Maratha Reservation: महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर से गहरा गया है. मराठा आरक्षण आंदोलन के नेता मनोज जरांगे पाटिल ने घोषणा की है कि वो 30 मई से अंतरवाली सराटी गांव में भीषण गर्मी के बीच आमरण अनशन शुरू करेंगे. जरांगे ने कहा कि उन्होंने मराठा आरक्षण और उससे जुड़ी मांगों को पूरा करने के लिए सरकार को पिछले 10 महीनों से पर्याप्त समय दिया था, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है.
उन्होंने सातारा गजेटियर को लेकर नाराजगी जताते हुए कहा कि सरकार ने अब तक सातारा गजेटियर पर कोई जीआर (सरकारी आदेश) जारी नहीं किया गया. जानकारी के लिए बता दें कि सतारा गजेटियर औपनिवेशिक काल का एक विस्तृत ऐतिहासिक दस्तावेज है, जिसमें पश्चिमी महाराष्ट्र के उन परिवारों के नाम दर्ज हैं, जिन्हें कुनबी माना जा सकता है. जरांगे की मांग है कि सरकार इस गजेटियर को आधार बनाकर मराठाओं को ‘कुनबी’ प्रमाणपत्र देने का शासनादेश (GR) जारी करे.
जरांगे ने कहा- अब कठोर कदम उठाना जरूरी हो गया है उन्होंने कहा कि अब उन्हें चर्चा नहीं, बल्कि आरक्षण का क्रियान्वयन चाहिए. मनोज जरांगे ने कहा कि उन्होंने सरकार को पर्याप्त समय दिया, लेकिन अब स्थिति ‘लाइलाज’ हो गई है. उन्होंने कहा कि समाज और बच्चों को आरक्षण नहीं मिल रहा है, इसलिए कठोर कदम उठाना जरूरी हो गया है. उन्होंने बताया कि पहले वो छांव, मंडप और पंखे के नीचे अनशन करते थे, लेकिन इस बार वो ‘अंतिम और कठोर’ आमरण अनशन करेंगे. जरांगे ने कहा कि वो तपती धूप में बिना पानी, बिना भोजन और बिना चप्पल पहने अनशन पर बैठेंगे.
समर्थकों से की अपील
उन्होंने कहा कि उनके शरीर में पहले से ही काफी दर्द है, लेकिन समाज के भविष्य के लिए वो यह कदम उठा रहे हैं. उन्होंने यह भी कहा कि अगर उन्हें लू लगती है या उनकी जान जाती है, तो इसके लिए सरकार और देवेंद्र फडणवीस जिम्मेदार होंगे. जरांगे ने कहा, “मैंने चर्चाओं के लिए पहले ही काफी समय दे दिया है. अब कड़ा रुख अपनाने का समय आ गया है. अगर लू लगने से मेरी मौत हो जाती है, तो इसके लिए सरकार और देवेंद्र फडणवीस जिम्मेदार होंगे.” उन्होंने अपने समर्थकों से आग्रह किया कि वो कार्यक्रम स्थल पर न आएं. वो अकेले ही चिलचिलाती गर्मी में बैठेंगे.

