भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में एक बार फिर गिरावट देखने को मिली है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, 26 जून 2026 को समाप्त सप्ताह के दौरान देश का विदेशी मुद्रा भंडार 5.65 अरब अमेरिकी डॉलर घटकर 666.93 अरब डॉलर पर आ गया। इससे एक सप्ताह पहले विदेशी मुद्रा भंडार में बढ़ोतरी दर्ज की गई थी और यह 963 मिलियन अमेरिकी डॉलर बढ़कर 672.587 अरब डॉलर तक पहुंच गया था।
विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों में मामूली बदलाव
देश के कुल विदेशी मुद्रा भंडार में सबसे बड़ा योगदान फॉरेन करेंसी एसेट्स (FCA) का होता है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक, यह घटक 541.07 अरब अमेरिकी डॉलर के स्तर पर रहा, जबकि साप्ताहिक आधार पर इसमें 150 मिलियन डॉलर का बदलाव दर्ज किया गया। फॉरेन करेंसी एसेट्स में केवल अमेरिकी डॉलर ही नहीं, बल्कि यूरो, ब्रिटिश पाउंड और जापानी येन जैसी प्रमुख वैश्विक मुद्राएं भी शामिल होती हैं। इन विदेशी मुद्राओं की विनिमय दरों में होने वाले उतार-चढ़ाव का सीधा असर FCA के मूल्य पर पड़ता है।
सोने के भंडार में सबसे बड़ी कमी
इस सप्ताह देश के विदेशी मुद्रा भंडार में आई गिरावट का सबसे बड़ा कारण गोल्ड रिजर्व में कमी रही। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के आंकड़ों के मुताबिक, भारत का स्वर्ण भंडार 5.39 अरब अमेरिकी डॉलर घटकर 102.54 अरब डॉलर पर आ गया। सोने के भंडार में आई इस बड़ी गिरावट ने कुल विदेशी मुद्रा भंडार को भी प्रभावित किया।
SDR और IMF रिजर्व पोजिशन में भी बदलाव
भारत के स्पेशल ड्रॉइंग राइट्स (SDRs) के मूल्य में भी इस सप्ताह गिरावट दर्ज की गई। आरबीआई के अनुसार, SDRs घटकर 18.56 अरब अमेरिकी डॉलर रह गए, जो पिछले सप्ताह के मुकाबले करीब 89 मिलियन डॉलर कम हैं। वहीं, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष में भारत की रिजर्व पोजिशन भी 21 मिलियन डॉलर घटकर 4.77 अरब अमेरिकी डॉलर पर पहुंच गई।
अर्थव्यवस्था के लिए क्या है इसका मतलब?
विदेशी मुद्रा भंडार में समय-समय पर होने वाले उतार-चढ़ाव को सामान्य माना जाता है। इसके पीछे अमेरिकी डॉलर की मजबूती, अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में बदलाव, विदेशी निवेश के प्रवाह में परिवर्तन और आरबीआई की ओर से विदेशी मुद्रा बाजार में किए गए हस्तक्षेप जैसे कई कारण जिम्मेदार हो सकते हैं। हालांकि, इन उतार-चढ़ावों के बावजूद भारत का विदेशी मुद्रा भंडार दुनिया के मजबूत रिजर्व में गिना जाता है। यह देश के कई महीनों के आयात खर्च को पूरा करने में सक्षम है और वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के दौरान भारतीय अर्थव्यवस्था को स्थिरता प्रदान करता है। साथ ही, मजबूत फॉरेक्स रिजर्व रुपये की मजबूती बनाए रखने और बाहरी आर्थिक झटकों से निपटने में अहम भूमिका निभाता है।
