Gyanvapi Masjid Case: वाराणसी स्थित ज्ञानवापी विवाद में मंगलवार को प्रस्तावित मध्यस्थता प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी, क्योंकि हिंदू और मुस्लिम दोनों पक्षों ने इसमें शामिल होने से इनकार कर दिया। हिंदू पक्ष के वकील मदन मोहन यादव के अनुसार, उच्चतम न्यायालय के निर्देश पर दोनों पक्षों के बीच बातचीत के जरिए समाधान तलाशने की पहल की जानी थी, लेकिन किसी भी पक्ष ने सहमति नहीं दी। वहीं, ज्ञानवापी मस्जिद की प्रबंधन समिति अंजुमन इंतजामिया मसाजिद का कहना है कि हिंदू पक्ष की ओर से ज्ञानवापी से जुड़े करीब 36 अलग-अलग मुकदमे और दावे दायर किए जा चुके हैं। ऐसे में यह तय करना मुश्किल है कि मध्यस्थता के लिए किस पक्ष से बातचीत की जाए।
‘मुस्लिम पक्ष ने मध्यस्थता से किया इनकार’
हिंदू पक्ष के अधिवक्ता मदन मोहन यादव ने बताया कि दोनों पक्ष वाराणसी जिला अदालत परिसर स्थित मध्यस्थता केंद्र पहुंचे थे, लेकिन मुस्लिम पक्ष ने मध्यस्थता प्रक्रिया में भाग लेने से इनकार कर दिया। उनके अनुसार, मुस्लिम पक्ष का कहना था कि ज्ञानवापी विवाद से जुड़े कई मामले फिलहाल उच्चतम न्यायालय में लंबित हैं और वे अदालत के अंतिम फैसले का पालन करेंगे, इसलिए मध्यस्थता का कोई औचित्य नहीं है। वहीं, हिंदू पक्ष ने मध्यस्थ के समक्ष अपना पक्ष रखते हुए दावा किया कि ज्ञानवापी परिसर पर मुस्लिम पक्ष का अवैध कब्जा है और मूल ज्योतिर्लिंग स्थल पर भव्य काशी विश्वनाथ मंदिर के निर्माण के लिए परिसर खाली कराया जाना चाहिए।
मुस्लिम पक्ष का दावा
इस बीच, ज्ञानवापी सहित वाराणसी की 26 मस्जिदों की देखरेख करने वाली अंजुमन इंतजामिया मसाजिद के संयुक्त सचिव सैयद मोहम्मद यासीन ने कहा कि समिति के खिलाफ ज्ञानवापी विवाद से जुड़े करीब 36 अलग-अलग मुकदमे लंबित हैं। ऐसे में यह स्पष्ट नहीं है कि मध्यस्थता के लिए किस पक्ष से बातचीत की जाए और क्या सभी पक्ष किसी एक निष्कर्ष पर सहमत हो पाएंगे। उन्होंने कहा कि मध्यस्थता तभी सफल हो सकती है, जब दोनों पक्ष समाधान की मंशा के साथ बातचीत करें। यासीन के अनुसार, हिंदू पक्ष का रुख है कि ज्ञानवापी परिसर मंदिर है और वह इसी मांग पर कायम है। उनका आरोप है कि हिंदू पक्ष अपनी मांग से पीछे हटने को तैयार नहीं है और उसका उद्देश्य मस्जिद को हटाना है। उन्होंने यह भी कहा कि ज्ञानवापी मामले में अदालत जो भी निर्णय देगी, मुस्लिम पक्ष उसे स्वीकार करेगा, इसलिए अब मध्यस्थता की संभावना लगभग समाप्त हो चुकी है।
जब उनसे पूछा गया कि क्या इस मामले में ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और जमीयत उलेमा-ए-हिंद जैसे प्रमुख मुस्लिम संगठनों से भी सलाह ली गई है, तो यासीन ने कहा कि दोनों संगठन लगातार उनका सहयोग कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि इन संगठनों ने जरूरत पड़ने पर हर संभव सहायता का भरोसा दिया है। हालांकि, फिलहाल मामले में उन्हें किसी अतिरिक्त सहयोग की आवश्यकता महसूस नहीं हो रही है।
हिंदू पक्ष का दावा
ज्ञानवापी विवाद में हिंदू पक्ष का दावा है कि मौजूदा मस्जिद का निर्माण मुगल काल में एक प्राचीन मंदिर को ध्वस्त करने के बाद किया गया था। वहीं, मुस्लिम पक्ष इन दावों को खारिज करते हुए कहता है कि ज्ञानवापी मस्जिद एक वैध वक्फ संपत्ति है और मंदिर तोड़े जाने का दावा तथ्यों पर आधारित नहीं है।

