ऑटोमोबाइल और ट्रांसपोर्टेशन टेक्नोलॉजी सेक्टर की दिग्गज कंपनी KPIT Technologies के संस्थापक और चेयरमैन Ravi Pandit का शुक्रवार सुबह पुणे में निधन हो गया। वह 75 वर्ष के थे। कंपनी ने आधिकारिक बयान जारी कर उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त अब किया और इसे उद्योग जगत के लिए बड़ी क्षति बताया।रवि पंडित ने अपनी दूरदर्शी सोच और नेतृत्व से KPIT Technologies को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाई। वह स्वर्ण पदक विजेता चार्टर्ड अकाउंटेंट थे और उन्होंने MIT Sloan School of Management से शिक्षा प्राप्त की थी।इसके अलावा, वह प्रोफेशनल सर्विस फर्म Kirtane & Pandit Chartered Accountants के प्रमुख भी रहे। आज KPIT Technologies दुनिया के 15 देशों में अपना कारोबार संचालित कर रही है और ऑटोमोटिव सॉफ्टवेयर एवं मोबिलिटी सॉल्यूशंस के क्षेत्र में अहम भूमिका निभा रही है।
30 साल से भी ज्यादा रहा रवि पंडित का करियर
KPIT टेक्नोलॉजी के अनुसार, तीन दशक से अधिक लंबे करियर में Ravi Pandit ने भारत समेत वैश्विक स्तर पर टेक्नोलॉजी आधारित ट्रांसपोर्टेशन सॉल्यूशंस और सस्टेनेबिलिटी पहल को नई दिशा देने में अहम योगदान दिया। कारोबारी दुनिया के अलावा वह सामाजिक, शैक्षणिक और नीति निर्माण से जुड़े कई संस्थानों में भी सक्रिय रहे। उन्होंने Pune International Centre और Janwani की सह-स्थापना की थी। साथ ही उन्होंने ‘Gokhale Institute of Politics and Economics’ के सेंटर फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट को सहयोग दिया और Gyan Prabodhini के अध्यक्ष के रूप में भी जिम्मेदारी निभाई। रवि पंडित Thermax Limited, ‘World Resources Institute India’और Aga Khan Rural Support Programme India के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स का भी हिस्सा रहे।
रवि पंडित ने कई प्लेटफॉर्म्स पर किया भारतीय उद्योग का प्रतिनिधित्व
कंपनी के मुताबिक, Ravi Pandit ने विभिन्न राष्ट्रीय और औद्योगिक मंचों पर भारतीय उद्योग जगत का प्रभावी प्रतिनिधित्व किया। वह ‘Maratha Chamber of Commerce Industries and Agriculture’ के अध्यक्ष भी रहे और Central “Electronics Engineering Research Institute” की रिसर्च काउंसिल की अगुवाई की। बयान में बताया गया कि राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के सशक्त समूह में वह निजी क्षेत्र से शामिल होने वाले एकमात्र सदस्य थे। हाल ही में उन्होंने ‘एचआरआईडीएवाई’ (भारत के कृषि एवं ऊर्जा विकास के लिए हाइड्रोजन क्रांति) पहल की शुरुआत की थी, जिसका उद्देश्य स्वच्छ ऊर्जा तकनीकों के जरिए समावेशी और टिकाऊ विकास को बढ़ावा देना है।
