भारत और चीन के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नए फैसले से टैरिफ का दबाव बढ़ सकता है। ट्रंप ने ‘लिंडसे ओ. ग्राहम रूस और ईरान पर प्रतिबंध कानून, 2026’ यानी H.R. 5334 पर हस्ताक्षर कर इसे कानून बना दिया है। व्हाइट हाउस के मुताबिक, कानून रूस पर प्रतिबंधों और टैरिफ से जुड़े प्रावधानों को मजबूत करता है और ईरान पर मौजूदा प्रतिबंधों को आगे बढ़ाता है। इसके तहत रूस से बड़ी मात्रा में तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने का अधिकार अमेरिकी राष्ट्रपति को मिला है।
यह कानून रूस पर मौजूदा प्रतिबंधों, टैरिफ और अन्य पाबंदियों को बढ़ाने का प्रावधान करता है, जबकि ईरान पर पहले से लागू प्रतिबंधों को भी जारी रखता है। अमेरिकी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स ने बुधवार को इस विधेयक को मंजूरी दी। इसके तहत रूस के नेतृत्व, ऊर्जा क्षेत्र, रक्षा उद्योग और कथित ‘शैडो फ्लीट’ से जुड़े लोगों व संस्थाओं पर भी कार्रवाई का प्रावधान है।
भारत-चीन पर कैसे पड़ेगा असर?
इस कानून के तहत राष्ट्रपति ट्रंप को रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार मिल सकता है। भारत और चीन भी ऐसे देशों में शामिल हैं, इसलिए दोनों पर इसका असर पड़ने की संभावना है। कानून में टैरिफ लगाने वाले देशों के चयन, शुल्क की दर तय करने और कुछ मामलों में प्रतिबंधों से छूट देने को लेकर राष्ट्रपति को व्यापक अधिकार दिए गए हैं।
कब लागू हो सकता है टैरिफ?
यह कानून राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के 30 दिन बाद प्रभावी होगा। इसके तहत पिछले 12 महीनों में रूसी कच्चे तेल या प्राकृतिक गैस के शीर्ष पांच खरीदार रहे देशों से आने वाले सामान पर 100% तक टैरिफ लगाया जा सकता है। हालांकि, रूसी गैस आयात को घटाने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाने वाले और निर्धारित सीमा से कम गैस खरीदने वाले देशों को शुल्क से छूट मिल सकती है।
कानून में रूस के कथित ‘शैडो फ्लीट’ पर भी कार्रवाई का प्रावधान है। इसके दायरे में रूसी ऊर्जा निर्यात या प्रतिबंधों से बचने में मदद करने वाले जहाजों के मालिक, ऑपरेटर, मैनेजर, बीमाकर्ता और अन्य संबंधित पक्ष शामिल हैं।

