भारत में महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामले लगातार सामने आते रहते हैं। बिहार से लेकर दिल्ली और जम्मू-कश्मीर से लेकर तमिलनाडु तक, लगभग हर राज्य में ऐसे मामले दर्ज होते हैं। इनमें दुष्कर्म, हत्या, छेड़खानी, अपहरण और घरेलू हिंसा जैसे अपराध शामिल हैं। कई मामलों में सामाजिक और पारिवारिक दबाव के कारण शिकायत थाने तक भी नहीं पहुंच पाती। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के 2024 के आंकड़ों के मुताबिक, देश में महिलाओं के खिलाफ अपराध के 4,41,534 मामले दर्ज हुए। यह संख्या 2023 में दर्ज 4,48,211 मामलों से 1.5 फीसदी कम है। वहीं, प्रति एक लाख महिला आबादी पर अपराध दर 66.2 से घटकर 64.6 हो गई। हालांकि, आंकड़ों में आई यह मामूली गिरावट महिलाओं की सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों के खत्म होने का संकेत नहीं है। NCRB के आंकड़े बताते हैं कि घर से लेकर सार्वजनिक जगहों तक महिलाओं के खिलाफ अपराध की समस्या अब भी गंभीर बनी हुई है।
हर 20 मिनट में एक दुष्कर्म
NCRB की ‘क्राइम इन इंडिया 2024’ रिपोर्ट के मुताबिक, 2024 में देशभर में बलात्कार के 29,536 मामले दर्ज किए गए। यानी औसतन हर 18 मिनट में बलात्कार का एक मामला दर्ज हुआ, जो महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर चुनौती की ओर इशारा करता है।
NCRB के आंकड़ों के अनुसार, 2024 में राजस्थान में बलात्कार के सबसे ज्यादा 4,871 मामले दर्ज हुए। इसके बाद उत्तर प्रदेश में 3,209, महाराष्ट्र में 3,091 और मध्य प्रदेश में 3,061 मामले सामने आए। कुल मामलों में 28,950 पीड़ित 18 वर्ष या उससे अधिक उम्र के थे, जबकि 784 नाबालिग थे। रिपोर्ट के मुताबिक, ज्यादातर मामलों में आरोपी पीड़िता के परिचित थे और 28,597 मामलों में आरोपी पीड़िता को पहले से जानते थे।
महिलाओं के खिलाफ अपराध में घरेलू हिंसा की बड़ी हिस्सेदारी?
महिलाओं के खिलाफ अपराधों में सबसे ज्यादा मामले पति या उसके रिश्तेदारों की क्रूरता से जुड़े हैं। NCRB के मुताबिक, 2024 में इस श्रेणी के 1,20,227 मामले दर्ज हुए, जो महिलाओं के खिलाफ कुल अपराधों का करीब 27 फीसदी है। ये आंकड़े बताते हैं कि महिलाओं की सुरक्षा का मुद्दा सिर्फ सड़क या सार्वजनिक जगहों तक सीमित नहीं है। कई महिलाओं को घर और ससुराल में भी घरेलू हिंसा, मानसिक प्रताड़ना और दहेज जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
घर के बाहर कितनी असुरक्षित है महिलाएं?
महिलाओं के खिलाफ अपराधों में अपहरण और जबरन ले जाने के मामले दूसरी बड़ी श्रेणी में रहे। NCRB के अनुसार, 2024 में ऐसे 67,829 मामले दर्ज हुए, जो महिलाओं के खिलाफ कुल अपराधों का करीब 15.4 फीसदी है। आंकड़े बताते हैं कि महिलाओं की सुरक्षा की चुनौती घर के बाहर भी बनी हुई है।
पॉक्सो के कितने मामले?
इसके बाद POCSO एक्ट के तहत बच्चों से जुड़े यौन अपराधों के 67,809 मामले दर्ज किए गए। इनमें लड़कियों के साथ-साथ लड़कों के खिलाफ हुए यौन अपराधों के मामले भी शामिल हैं।
सबसे ज्यादा कहां होता है महिलाओं के खिलाफ अपराध?
राज्यों की बात करें तो बड़ी आबादी वाले उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान में महिलाओं के खिलाफ अपराध के कुल मामले ज्यादा दर्ज होते हैं। वहीं, महिला आबादी के अनुपात में अपराध दर दिल्ली, तेलंगाना और ओडिशा में राष्ट्रीय औसत से अधिक रही। दूसरी ओर, नागालैंड, मिजोरम और मणिपुर जैसे पूर्वोत्तर राज्यों में मामलों की संख्या और अपराध दर राष्ट्रीय औसत से कम दर्ज की गई।
मामला दर्ज होने के बाद क्या होता है?
महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामलों में FIR के बाद जांच और न्याय की प्रक्रिया भी अहम है। NCRB के मुताबिक, 2024 में पुलिस ने लंबित मामलों समेत 6,23,377 मामलों की जांच की। इनमें 3,36,609 मामलों में चार्जशीट दाखिल हुई और चार्जशीटिंग रेट 77.2 फीसदी रहा। वहीं, अदालतों में 26,40,698 मामले ट्रायल में लंबित थे। 2024 में 45,832 मामलों में दोषसिद्धि हुई, जबकि 1,23,340 मामलों में आरोपी बरी हुए। ये आंकड़े बताते हैं कि शिकायत दर्ज होने से लेकर अदालत के फैसले तक न्याय की प्रक्रिया लंबी हो सकती है।
कैसे कम होगा महिलाओं के खिलाफ अपराध?
महिलाओं के खिलाफ अपराध रोकने के लिए लैंगिक समानता की शिक्षा, संवेदनशील पुलिस व्यवस्था, सुरक्षित सार्वजनिक स्थान और तेज व निष्पक्ष न्याय प्रक्रिया जरूरी है। कुछ चर्चित मामलों में पुलिस कार्रवाई और एनकाउंटर को लेकर भी बहस हुई है, जिससे यह सवाल उठता है कि अपराध के मामलों में न्यायिक प्रक्रिया की भूमिका क्या होनी चाहिए। लंबी अवधि में महिलाओं को शिक्षा और रोजगार के जरिए सशक्त बनाना भी अहम है, ताकि वे अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हो सकें। इसके साथ ही समाज में महिलाओं के प्रति सम्मान बढ़ाने और अपराध के मामलों में कानून के तहत समय पर कार्रवाई सुनिश्चित करने से सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जा सकता है।

