सोने की कीमतों में गिरावट के बीच चीन ने बड़ी खरीदारी करके दुनिया का ध्यान खींचा है। सितंबर 2026 में चीन के केंद्रीय बैंक ने करीब 21 टन सोना अपने भंडार में जोड़ा। खास बात यह है कि यह खरीदारी ऐसे समय हुई, जब सितंबर के दौरान अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में 6 फीसदी से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई।
अब सवाल है कि आखिर चीन की रणनीति क्या है?
पहली वजह है डॉलर पर निर्भरता कम करना। चीन अपने विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी बढ़ाकर आर्थिक जोखिमों से बचाव करना चाहता है। दूसरी वजह है वैश्विक अनिश्चितता। अंतरराष्ट्रीय तनाव और वित्तीय बाजारों में उतार-चढ़ाव के बीच सोने को लंबे समय के लिए सुरक्षित संपत्ति माना जाता है।
इसके अलावा, चीन में प्रॉपर्टी बाजार की कमजोरी और निवेश के दूसरे विकल्पों से जुड़ी चिंताओं के कारण भी सोने की मांग बढ़ी है। आम निवेशक भी सोने की ओर आकर्षित हो रहे हैं।
चीन लगातार 23 महीनों से अपने स्वर्ण भंडार में बढ़ोतरी कर रहा है। इससे साफ है कि उसकी रणनीति केवल कुछ दिनों के बाजार उतार-चढ़ाव तक सीमित नहीं है।
हालांकि, चीन की खरीदारी से सोने की कीमतें आगे बढ़ेंगी या नहीं, यह निश्चित नहीं है। अमेरिकी ब्याज दरें, डॉलर की मजबूती और वैश्विक मांग भी कीमतों को प्रभावित करेंगी।

