‘हर्ड इम्युनिटी’ से ही कम होगा कोरोना का खतरा-WHO

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कोरोना वायरस से दुनियांभर में 1 करोड़ 57 लाख से ज्यादा लोग संक्रमित हो चुके हैं। 6.7 लाख की जान जा चुकी है। हर दिन कोरोना पर नए नए खोज हो रहे हैं। अब कोरोना वायरस को लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन की मुख्य वैज्ञानिक डॉ. सौम्या स्वामीनाथन ने चेतावनी दी है कि कोविड-19 के खिलाफ ‘‘हर्ड इम्युनिटी’’ विकसित होना जरूरी है। तभी हम कोरोना वायरस से बच सकते हैं। साथ ही ये भी कहा कि इंसानों के अंदर ‘‘हर्ड इम्युनिटी’’ विकसित होने में कई साल का समय लग सकता है। मानव शरीर में हर्ड इम्युनिटी विकसित होने में तभी तेजी आ सकती है जब कोरोना का टीका हर किसी को उपलब्ध होगा।

आपको बता दें कोविड-19 के खिलाफ बड़ी संख्या में रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित होने को ही ‘‘हर्ड इम्युनिटी’’ कहा जाता है। उन्होंने कहा कि 50 से 60 फीसदी आबादी को कोरोना वायरस से प्रतिरक्षित होना पड़ेगा तभी इस वायरस के प्रति सामूहिक प्रतिरोधक क्षमता विकसित होगी। ये बातें वैज्ञानिक डॉ. सौम्या स्वामीनाथन ने जिनेवा में WHO के सोशल मीडिया लाइव कार्यक्रम के दौरान कही।

साथ ही ये भी कहा कि नैसर्गिक प्रतिरोधक क्षमता के स्तर पर पहुंचने के लिए संक्रमण के और दौर की जरूरत होगी। इसके साथ ही ये भी कहा कि कोरोना से पूरी तरह से छुटकारा पाने में कम से कम अगले एक साल या उससे अधिक का समय भी लग सकता है। हालांकि वैज्ञानिक टीका बनाने को लेकर काम कर रहे हैं। जबतक कोरोना का टीका नहीं बन जाता है तब तक वर्तमान में जारी चिकित्सा से हम कोरोना से होने वाली मृत्यु दर को काफी हद तक कम कर सकते हैं। स्वामीनाथन ने आगे कहा कि कहा, ”हर्ड इम्युनिटी की अवधारणा के लिए आपको 50 से 60 फीसदी आबादी में प्रतिरोधक क्षमता होनी चाहिए ताकि संक्रमण की श्रृंखला को तोड़ा जा सके।”

स्वामीनाथन के मुताबिक कुछ समय में लोगों में प्राकृतिक प्रतिरोधक क्षमता विकसित होने लगेगी। कई कोरोना प्रभावित देशों में हुए अध्ययनों से पता चलता है कि सामान्य तौर पर आबादी के पांच से दस फीसदी में कोरोना वायरस के खिलाफ रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित हुई है। जिससे कोरोना का खतरा कुछ हद तक कम जरूर हुआ है।

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