Digger Movie Review: टॉम क्रूज की दमदार एक्टिंग ने जीता दिल, इनारितु की कहानी में भरा रोमांच

टॉम क्रूज अपने खतरनाक स्टंट्स के लिए दुनियाभर में मशहूर हैं। उन्होंने फिल्मों में प्लेन से छलांग लगाने से लेकर ऊंची इमारतों पर चढ़ने और बाइक से खतरनाक पहाड़ी रास्तों पर दौड़ने तक कई जोखिम भरे काम किए हैं। हालांकि, ‘डिगर’ में उनका सबसे बड़ा एक्सपेरिमेंट कोई स्टंट नहीं, बल्कि एक बिल्कुल अलग तरह का किरदार निभाना है।

अलेजांद्रो इनारितु के निर्देशन में बनी ‘डिगर’ में टॉम क्रूज टेक्सास के बेहद अमीर और अजीब तेल कारोबारी डिगर रॉकवेल के रोल में नजर आते हैं। आर्कटिक में उनके ड्रिलिंग ऑपरेशन के कारण एक बड़ी पर्यावरणीय तबाही खड़ी हो जाती है। बर्फ का एक विशाल टुकड़ा टूटकर यूरोप की ओर बढ़ने लगता है, जिसके बाद सरकारों, वैज्ञानिकों और खुद डिगर को इस संकट से निपटने की कोशिश करनी पड़ती है।

‘डिगर’ का अंदाज टॉम क्रूज की आम ब्लॉकबस्टर फिल्मों से काफी अलग है। फिल्म की कहानी और किरदार दोनों ही जानबूझकर अजीब और अनोखे रखे गए हैं। क्रूज ने भी अपने लुक और परफॉर्मेंस के जरिए ऐसा रूप अपनाया है, जिसमें उन्हें पहचानना तक मुश्किल हो जाता है। यही बदलाव फिल्म को उनके करियर के दिलचस्प और हटकर प्रोजेक्ट्स में शामिल करता है।

डिगर: कहानी
फिल्म की कहानी डिगर के तेल कारोबार और ज्यादा से ज्यादा मुनाफा कमाने की उसकी चाहत के इर्द-गिर्द घूमती है। उसकी कंपनी की ड्रिलिंग से पर्यावरण पर बड़ा खतरा पैदा होने की चेतावनी वैज्ञानिक देते हैं, लेकिन डिगर इसे मानने के बजाय नाराज हो जाता है। उसके लिए अपनी गलती स्वीकार करने से ज्यादा जरूरी संकट को अपने हिसाब से संभालना और लोगों के बीच अपनी छवि बनाए रखना है। यहीं से फिल्म कई गंभीर मुद्दों को सामने लाती है। इनारितु कॉर्पोरेट ताकत, पर्यावरण को होने वाले नुकसान और राजनीति पर बड़े कारोबारियों के प्रभाव जैसे विषयों को कहानी में शामिल करते हैं। साथ ही, फिल्म यह भी दिखाती है कि ताकतवर लोग किसी बड़े संकट की तस्वीर को अपनी पब्लिसिटी और प्रभाव के जरिए किस तरह अपने पक्ष में पेश करने की कोशिश कर सकते हैं।

फिल्म इन मुद्दों को बेहद गहराई से समझाने की कोशिश नहीं करती और यही इसका खास अंदाज भी है। इनारितु ने कहानी को गंभीर और सूक्ष्म रखने के बजाय इसे जानबूझकर जोरदार, अजीब और ड्रामेटिक टच दिया है। कई जगह फिल्म का व्यंग्य काफी असरदार नजर आता है, खासकर उन दृश्यों में जहां किरदार एक बड़ी पर्यावरणीय तबाही को भी पब्लिक रिलेशन और अपनी छवि चमकाने के मौके में बदलने की कोशिश करते हैं। फिल्म की कहानी आगे बढ़ने के साथ ऐसे कई मोड़ सामने आते हैं, जिन्हें पहले से जान लेना इसका मजा कम कर सकता है। इसलिए बिना ज्यादा जानकारी के इसे देखना बेहतर अनुभव देता है। जैसे-जैसे घटनाएं आगे बढ़ती हैं, फिल्म का अंदाज भी लगातार बदलता जाता है और यह सिर्फ एक सामान्य आपदा की कहानी बनकर नहीं रह जाती, बल्कि कई अप्रत्याशित रंग दिखाती है।

डिगर’ में टॉम क्रूज का अभिनय
टॉम क्रूज ने ‘डिगर’ में अपने अब तक के इमेज से बिल्कुल अलग किरदार को अपनाया है। प्रोस्थेटिक्स, बढ़ा हुआ पेट, कम बाल और खास दक्षिणी लहजे के जरिए उनका पूरा लुक बदल दिया गया है। यह बदलाव सिर्फ उनके हुलिए तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके किरदार की पर्सनैलिटी में भी साफ नजर आता है। डिगर एक घमंडी और मनमौजी तेल कारोबारी है, जिसे अपनी दौलत पर इतना भरोसा है कि उसे लगता है हर मुश्किल का हल पैसे से निकाला जा सकता है। टॉम क्रूज ने इस किरदार को पूरे आत्मविश्वास के साथ निभाया है। खास बात यह है कि डिगर उनकी आम फिल्मों वाले शांत और ‘कूल’ हीरो से बिल्कुल अलग नजर आता है। कई मौकों पर वह अजीब, स्वार्थी और यहां तक कि दयनीय भी दिखाई देता है, जो क्रूज की परफॉर्मेंस को और दिलचस्प बनाता है।

टॉम क्रूज का इस किरदार में खुद को जानबूझकर अजीब और मूर्खतापूर्ण दिखाने का फैसला ही उनकी परफॉर्मेंस को खास बनाता है। ऐसा लगता है कि वह डिगर के किरदार को निभाते हुए खूब एंजॉय कर रहे हैं, लेकिन साथ ही उन्होंने इसे पूरी गंभीरता के साथ भी पेश किया है। फिल्म में कई ऐसे सीन हैं, जिनमें क्रूज अपने अब तक के मुख्यधारा वाले अंदाज से काफी अलग नजर आते हैं और हर सीन में पूरी तरह किरदार के भीतर उतर जाते हैं।

फिल्म का सबसे प्रभावशाली हिस्सा एक लंबा मोनोलॉग है, जिसमें डिगर का भाषण धीरे-धीरे और ज्यादा आक्रामक और दमदार होता जाता है। यह ऐसा सीन है, जिसे ज्यादा ड्रामा आसानी से ओवर द टॉप बना सकता था, लेकिन क्रूज ने इसे शानदार नियंत्रण के साथ निभाया है। भाषण की रफ्तार बढ़ने के साथ उनकी आवाज, एक्सप्रेशन और बॉडी लैंग्वेज भी लगातार बदलती रहती है।

इस पूरे सीन की खासियत सिर्फ इसके डायलॉग्स नहीं, बल्कि क्रूज का किरदार में पूरी तरह डूब जाना है। यही वह पल है जहां ‘डिगर’ का अलग और अनोखा अंदाज सबसे ज्यादा असर छोड़ता है। क्रूज अपनी शारीरिक मेहनत और स्टंट्स के लिए पहले से मशहूर हैं, लेकिन इस फिल्म में उनकी वही ऊर्जा अभिनय, आवाज और संवाद अदायगी में नजर आती है। उनका यह ओवर-द-टॉप अंदाज फिल्म के मिजाज के साथ पूरी तरह मेल खाता है।

डिगर: कास्ट में बहुत जोश है
फिल्म में टॉम क्रूज के साथ कई बेहतरीन कलाकार भी नजर आते हैं। रिज़ अहमद ने गणेश नाम के वैज्ञानिक का किरदार निभाया है, जो डिगर की हकीकत से मुंह मोड़ने की आदत के बीच उसे सच्चाई समझाने की कोशिश करता है। वहीं, जॉन गुडमैन फिल्म के राजनीतिक पहलू को अपने गंभीर अंदाज से मजबूती देते हैं। सैंड्रा हुलर एम्मा के रोल में हैं, जो डिगर की सौतेली बहन होने के साथ एक कारोबारी भी है और कई मामलों में उसकी सोच से बिल्कुल अलग नजर आती है।
कहानी आगे बढ़ने के साथ जेसी प्लेमन्स का किरदार भी महत्वपूर्ण हो जाता है। फिल्म में कलाकारों की परफॉर्मेंस को जानबूझकर थोड़ा ज्यादा ड्रामेटिक रखा गया है। इनारितु यहां हर किरदार को पूरी तरह वास्तविक और सहज दिखाने के बजाय उन्हें उसी अजीब और अतिरंजित दुनिया का हिस्सा बनाते हैं, जिसमें डिगर खुद जीता है। यही स्टाइल कुछ दर्शकों को आकर्षित कर सकता है, जबकि कुछ लोगों को यह जरूरत से ज्यादा नाटकीय लग सकता है।

आकर्षक है ‘डिगर’
‘डिगर’ को लेकर दर्शकों की राय चाहे जैसी हो, लेकिन फिल्म को साधारण कहना मुश्किल है। सिनेमैटोग्राफर इमैनुएल लुबेज़की ने इसे बड़े और शानदार विजुअल्स दिए हैं। वहीं, प्रोडक्शन डिजाइन फिल्म की अजीब और लगातार बदलती दुनिया को और प्रभावशाली बनाता है। डिगर का आलीशान घर, राजनीति की चमक-दमक और धीरे-धीरे भयावह होती तबाही, हर चीज फिल्म के जानबूझकर बढ़ाए गए अंदाज को मजबूत करती है। फिल्म की खास बात यह है कि ‘डिगर’ खुद अपने ड्रामेटिक अंदाज से अनजान नहीं है। यह सिर्फ एक सीधी आपदा की कहानी सुनाकर आगे नहीं बढ़ती, बल्कि लगातार नए आइडिया जोड़ती है और बीच-बीच में अपना टोन भी बदलती रहती है। कई मौकों पर फिल्म कहानी कहने के तरीके पर भी दर्शकों का ध्यान खींचती है। जो दर्शक लीक से हटकर और जोखिम लेने वाली फिल्मों को पसंद करते हैं, उनके लिए यह अंदाज दिलचस्प हो सकता है। हालांकि, कुछ दर्शकों को इसका ज्यादा नाटकीय और दिखावटी ट्रीटमेंट थोड़ा भारी भी लग सकता है।

डिगर’ का फैसला
‘डिगर’ को एक मजबूत रेटिंग मिलने की वजह फिल्म में मौजूद कई खास खूबियां हैं, हालांकि यह अपने सभी विचारों को पूरी तरह से जोड़ने में हर जगह सफल नहीं रहती। फिल्म की सबसे बड़ी ताकत टॉम क्रूज़ की परफॉर्मेंस है। वह किरदार में पूरी तरह उतर जाते हैं और ‘डिगर’ की अलग तरह की शख्सियत को उसी अंदाज में पेश करते हैं, बिना उसे एक टिपिकल हीरो बनाने की कोशिश किए। फिल्म का लंबा मोनोलॉग भी खास है, जहां क्रूज़ अपनी शानदार डायलॉग डिलीवरी, टाइमिंग और फिजिकल एक्टिंग का बेहतरीन प्रदर्शन करते हैं।

निर्देशक इनारितु ने फिल्म को एक अलग विजुअल स्टाइल और बड़े पैमाने का ट्रीटमेंट दिया है, जो इसे आम डिजास्टर फिल्मों से अलग पहचान देता है। हालांकि, ‘डिगर’ का बेबाक हास्य, अनोखा नैरेटिव और जानबूझकर बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया अंदाज सभी दर्शकों को पसंद आए, यह जरूरी नहीं है। फिर भी फिल्म एक सामान्य स्टार-ड्रिवन प्रोजेक्ट से कहीं ज्यादा प्रयोगात्मक नजर आती है। क्रूज़ का इस तरह के असामान्य किरदार को चुनना भी फिल्म को खास बनाता है। फिल्म कई जगह जरूरत से ज्यादा आगे बढ़ती महसूस हो सकती है, लेकिन इसमें मौजूद कई दिलचस्प पहलू इसे देखने का अनुभव सार्थक बना देते हैं।

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