बॉन्ड मार्केट में भूचाल! जापानी यील्ड ने क्यों बढ़ाई ग्लोबल मार्केट की धड़कनें?

दुनियाभर के बॉन्ड मार्केट में बढ़ती हलचल अब शेयर बाजारों पर भी असर डालने लगी है। हालांकि कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और भू-राजनीतिक तनाव भी चिंता की वजह हैं, लेकिन इस समय सबसे ज्यादा चर्चा जापान की लॉन्ग टर्म बॉन्ड यील्ड में आए उछाल की हो रही है। निवेशकों को डर है कि बढ़ता सरकारी कर्ज और बजट घाटा अब वैश्विक वित्तीय बाजारों पर दबाव बढ़ा सकता है।
जापान के अलावा ब्रिटेन, फ्रांस और इटली जैसे देशों में भी लॉन्ग टर्म बॉन्ड यील्ड ऊंचे स्तर पर पहुंच रही हैं। इसका संकेत है कि निवेशक अब केवल केंद्रीय बैंकों की ब्याज दरों पर नहीं, बल्कि सरकारों की उधारी, राजकोषीय स्थिति और कर्ज चुकाने की क्षमता पर भी नजर रख रहे हैं। यही वजह है कि बॉन्ड मार्केट की यह हलचल अमेरिका से लेकर यूरोप और भारत तक के वित्तीय बाजारों में चिंता का कारण बन गई है।

आखिर जापानी बॉन्ड यील्ड की इतनी चर्चा क्यों?
बॉन्ड मार्केट में शॉर्ट टर्म और लॉन्ग टर्म यील्ड अलग-अलग संकेत देती हैं। जहां शॉर्ट टर्म यील्ड मुख्य रूप से सेंट्रल बैंक की ब्याज दरों और मौद्रिक नीति की उम्मीदों से प्रभावित होती है, वहीं लॉन्ग टर्म यील्ड पर महंगाई, सरकारी कर्ज, राजकोषीय घाटा, राजनीतिक जोखिम और अर्थव्यवस्था की दीर्घकालिक स्थिति का असर पड़ता है। इसलिए इसमें तेजी को निवेशकों की बढ़ती चिंता का संकेत माना जाता है।
इसी वजह से बाजार 10y10y फॉरवर्ड यील्ड जैसे संकेतकों पर भी नजर रखता है। यह बताता है कि निवेशक आज से 10 साल बाद की 10 साल की बॉन्ड यील्ड को किस स्तर पर आंक रहे हैं। हाल के दिनों में कई प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में इस इंडिकेटर में तेजी देखी गई है, जो लंबी अवधि के जोखिम को लेकर बढ़ती सतर्कता का संकेत है।

बदल गई 2022 की कहानी
वैश्विक बॉन्ड यील्ड में तेजी की शुरुआत 2022 में हुई थी, जब कोविड के बाद बढ़ी महंगाई को नियंत्रित करने के लिए दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों ने ब्याज दरों में लगातार बढ़ोतरी की। उस समय यील्ड में उछाल की सबसे बड़ी वजह सख्त मौद्रिक नीति की उम्मीदें थीं। हालांकि अब हालात बदल चुके हैं।
मौजूदा समय में लॉन्ग टर्म बॉन्ड यील्ड सिर्फ ऊंची ब्याज दरों की उम्मीद से नहीं बढ़ रही हैं। निवेशक बढ़ते सरकारी कर्ज, राजकोषीय घाटे और भविष्य के आर्थिक जोखिमों को देखते हुए लंबी अवधि के निवेश पर अधिक रिटर्न की मांग कर रहे हैं। यही वजह है कि मौजूदा बॉन्ड सेल-ऑफ को पहले के मुकाबले ज्यादा गंभीर माना जा रहा है।

जापान सबसे ज्यादा दबाव में क्यों?
हाल के समय में 10y10y फॉरवर्ड यील्ड में सबसे तेज उछाल जापान में दर्ज किया गया है, जबकि ब्रिटेन, फ्रांस और इटली जैसे देशों में भी लंबी अवधि की बॉन्ड यील्ड बढ़ी हैं। इन देशों में पहले से ही सरकारी कर्ज का स्तर ऊंचा है, इसलिए निवेशक उनकी वित्तीय स्थिति को लेकर अधिक सतर्क हैं। जापान में बढ़ती यील्ड इस बात का संकेत है कि सरकार के लिए भविष्य में कर्ज जुटाना पहले के मुकाबले महंगा हो सकता है।
बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी का असर सिर्फ सरकारी उधारी तक सीमित नहीं रहता। यह पूरी वित्तीय व्यवस्था को प्रभावित कर सकता है, क्योंकि बॉन्ड यील्ड को वैश्विक स्तर पर लोन और अन्य उधारी की लागत तय करने का अहम मानक माना जाता है।

अमेरिका में क्या हुआ?
29 जुलाई की फेडरल रिजर्व बैठक के बाद अमेरिकी बॉन्ड मार्केट में यील्ड कर्व की बेयर-स्टीपनिंग देखने को मिली। यानी शॉर्ट टर्म बॉन्ड की तुलना में लॉन्ग टर्म बॉन्ड यील्ड में अधिक तेजी दर्ज की गई। इसे इस बात का संकेत माना जा रहा है कि निवेशक लंबी अवधि के जोखिम को लेकर अधिक सतर्क हो रहे हैं।
अमेरिका दुनिया का सबसे बड़ा बॉन्ड मार्केट है, इसलिए वहां लॉन्ग टर्म यील्ड में होने वाला बदलाव अक्सर दूसरे देशों के बॉन्ड और वित्तीय बाजारों पर भी असर डालता है। यही वजह है कि अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में आई हालिया तेजी पर वैश्विक निवेशकों की नजर बनी हुई है।

भारत के लिए इसका क्या मतलब?
भारत की राजकोषीय स्थिति जापान या कुछ यूरोपीय देशों जैसी नहीं है, लेकिन वैश्विक बॉन्ड मार्केट में बढ़ता तनाव भारतीय बाजारों को भी प्रभावित कर सकता है। जब अमेरिका और अन्य विकसित देशों में बॉन्ड यील्ड बढ़ती हैं, तो विदेशी निवेशकों के लिए जोखिम और रिटर्न का समीकरण बदल जाता है। ऐसे में उभरते बाजारों, जैसे भारत, में विदेशी पूंजी का प्रवाह धीमा पड़ सकता है और रुपये पर भी दबाव बढ़ सकता है।
यही वजह है कि जापानी बॉन्ड यील्ड में आई तेजी को केवल जापान तक सीमित घटना नहीं माना जा रहा। यह इस बात का संकेत है कि वैश्विक निवेशक अब सरकारी कर्ज और राजकोषीय नीतियों का पहले से कहीं अधिक बारीकी से आकलन कर रहे हैं।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

बिहार के इन 2 हजार लोगों का धर्म क्या है? विश्व का सबसे अमीर क्रिकेट बोर्ड कौन सा है? दंतेवाड़ा एक बार फिर नक्सली हमले से दहल उठा SATISH KAUSHIK PASSES AWAY: हंसाते हंसाते रुला गए सतीश, हृदयगति रुकने से हुआ निधन India beat new Zealand 3-0. भारत ने किया कीवियों का सूपड़ा साफ, बने नम्बर 1