India-Belgium defence ties: बेल्जियम के प्रधानमंत्री बार्ट डी वेवर की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को लेकर कई अहम समझौते हुए। इनमें हथियारों के अलावा ड्रोन, समुद्री सुरक्षा, बारूदी सुरंगें हटाने की तकनीक, रडार, गोला-बारूद और अन्य रक्षा प्रणालियां शामिल हैं। इन समझौतों को ‘आत्मनिर्भर भारत’ और रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भारत और बेल्जियम के रिश्ते 1947 से हैं, जब बेल्जियम ने स्वतंत्र भारत को मान्यता दी थी। हालांकि लंबे समय तक दोनों देशों के संबंध सामान्य रहे, लेकिन अब रक्षा और रणनीतिक सहयोग के क्षेत्र में तेजी देखने को मिल रही है।
छोटे हथियार बनाने में महारत रखते हैं यूरोप के देश
यूरोप के कई देश छोटे हथियारों के निर्माण में अपनी खास पहचान रखते हैं और बेल्जियम भी इनमें प्रमुख है। पिस्टल, राइफल और कारतूस बनाने में उसकी तकनीक और गुणवत्ता को विश्वस्तरीय माना जाता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा में तैनात SPG के जवान भी बेल्जियम की FN F2000 राइफल का इस्तेमाल करते हैं। अब भारत-बेल्जियम रक्षा समझौते के तहत दोनों देश मिलकर राइफल और छोटे हथियारों का निर्माण करेंगे। इसके साथ ही बेल्जियम भारत के साथ अपनी तकनीक भी साझा करेगा, जिससे देश के घरेलू रक्षा उत्पादन को मजबूती मिलने की उम्मीद है
यूरोप के देशों के पास है क्रिटिकल टेक्नॉलजी
यूरोप के पास रक्षा क्षेत्र की कई महत्वपूर्ण और संवेदनशील तकनीकें हैं, जिन्हें हासिल करना भारत की रणनीतिक प्राथमिकताओं में शामिल है। बेल्जियम के साथ हुए समझौते में तकनीकी सहयोग के साथ यह भरोसा भी अहम माना जा रहा है कि संवेदनशील रक्षा तकनीक पाकिस्तान के साथ साझा नहीं की जाएगी। इटली के बाद बेल्जियम से मिला यह आश्वासन भारत के लिए एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक उपलब्धि माना जा रहा है। इससे संकेत मिलता है कि यूरोपीय देश अब रक्षा और रणनीतिक सहयोग के लिए पाकिस्तान की तुलना में भारत को अधिक अहम साझेदार के तौर पर देख रहे हैं।
गोला-बारूद का उत्पादन
बेल्जियम की लीएज स्थित मशीनरी कंपनी न्यू लाचाउसी ने टेंबो क्लासिक इंजीनियरिंग के साथ रक्षा उत्पादन को लेकर समझौता किया है। इसके तहत भारत में अलग-अलग कैलिबर की गोलियों के लिए उत्पादन लाइन और जरूरी उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे। प्रस्तावित संयंत्र की सालाना क्षमता करीब 10 करोड़ राउंड होगी, जबकि परियोजना की अनुमानित लागत लगभग 5 करोड़ यूरो है। संयंत्र की स्थापना और डिलीवरी 2028-29 तक पूरी होने की उम्मीद है। इसके अलावा न्यू लाचाउसी स्पेयर पार्ट्स, रखरखाव और आधुनिकीकरण में भी सहयोग करेगा।
माइन वॉरफेयर यानी समुद्री बारूदी सुरंगों से निपटना
भारत के MCMV कार्यक्रम के तहत L&T और बेल्जियम की एक्सेल के बीच अहम समझौता हुआ है। इसके जरिए एक्सेल समुद्री बारूदी सुरंगों का पता लगाने, पहचानने और उन्हें निष्क्रिय करने वाले स्वायत्त सिस्टम उपलब्ध कराएगी। कार्यक्रम के पहले चरण में 12 जहाज शामिल हैं, जबकि आगे यह संख्या 59 तक बढ़ सकती है। इस साझेदारी में अंडरवाटर रोबोटिक्स, एडवांस्ड सेंसर और स्वायत्त समुद्री तकनीक के साथ बंदरगाहों, पाइपलाइनों और समुद्र के नीचे मौजूद डेटा केबल जैसी महत्वपूर्ण संरचनाओं की सुरक्षा पर भी जोर दिया जाएगा।
बेल्जियम के रॉकेट अब भारत में बनेंगे
एक अन्य अहम रक्षा समझौते के तहत थेल्स बेल्जियम और कल्याणी स्ट्रेटेजिक सिस्टम्स भारत में 70 मिमी रॉकेटों की असेंबली के लिए साथ काम करेंगे। भारत में पूरी तरह निर्मित पहला रॉकेट 2027 की शुरुआत तक तैयार होने की उम्मीद है। इस साझेदारी से जहां थेल्स को वैश्विक ऑर्डर के लिए एक नया उत्पादन केंद्र मिलेगा, वहीं भारत की घरेलू रक्षा उत्पादन क्षमता भी मजबूत होगी।
FN Herstal भारत में उत्पादन की संभावनाएं तलाशेगा
बेल्जियम की हथियार निर्माता कंपनी FN Herstal ने भारत में संयुक्त उत्पादन केंद्र की संभावनाएं तलाशने के लिए कल्याणी स्ट्रेटेजिक सिस्टम्स के साथ समझौता किया है। प्रस्तावित केंद्र में FN के छोटे हथियारों के साथ इंटीग्रेटेड वेपन सिस्टम और काउंटर-ड्रोन सिस्टम भी बनाए जा सकते हैं। इस साझेदारी से भारत में आधुनिक रक्षा उपकरणों के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
बेल्जियम की काउंटर-ड्रोन तकनीक
बेल्जियम की Sol.One ने भारतीय बाजार में अपनी ड्रोन और इंटरसेप्टर तकनीक लाने के लिए DGVK Enterprises के साथ साझेदारी की है। इसके तहत Saboteur ड्रोन और Buzkil व Hitchhiker इंटरसेप्टर सिस्टम पेश किए जाएंगे। भारतीय सशस्त्र बल इन तकनीकों में रुचि दिखा चुके हैं और जल्द इनके परीक्षण की संभावना है। सैन्य जरूरतों पर खरे उतरने की स्थिति में इन प्रणालियों के बड़े ऑर्डर मिलने का रास्ता खुल सकता है।
अर्जुन टैंक के लिए इलेक्ट्रो-ऑप्टिक्स
बेल्जियम की OIP Sensor Systems और India Optel Limited ने अर्जुन मुख्य युद्धक टैंक के लिए इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल सिस्टम विकसित करने को लेकर समझौता किया है। OIP पहले ही अर्जुन Mk-I के लिए 130 से ज्यादा साइट्स उपलब्ध करा चुकी है, जबकि अर्जुन Mk-II के लिए उसने लेजर-गाइडेड मिसाइल दागने में सक्षम नया फायर-कंट्रोल सिस्टम विकसित किया है। इस सहयोग से अर्जुन टैंक के भविष्य के अपग्रेड और नई पीढ़ी के लड़ाकू वाहनों के विकास की संभावनाएं मजबूत हो सकती हैं।

