सोमवार की ग्लोबल ऑयल मार्केट में तेज उछाल देखने को मिला। अमेरिका-ईरान के बीच सीजफायर टूटने की बढ़ती आशंका के चलते ब्रेंट क्रूड और WTI की कीमतों में 5% से ज्यादा की तेजी आई। 20 अप्रैल को 0418 GMT तक ब्रेंट क्रूड $95.46 प्रति बैरल और WTI $88.86 प्रति बैरल तक पहुंच गया। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तनाव और बढ़ता है, तो आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतों में और उछाल आ सकता है।
क्या है वजह?
रविवार को अमेरिका ने एक ईरानी मालवाहक जहाज को जब्त कर लिया, जिस पर नाकेबंदी तोड़ने का आरोप लगाया गया है। इसके जवाब में ईरान ने कड़ी प्रतिक्रिया की चेतावनी दी है। हालत इतने बिगड़ गए कि स्ट्रेट ऑफ हार्मुज से गुजरने वाला समुद्री ट्रैफिक लगभग ठप पड़ गया, जिससे सप्लाई बाधित होने की चिंता बढ़ गई है। गौरतलब है कि शुक्रवार को तेल की कीमतों में 9% की बड़ी गिरावट आई थी, लेकिन 24 घंटे के भीतर ही हालत पूरी तरह बदल गए और तनाव फिर बढ़ गया।
विश्लेषकों का क्या कहना है?
Investing की रिपोर्ट के अनुसार,विशेषज्ञों का कहना है कि स्टार्ट ऑफ हार्मुज को पूरी तरह खोलने की घोषणा के महज 24 घंटे बाद ही इस्लामिक रेवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्पस द्वारा कुछ टैंकरों पर फायरिंग की गई, जिससे जहाज मालिकों में फिर से डर बढ़ गया है। हालात यह है कि बाजार की बुनियादी स्थिति कमजोर पड़ रही है और रोजाना करीब 10-11 मिलियन बैरल कच्चा तेल अब भी अटका हुआ है। जानकारों का मानना है कि फिलहाल तेल बाजार जमीनी सच्चाई से ज्यादा अमेरिका-ईरान के बयानों पर प्रतिक्रिया दे रहा है,जबकि असल में सप्लाई बहाल होना जल्द आसान नहीं दुख रहा।
मौजूदा स्थिति
ईरान ने बातचीत के दूसरे दौर से खुद को अलग के लिया है, जबकि अमेरिका ने उसके बंदरगाहों पर नाकेबंदी जारी रखी है। हार्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ईरान का रुख बदलता रहा—पहले पाबंदी हटाई और फिर दोबारा लागू कर दी। गौरमतलब है कि इस रास्ते से युद्ध से पहले दुनिया की करीब 20% तेल सप्लाई गुजरती थी। इसी बीच शनिवार को 20 से ज्यादा जहाज— जिनमें तेल, LPG, धातु और उर्वरक शामिल थे—इस मार्ग से गुजरे, जो 1 मार्च के बाद सबसे ज़्यादा संख्या है।
