नीट-यूजी परीक्षा में सामने आए कथित पेपर लीक और परीक्षा प्रक्रिया में लगातार उजागर हो रही अनियमितताओं के खिलाफ अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की जेएनयू इकाई ने गुरुवार को जोरदार प्रदर्शन किया. जेएनयू परिसर स्थित साबरमती ढाबे पर छात्रों ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी का पुतला फूंका और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की मांग उठाई. प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने NTA को ‘नेशनल ठग एजेंसी’ बताते हुए जमकर नारेबाजी की.
प्रदर्शन के दौरान ABVP कार्यकर्ताओं ने “23 लाख सपने, शून्य सुरक्षा. NTA निष्पक्षता की परीक्षा में फेल.” जैसे नारों के साथ अपना विरोध दर्ज कराया. छात्रों का आरोप है कि राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में बार-बार सामने आ रही गड़बड़ियां लाखों अभ्यर्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हैं. उनका कहना है कि वर्षों की मेहनत और तैयारी के बाद परीक्षा देने वाले छात्रों का भरोसा लगातार टूट रहा है.
ABVP ने कहा कि नीट-यूजी जैसी संवेदनशील परीक्षा में पेपर लीक की घटना केवल प्रशासनिक विफलता नहीं, बल्कि पूरी परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्नचिह्न है. परिषद का कहना है कि इस तरह की घटनाएं छात्रों के मन में परीक्षा प्रक्रिया को लेकर अविश्वास पैदा कर रही हैं और इसे किसी भी हाल में स्वीकार नहीं किया जा सकता.
आउटसोर्स व्यवस्था पर उठे सवाल
प्रदर्शन के दौरान ABVP ने परीक्षा संचालन की मौजूदा व्यवस्था पर भी सवाल उठाए. परिषद ने आरोप लगाया कि प्रिंटिंग, परीक्षा केंद्र प्रबंधन और स्टाफिंग जैसी संवेदनशील जिम्मेदारियां निजी एजेंसियों को सौंपे जाने से सुरक्षा संकट बढ़ा है. संगठन ने मांग की कि नीट-यूजी पेपर लीक मामले की निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध जांच कराई जाए तथा पूरे नेटवर्क का खुलासा कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए.
छात्रों की आवाज दबाने की कोशिश दुर्भाग्यपूर्ण
अभाविप जेएनयू मंत्री प्रवीण कुमार पीयूष ने कहा कि विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़े इतने गंभीर मुद्दे पर जवाबदेही तय करने के बजाय छात्रों की आवाज दबाने का प्रयास बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है. उन्होंने कहा कि विद्यार्थी परिषद हमेशा छात्र हित में खड़ी रही है और जब तक प्रभावित 22 लाख से अधिक अभ्यर्थियों को न्याय नहीं मिल जाता, तब तक संगठन उनकी लड़ाई लड़ता रहेगा.
अभाविप जेएनयू अध्यक्ष मयंक पांचाल ने कहा कि जेएनयू का छात्र समुदाय NTA की इस नाकामी को बर्दाश्त नहीं करेगा. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि छात्रों के भविष्य के साथ हो रहे खिलवाड़ को तुरंत नहीं रोका गया और दोषियों को सजा नहीं मिली, तो यह आंदोलन परिसर से लेकर सड़कों तक और उग्र रूप ले सकता है.

