथ के दर्शन पर आयेंगे।
लेफ्टिनेंट गवर्नर ने बाबा बर्फानी के सभी भक्तों को दिल से न्योता दिया, और उन्हें बड़ी संख्या में पवित्र तीर्थयात्रा में शामिल होने और आध्यात्मिक यात्रा का अनुभव करने के लिए प्रोत्साहित किया।
भक्तों का स्वागत करने के लिए पूरी तरह तैयार- एलजी मनोज सिन्हा
लेफ्टिनेंट गवर्नर ने कहा, “चूंकि यात्रा 3 जुलाई से शुरू हो रही है, इसलिए एडमिनिस्ट्रेशन, श्री अमरनाथ जी श्राइन बोर्ड, आर्मी, पुलिस, सिक्योरिटी फोर्स, लोकल कम्युनिटी, सर्विस प्रोवाइडर, वॉलंटियर पूरी तरह से मिलकर काम कर रहे हैं। हर स्टेकहोल्डर सभी तीर्थयात्रियों के लिए एक सुरक्षित, बिना परेशानी वाली और यादगार तीर्थयात्रा सुनिश्चित करने के लिए समर्पित है। काफी अपग्रेडेड इंफ्रास्ट्रक्चर, बेहतर सुविधाओं और जम्मू कश्मीर के लोगों के अमूल्य सपोर्ट के साथ, हम आध्यात्मिक रूप से पूरी यात्रा के लिए भक्तों का स्वागत करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।”
रक्षाबंधन पर खत्म होगी यात्रा
श्री अमरनाथ जी श्राइन बोर्ड हर साल ज्येष्ठ पूर्णिमा पर पवित्र गुफा में प्रथम पूजा आयोजित करता है। इस साल की 57 दिन की तीर्थयात्रा आधिकारिक तौर पर 3 जुलाई, 2026 को शुरू होगी, जो दोनों ट्रेडिशनल रास्तों (अनंतनाग जिले में पहलगाम और गंदेरबल जिले में बालटाल) से एक साथ होगी। यात्रा 28 अगस्त, 2026 को रक्षाबंधन पर खत्म होगी। यात्रियों के पहले जत्थे को एक दिन पहले जम्मू स्थित भगवती नगर आधार शिविर से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया जाएगा।
वरिष्ठ अधिकारियों ने तैयारियों की समीक्षा की
जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे पर सोमवार तड़के आगामी अमरनाथ यात्रा की तैयारियों के तहत यात्रा काफिले का पूर्वाभ्यास किया गया। इस दौरान अधिकारियों ने सुरक्षा समेत विभिन्न व्यवस्थाओं का जायजा लिया। जम्मू के संभागीय आयुक्त रमेश कुमार और जम्मू रेंज के पुलिस महानिरीक्षक भीम सेन टूटी ने सुबह पांच बजे जम्मू स्थित भगवती नगर आधार शिविर से यात्रा काफिले को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इसके बाद दोनों अधिकारी यात्रा के दौरान व्यवस्थाओं का प्रत्यक्ष रूप से आकलन करने के लिए एक बस में सवार हुए।
चंद घंटों में पूरी हुई यात्रा
अधिकारियों ने बताया कि इस पूर्वाभ्यास का उद्देश्य यात्रा काफिले की आवाजाही, सुरक्षा उपायों, रसद व्यवस्था और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय का आकलन करना था। घाटी को देश के अन्य हिस्सों से जोड़ने वाले एकमात्र सर्वकालिक सड़क मार्ग, जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर आम नागरिकों के वाहनों की आवाजाही के निलंबन के बीच कड़ी सुरक्षा के साथ काफिला चार घंटे के भीतर रामबन जिला मुख्यालय पहुंच गया। काफिला कुछ समय के लिए चंदरकोट यात्रा लंगर स्थल पर रुका, जहां श्रद्धालुओं के लिए की गई व्यवस्थाओं और उपलब्ध सुविधाओं की समीक्षा की गई। इसके बाद काफिला बनिहाल के लिए रवाना हुआ। बनिहाल राजमार्ग पर वह कस्बा है, जो एक सुरंग के माध्यम से जम्मू क्षेत्र को दक्षिण कश्मीर के काजीगुंड कस्बे से जोड़ता है। काफिले के अपने गंतव्य पहलगाम और बालटाल आधार शिविर पहुंचने के साथ यह पूर्वाभ्यास पूरा हुआ।

