शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा का विशेष महत्व है। नवरात्रि के पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां स्कंदमाता अपने भक्तों को सुख, शांति, समृद्धि और संतान सुख का आशीर्वाद देती हैं।
मां स्कंदमाता भगवान कार्तिकेय की माता हैं। भगवान कार्तिकेय को स्कंद के नाम से भी जाना जाता है, इसलिए देवी के इस स्वरूप का नाम स्कंदमाता पड़ा। मां की गोद में बाल स्वरूप में भगवान स्कंद विराजमान रहते हैं। माता कमल के आसन पर विराजती हैं, इसलिए उन्हें पद्मासना देवी भी कहा जाता है।
पूजा के दिन सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनें और मां स्कंदमाता के सामने दीपक जलाएं। फूल, फल, धूप और नैवेद्य अर्पित करें। धार्मिक मान्यता के अनुसार, मां को केले का भोग लगाना शुभ माना जाता है। इसके बाद मां के मंत्र का जाप करें और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करें।
मां स्कंदमाता का मंत्र है— ‘ॐ देवी स्कन्दमातायै नमः।’
मान्यता है कि सच्चे मन से मां की पूजा करने से भक्तों को मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है। नवरात्रि के इस पावन दिन मां स्कंदमाता का आशीर्वाद पाने के लिए श्रद्धालु विशेष पूजा-अर्चना करते हैं।

