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कौन हैं विक्रम दोराईस्वामी जिन्हें चीन में नियुक्त किया गया भारत का नया राजदूत

India New Envoy In China: अनुभवी राजनयिक विक्रम दोराईस्वामी को चीन में भारत का नया राजदूत नियुक्त किया गया है। 1992 बैच के भारतीय विदेश सेवा (IFS) अधिकारी दोराईस्वामी वर्तमान में ब्रिटेन में भारत के उच्चायुक्त के पद पर कार्यरत हैं। विदेश मंत्रालय (MEA) ने इस महत्वपूर्ण नियुक्ति की आधिकारिक घोषणा की, जिसमें कहा गया है कि वो शीघ्र ही बीजिंग में अपनी नई जिम्मेदारी संभालेंगे। दोराईस्वामी वर्तमान राजदूत प्रदीप कुमार रावत का स्थान लेंगे।

दिल्ली विश्वविद्यालय से की पढ़ाई
विक्रम दोराईस्वामी का राजनयिक करियर 1992 में भारतीय विदेश सेवा में शामिल होने के साथ शुरू हुआ। दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास में स्नातकोत्तर डिग्री प्राप्त करने के बाद उन्होंने एक वर्ष पत्रकारिता में भी काम किया। उनकी शुरुआती पोस्टिंग हांगकांग में हुई, जहां उन्होंने चीनी भाषा का डिप्लोमा प्राप्त किया। 1996 से 2000 तक वो बीजिंग में भारतीय दूतावास में तैनात रहे, जहां उन्होंने लगभग 4 वर्ष बिताए। इस दौरान उन्होंने चीनी भाषा में गहरी पकड़ बनाई।

PM कार्यालय में निजी सचिव के रूप में किया काम
दोराईस्वामी ने प्रधानमंत्री कार्यालय में निजी सचिव के रूप में कार्य किया है, संयुक्त राष्ट्र में भारत की स्थायी मिशन में राजनीतिक काउंसलर रहे है, जोहान्सबर्ग में महावाणिज्य दूत बने, यूएसए के साथ अमेरिका प्रभाग में संयुक्त सचिव रहे है। वो उज्बेकिस्तान और दक्षिण कोरिया में भारत के राजदूत रह चुके हैं, बांग्लादेश में उच्चायुक्त के रूप में कार्य कर चुके हैं। सितंबर 2022 से वो ब्रिटेन में उच्चायुक्त हैं, जहां उन्होंने भारत-ब्रिटेन संबंधों को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई है।

क्यों अहम है दोराईस्वामी की नियुक्ति?
दोराईस्वामी की नियुक्ति भारत-चीन संबंधों के लिहाज से अहम मानी जा रही है। पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर 2020 से चले आ रहे सैन्य गतिरोध ने दोनों देशों के बीच गंभीर तनाव पैदा किया था। गलवान संघर्ष के बाद दोनों पक्षों के बीच कई दौर की सैन्य और कूटनीतिक वार्ताएं हुई हैं लेकिन पूर्ण समाधान अभी तक नहीं हो सका है। हाल के वर्षों में दोनों देशों ने संबंधों को पटरी पर लाने के प्रयास तेज किए हैं, जिसमें सीमा पर तनाव कम करने, व्यापार बढ़ाने और उच्च-स्तरीय संपर्कों को बहाल करने जैसे कदम शामिल हैं। ऐसे समय में एक वरिष्ठ और अनुभवी राजनयिक को बीजिंग भेजना भारत की ओर से सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

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