प्रवर्तन निदेशालय ने शुक्रवार को पंजाब के उद्योग मंत्री संजीव अरोरा और कुछ अन्य लोगों से जुड़े ठिकानों की जांच के तहत तलाशी ली. एजेंसी के अधिकारी लुधियाना और कुछ अन्य जगहों की छानबीन कर रहे हैं. आम आदमी पार्टी के नेता अरोरा के घर पर 2024 में भी ईडी ने छापा मारा था. तब ईडी ने एक बयान में कहा था कि अरोरा और कुछ अन्य संस्थाओं से जुड़ी कंपनियों ने आवासीय परियोजनाओं के लिए इंडस्ट्रियल जमीन के कथित दुरुपयोग से राज्य सरकार को नुकसान पहुंचाया और काली कमाई की.
ईडी की जांच में चौंकाने वाला खुलासा
ED की जांच में सामने आया है कि संजीव अरोड़ा की कंपनी Hampton Sky Realty Ltd (पहले Ritesh Properties) के जरिए बड़े स्तर पर रियल एस्टेट और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में निवेश किया गया, लेकिन इसके साथ कई गंभीर अनियमितताओं के आरोप भी जुड़े हैं. एजेंसी को शक है कि जमीन के उपयोग में अवैध बदलाव किए गए, फर्जी बुकिंग दिखाकर शेयर की कीमतें बढ़ाई गईं और स्टॉक मार्केट में इनसाइड ट्रेडिंग के जरिए मुनाफा कमाया गया. कंपनी के मौजूदा MD उनके बेटे काव्या अरोड़ा भी जांच के दायरे में हैं.
इस पूरे मामले में लुधियाना के कारोबारी हेमनाथ सूद की भूमिका भी अहम बताई जा रही है. उनकी कंपनी फिनडोक फिनवेस्ट (Findoc Finvest) पर आरोप है कि उसने UAE से काले पैसे को भारत लाने और उसे निवेश के जरिए सफेद करने में मदद की. ED के मुताबिक, ये पैसा FPI रूट के जरिए घुमाया गया और शेयर बाजार में इस्तेमाल किया गया. वहीं, जालंधर के कारोबारी चन्द्रशेखर अग्रवाल पर आरोप है कि उन्होंने क्रिकेट सट्टेबाजी से शुरुआत कर ‘Khiladi Book’ नाम का बेटिंग नेटवर्क खड़ा किया और हजारों लोगों से ठगी कर भारी रकम जुटाई. ये पैसा पहले UAE भेजा गया और फिर भारत में रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स में निवेश कर दिया गया. जांच एजेंसियों का मानना है कि इस पूरे नेटवर्क में हवाला और सट्टेबाजी का बड़ा कनेक्शन है.
ED को ये भी शक है कि संजीव अरोड़ा ने अपने राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल कर पंजाब में अवैध सट्टेबाजी ऑपरेटरों को संरक्षण दिया और बदले में उनके मुनाफे का हिस्सा लिया. साथ ही, उनकी कंपनियों के जरिए इस काले धन को वैध निवेश में बदलने का काम किया गया. जांच में फर्जी एक्सपोर्ट बिल, शेल कंपनियों और गैर-मौजूद GST फर्मों के जरिए फर्जी लेन-देन का भी खुलासा हुआ है. फिलहाल ये पूरी कार्रवाई FEMA के तहत की गई है.

