बांग्लादेश के राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने अपने पांच साल के कार्यकाल के खत्म होने से लगभग दो साल पहले ही शुक्रवार को इस्तीफ़ा दे दिया। शहाबुद्दीन ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए संसद के स्पीकर हाफ़िज़ उद्दीन अहमद को अपना इस्तीफा सौंप दिया है। उनका इस्तीफा ऐसी खबरों के बीच आया है कि सरकार उनके पद पर बने रहने से खुश नहीं थी।
शेख हसीना से संपर्क करना पड़ा भारी
दरअसल ऐसा माना जाता है कि उनके रिश्ते पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना से अच्छे थे। बांग्लादेशी मीडिया की खबरों के मुताबिक, सरकार इस बात से नाराज़ थी कि शहाबुद्दीन ने हाल ही में शेख हसीना से फिर से संपर्क करने की कोशिश की थी। शहाबुद्दीन का इस्तीफ़ा शेख हसीना के उस ऐलान के कुछ ही दिनों बाद आया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि वह दिसंबर में बांग्लादेश लौटेंगी और वॉर क्राइम्स ट्रिब्यूनल द्वारा दोषी ठहराए जाने के बाद सरेंडर कर देंगी।
शहाबुद्दीन शेख हसीना के पुराने सहयोगी और अब बैन हो चुकी अवामी लीग के टिकट पर चुनाव लड़ चुके हैं। वह 2023 में पांच साल के कार्यकाल के लिए निर्विरोध राष्ट्रपति चुने गए थे। वह पिछली अवामी लीग सरकार के आखिरी संवैधानिक पद पर बने रहने वाले व्यक्ति थे, जो 2024 के उस विद्रोह के बाद भी पद पर बने रहे, जिसके कारण हसीना को भारत भागना पड़ा था। यह इस्तीफ़ा ऐसे राजनीतिक रूप से संवेदनशील समय में आया है जब प्रधानमंत्री तारिक रहमान की सरकार शेख हसीना की वापसी की तैयारी कर रही है।
संसद के स्पीकर संभालेंगे अंतरिम राष्ट्रपति का कार्यभार
बांग्लादेश के संविधान के तहत, संसद के स्पीकर हाफ़िज़ उद्दीन अहमद तब तक अंतरिम राष्ट्रपति के तौर पर काम करेंगे जब तक कि देश नए राष्ट्रपति को चुन नहीं लेता। बांग्लादेश के संविधान के अनुच्छेद 54 में कहा गया है कि अगर राष्ट्रपति का पद खाली हो जाता है या राष्ट्रपति अपने कर्तव्यों का पालन करने में असमर्थ होते हैं, तो नए राष्ट्रपति के चुने जाने तक स्पीकर कार्यवाहक राष्ट्रपति के तौर पर पद संभालते हैं।
शेख हसानी को सुनाई गई है मौत की सजा
बता दें कि पिछले साल नवंबर में बांग्लादेश की इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल ने 2024 के छात्र विरोध प्रदर्शनों के दौरान की गई कार्रवाई में भूमिका के लिए शेख हसीना और पूर्व गृह मंत्री असदुज़्ज़मान खान कमाल को उनकी गैर-मौजूदगी में मौत की सज़ा सुनाई थी।

