संजीव मुखिया को क्लीन चिट: EOU के ‘डिजिटल सबूत’ आखिर CBI की जांच में कहां गए?

NEET-UG 2024 पेपर लीक मामले में संजीव मुखिया को लेकर अब सवाल सिर्फ यह नहीं है कि CBI को उसके खिलाफ पर्याप्त सबूत क्यों नहीं मिले। बड़ा सवाल यह है कि बिहार पुलिस की आर्थिक अपराध इकाई यानी EOU ने जिन तथ्यों, मोबाइल लोकेशन और नेटवर्क के आधार पर संजीव मुखिया को मुख्य साजिशकर्ता माना था, CBI की जांच में उन तथ्यों का आखिर क्या हुआ?

25 अप्रैल 2025 को करीब 11 महीने की फरारी के बाद EOU ने संजीव मुखिया को गिरफ्तार किया। उससे पूछताछ हुई, CBI ने भी उसे रिमांड पर लिया। लेकिन निर्धारित अवधि में उसके खिलाफ चार्जशीट दाखिल नहीं हुई और उसे डिफॉल्ट बेल मिल गई। अब CBI का कहना है कि NEET प्रश्नपत्र की चोरी या उसके वितरण में संजीव मुखिया की भूमिका साबित करने वाला कोई ठोस साक्ष्य नहीं मिला।

यहीं से EOU और CBI की जांच दो अलग-अलग दिशाओं में जाती दिखाई देती है।

दैनिक भास्कर की प्रकाशित रिपोर्ट में EOU की जांच के हवाले से कहा गया है कि संजीव मुखिया NEET पेपर लीक के सिलसिले में गुजरात गया था और वहां उसकी मोबाइल लोकेशन भी मिली थी। यदि यह जानकारी EOU के तकनीकी साक्ष्यों पर आधारित थी, तो यह सामान्य आरोप नहीं है। मोबाइल लोकेशन किसी व्यक्ति को अपराधी साबित नहीं करती, लेकिन इतने बड़े पेपर लीक की जांच में यह एक महत्वपूर्ण परिस्थितिजन्य कड़ी जरूर बनती है।

सवाल है—CBI ने इस डिजिटल कड़ी का क्या निष्कर्ष निकाला?

क्या CBI ने उस मोबाइल लोकेशन को सत्यापित किया? क्या CDR, टावर लोकेशन, यात्रा रिकॉर्ड और उस अवधि में किए गए फोन संपर्कों की जांच हुई? यदि हुई तो क्या यह साबित हुआ कि गुजरात की यात्रा का NEET पेपर लीक से कोई संबंध नहीं था?

यदि ऐसा है तो CBI को इसे स्पष्ट करना चाहिए।

मामला इसलिए और गंभीर हो जाता है क्योंकि EOU ने पेपर चोरी से लेकर उसे अभ्यर्थियों तक पहुंचाने की एक विस्तृत कथित श्रृंखला भी सामने रखी थी। हजारीबाग के ओएसिस स्कूल से प्रश्नपत्र निकालने, बॉक्स काटने, बुकलेट की तस्वीर खींचने, प्रश्नपत्र डॉक्टरों तक पहुंचाने और बिहार-झारखंड के ठिकानों पर अभ्यर्थियों को प्रश्न और उत्तर रटवाने तक की कहानी जांच में सामने आई थी।

CBI ने भी 45 लोगों को आरोपी बनाया है। इनमें संजीव मुखिया के कथित नेटवर्क से जुड़े लोग भी हैं।

तब सवाल और बड़ा हो जाता है—

अगर गिरोह के सदस्य आरोपी हैं, कथित नेटवर्क की कई कड़ियां चार्जशीट तक पहुंच गईं, तो जिस व्यक्ति को लंबे समय तक इस नेटवर्क का सरगना बताया गया, उसके खिलाफ कड़ी आखिर कहां टूट गई?

यहां सावधानी भी जरूरी है। किसी व्यक्ति के रिश्तेदार या सहयोगी के आरोपी होने से वह व्यक्ति स्वतः अपराधी नहीं हो जाता। उसी तरह गुजरात में मोबाइल लोकेशन मिलना भी अपने-आप पेपर लीक में संलिप्तता साबित नहीं करता। अपराध साबित करने के लिए अदालत में टिकने योग्य प्रत्यक्ष या परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की पूरी श्रृंखला चाहिए।

लेकिन सवाल दोष सिद्ध करने का नहीं, जांच में आए विरोधाभास को स्पष्ट करने का है।

एक एजेंसी करीब 11 महीने तक जिस व्यक्ति को तलाशती है, गिरफ्तार करती है और उसके खिलाफ मोबाइल लोकेशन सहित कई कड़ियों की बात सामने आती है; दूसरी ओर देश की सर्वोच्च जांच एजेंसी निर्धारित अवधि में उसके खिलाफ चार्जशीट नहीं दाखिल करती और अंततः कहती है कि पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिले—तो जनता यह पूछेगी कि दोनों जांचों के निष्कर्षों में इतना बड़ा अंतर क्यों है?

और राजनीतिक संदर्भ इसे और संवेदनशील बना देता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पेपर लीक के दोषियों पर सख्त कार्रवाई और फास्ट ट्रैक व्यवस्था की बात करते हैं, और उसी दिन CBI संजीव मुखिया के मामले में अपना स्पष्टीकरण जारी करती है। दोनों घटनाओं का समय अपने-आप किसी संबंध या दबाव को साबित नहीं करता, लेकिन इससे राजनीतिक सवाल जरूर खड़े होते हैं।

इसलिए CBI से तीन सीधे सवाल पूछे जाने चाहिए—

EOU द्वारा बताई गई संजीव मुखिया की गुजरात मोबाइल लोकेशन का CBI की जांच में क्या निष्कर्ष निकला? उसके कथित नेटवर्क से जुड़े लोगों के आरोपी बनने के बावजूद संजीव मुखिया तक साक्ष्यों की श्रृंखला क्यों नहीं पहुंची? और 90 दिनों के भीतर उसके खिलाफ चार्जशीट दाखिल क्यों नहीं हो सकी?

यदि EOU की थ्योरी गलत थी तो उसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए। यदि उसके डिजिटल साक्ष्य सही थे लेकिन उनका NEET पेपर लीक से संबंध नहीं निकला, तो CBI को यह बताना चाहिए।

क्योंकि सवाल संजीव मुखिया को हर हाल में दोषी साबित करने का नहीं है। सवाल यह है कि एक ही अपराध की जांच करने वाली दो एजेंसियों की कहानी इतनी अलग कैसे हो गई?

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

बिहार के इन 2 हजार लोगों का धर्म क्या है? विश्व का सबसे अमीर क्रिकेट बोर्ड कौन सा है? दंतेवाड़ा एक बार फिर नक्सली हमले से दहल उठा SATISH KAUSHIK PASSES AWAY: हंसाते हंसाते रुला गए सतीश, हृदयगति रुकने से हुआ निधन India beat new Zealand 3-0. भारत ने किया कीवियों का सूपड़ा साफ, बने नम्बर 1