Chaitra Navratri 2026 Day 1: चैत्र नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा होती है. 19 मार्च को नवरात्रि की शुरुआत हो रही है. इस दिन घटस्थापना के लिए सुबह 6.02 से 7.53 का शुभ मुहूर्त है. वहीं अभिजित मुहूर्त दोपहर 12.05 से दोपहर 12.53 तक है. कलश स्थापना के बाद माता की पूजा कैसे करें, क्या है नियम, विधि, भोग और मंत्र
चैत्र नवरात्रि 2026 पहले दिन का मुहूर्त
शुभ – – सुबह 06:26 – सुबह 07:57
चर – सुबह 10.58 – दोपहर 12.29
लाभ – दोपहर 12.29 – दोपहर 2.00
शाम का मुहूर्त – शाम 5.01 – रात 9.30 तक शुभ है
मां शैलपुत्री की पूजा विधि
सुबह ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करने के बाद पीले वस्त्र पहनें.
व्रत का संकल्प लें और घटस्थापना के लिए ईशान कोण को अच्छी तरह साफ करें.
कलश स्थापना करें. कलश में सिक्का, सुपारी, चावल डालें और कलश के मुंह पर आम के पत्ते रखकर उसपर नारियल रखें. नारियल पर लाल कपड़ा लिपटा दें. अब देवी का आवाहन करें
मां शैलपुत्री का ध्यान करें. माता को रोली, मौली, हल्दी, चावल, फूल, फल, मिठाई अर्पित करें.
चैत्र नवरात्रि के पहले दिन गाय के शुद्ध देसी घी से बनी मिठाई का भोग लगाएं.
माता के मंत्र का जाप करें – वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्।
वृषारूढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्॥
देवी की कथा पढ़ने के बाद आरती करें फिर ध्यान मंत्र बोलें – या देवी सर्वभूतेषु मां शैलपुत्री रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
शाम को पुनः आरती करें और भोग लगाएं.
मां शैलपुत्री की पूजा का महत्व
जीवन में स्थिरता और आत्मबल मिलता है
मूलाधार चक्र (यह शारीरिक शक्ति, जीवन रक्षा (भोजन, आश्रय) और स्थिरता से संबंधित है) मजबूत होता है
रोग और भय दूर होते हैं
सुख-समृद्धि और मानसिक शांति मिलती है.
इन बातों का रखें ध्यान
मन, वचन और कर्म से शुद्ध रहें
नियमित पूजा और मंत्र जप करें
व्रत का पालन करें
लहसुन-प्याज और तामसिक भोजन से बचें
क्रोध, झूठ और नकारात्मक विचारों से दूर रहें
पूजा में लापरवाही न करें

