Women's Reservation Bill

प्रियंका गांधी पर कंगना रनौत ने किया पलटवार, पीएम मोदी से कोई इंदिरा गांधी की तरह कुर्सी नहीं छीन…’

महिला आरक्षण संशोधन विधेयक पर गुरुवार को संसद के विशेष सत्र में पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिला. कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने जहां परिसीमन के जरिए देश में लोकतंत्र खत्म करने का आरोप लगाया तो बीजेपी सांसद कंगना रनौत ने इसका करारा जवाब दिया. उन्होंने कहा कि पीएम मोदी से कोई इंदिरा गांधी की तरह कुर्सी थोड़े छीन रहा है जो वो लोकतंत्र खत्म कर देंगे.

कंगना रनौत ने महिला आरक्षण का समर्थन करते हुए सरकार को धन्यवाद दिया और बॉलीवुड फिल्म के डायलॉग का जिक्र करते हुए कहा कि जैसे फिल्म में कहा था ‘जा सिमरन जी ले अपनी जिन्दगी’, वैसे ही आज हमारी सरकार ने भारतवर्ष की बेटियों को कहा है सारे पिंजरे टूट गए हैं, सारी दीवारें टूट चुकी है कि ‘जाओ बेटियों.. जी लो अपनी जिंदगी.’

‘पीएम मोदी कोई इंदिरा गांधी तो नहीं..’
बीजेपी सांसद ने आगे प्रियंका गांधी ने बयान पर पलटवार करते हुए कहा- जब भी कुछ अच्छा होता है तो कांग्रेस के पेट में चूहे दौड़ने लगते हैं और वैसे ही अब चूहे दौड़ने शुरू हो गए हैं. अभी प्रियंका गांधी जी कह रही है कि संविधान ही बदल देंगे.. यहां पर डेमोक्रेसी ही खत्म कर देंगे.. कुछ भी करना चाहते हैं तो कहते हैं कि लोकतंत्र खत्म कर देंगे.

उन्होंने कहा- आप थोड़ा भी अगर कॉमन सेंस यूज़ करें कि प्रधानमंत्री लोकप्रिय नेता है, जो लोकतांत्रिक तरीके से जीतकर आए नेता हैं.. लोकतंत्र ने ही उनकी पार्टी को सत्ता में लाया है. वो उस लोकतंत्र को क्यों खत्म करेंगे? वो थोड़े ना कोई इंदिरा गांधी जी की तरह उनसे कोई कुर्सी ले रहा है तो उनको कुर्सी पे हक जमा कर रखना है. जिसके लिए उन्हें डेमोक्रेसी खत्म करनी ही पड़ेगी. ऐसी तो कोई स्थिति नहीं है.

परिसीमन के आरोपों पर भी पलटवार
प्रधानमंत्री ने जैसे कहा कि अगर किसी के लिए लोकतंत्र काम करता है तो वो मेरे लिए ही सबसे ज्यादा काम करती है. तो इतना तो कॉमन सेंस होना चाहिए. जब देखो लोगों को बहलाना-फुसलाना.. जब देखो झूठी बातें चलाना और अब एक नई बात सीखी है परिसीमन.. चलो महिला आरक्षण बिल पर बोलने की उनमें हिम्मत नहीं है तो परिसीमन में लफड़ा है इसको हम लोग नहीं आने देंगे.

कंगना ने कहा कि “अरे प्रियंका गांधी जब पिछली बार परिसीमन हुआ तो कोई बीजेपी की प्रक्रिया तो नहीं है, ये एक संवैधानिक प्रक्रिया है. हर 11-11 साल में होता है. 51 में हुआ 61 में हुआ 71 में हुआ. सोनिया गांधी जी कहती है कि इनको इतनी जल्दी क्यों हैं? तो क्या आपकी तरह होना चाहिए कि 30 साल तक इस बिल को लटकाकर रखा.

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