यूक्रेन के दक्षिणी इलाके में रूस ने एक सहायता वितरण केंद्र और उसके पास बने आश्रय स्थल को निशाना बनाते हुए हवाई हमला किया। इस हमले में 26 लोगों की मौत हो गई। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर घटना की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि रूसी सेना ने पहले उस स्कूल की इमारत पर बमबारी की, जहां लोगों को मानवीय सहायता बांटी जा रही थी। इसके बाद पास में मौजूद एक आश्रय स्थल को भी निशाना बनाया गया। जेलेंस्की ने इन हमलों को लेकर रूस पर तनाव कम करने की इच्छा नहीं रखने का आरोप लगाया।
सीमित सीजफायर हटने के बाद किया हमला
ये हमले दक्षिणी ज़ापोरिज्जिया क्षेत्र के कोमिशुवाखा गांव में उस समय हुए, जब पड़ोसी खेरसॉन क्षेत्र में लागू सीमित युद्धविराम की अवधि खत्म हो चुकी थी। इस समझौते के तहत रूस के कब्जे वाले क्षेत्रों में मानवीय सहायता पहुंचाने और वहां फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने की अनुमति दी गई थी। जेलेंस्की ने कहा कि एक समय ऐसा लग रहा था कि शांति की दिशा में आगे बढ़ने का रास्ता निकल सकता है, लेकिन रूस के ताजा हमलों ने इसके विपरीत संकेत दिए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि रूस शांति की कोशिशों के बजाय और अधिक लोगों की जान लेने की तैयारी कर रहा है।
अभी भी मलबे में दबे लोग
बाद में अपने संबोधन में जेलेंस्की ने कहा कि यूक्रेन को पहले से ही रूस के हमले तेज होने की आशंका थी। उन्होंने बताया कि यूक्रेन के पास अपनी सुरक्षा के लिए जरूरी मिसाइलों की भी कमी है। वहीं, कोमिशुवाखा में हमले के बाद राहत और बचाव दल मलबे में दबे लोगों की तलाश में जुटे रहे। स्थानीय अधिकारियों के मुताबिक, करीब 20 लोग अब भी लापता हैं और मृतकों का आंकड़ा बढ़ने की आशंका है।
रूस ने बचाव कार्य के दौरान भी किए हमले
ज़ापोरिज्जिया के सैन्य अधिकारी मिखाइलो सेमकिन ने बताया कि सोमवार शाम बचाव अभियान के दौरान रूसी ड्रोन ने उसी इलाके को फिर निशाना बनाया, जहां पहले बमबारी हुई थी। इसके चलते राहत कार्य प्रभावित हुआ। वहीं, यूक्रेन के अन्य क्षेत्रों में भी रूस की ओर से ड्रोन हमले किए गए, जिनमें कम से कम 17 लोग घायल हो गए।

