बूथ से बहुमत तक चुनावी रण के सबसे बड़े खिलाड़ी हैं अमित शाह, ‘आधुनिक चाणक्य’ ने BJP को बनाया ‘अजेय’

आज भाजपा की अगुवाई वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की 22 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में सरकारें हैं। भाजपा के इस जबर्दस्त प्रदर्शन के पीछे यदि कोई है तो वह अमित शाह हैं। साल 2014 के बाद भारतीय जनता पार्टी को राष्ट्रीय स्तर पर लगातार विस्तार दिलाने में केंद्रीय गृह मंत्री शाह की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।

Amit Shah role in BJP success: साल 1980 में अपने गठन के बाद से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) चुनाव लड़ती रही और जीतती रही है। बाद के वर्षों में उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात सहित कई राज्यों में उसकी सरकारें बनती रही। अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में भाजपा की अगुवाई वाले NDA की 1996 में पहली बार सरकार भी बनी लेकिन पार्टी हिंदी बेल्ट के राज्यों से बाहर नहीं निकल पा रही थी। संगठन एवं नेतृत्व के स्तर पर कहीं कोई कमी रह जा रही थी लेकिन 2014 के बाद से भाजपा में एक नई ऊर्जा, प्रेरणा, उत्साह का संचार हुआ। यह संभव हुआ पार्टी और संगठन में अमित शाह के उभार से। अमित शाह के आते ही भाजपा में चुनाव जीतने की भूख बढ़ गई। शाह के नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में भाजपा ने उन राज्यों में अपना विजय पताका फहराने लगी जहां उसका वैचारिक जनाधार एवं समर्थन कम था लेकिन अमित शाह की रणनीति, सांगठनिक क्षमता और दूरदर्शी नीतियां असंभव को संभव बनाईं। बूथ से बहुमत तक पार्टी को कैसे पहुंचाया जा सकता है, शाह ने अपनी रणनीति, सांगठनिक क्षमता और दूरदर्शी नेतृत्व से कर दिखाया।

आज 22 राज्यों में NDA की सरकार

आज भाजपा की अगुवाई वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की 22 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में सरकारें हैं। भाजपा के इस जबर्दस्त प्रदर्शन के पीछे यदि कोई है तो वह अमित शाह हैं। साल 2014 के बाद भारतीय जनता पार्टी को राष्ट्रीय स्तर पर लगातार विस्तार दिलाने में केंद्रीय गृह मंत्री शाह की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। संगठन क्षमता, बूथ प्रबंधन और चुनावी रणनीति के कारण उन्हें भाजपा का ‘आधुनिक चाणक्य’ भी कहा जाता है। 2014 में केंद्र में पूर्ण बहुमत की सरकार बनने के बाद अमित शाह ने पार्टी अध्यक्ष के रूप में भाजपा को उन राज्यों में भी मजबूत किया, जहां पहले पार्टी की उपस्थिति सीमित थी।

2014 के लोकसभा चुनाव में यूपी में BJP को दिलाई प्रचंड जीत

शाह राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में तब आए, जब उन्होंने भारत के सबसे अहम चुनावी राज्य उत्तर प्रदेश में भाजपा के लिए ऐतिहासिक बदलाव की रणनीति तैयार की। यूपी में भाजपा एक तरह से हाशिए पर चली गई थी। यहां संगठन और पार्टी कार्यकर्ताओं में उत्साह कमजोर पड़ गया था। इस राज्य में जीत दिलाने की जिम्मेदारी शाह ने अपने कंधों पर उठाई लेकिन 2014 के लोकसभा चुनाव में पार्टी ने अभूतपूर्व प्रदर्शन करते हुए 80 में से 71 सीटों पर जीत दर्ज की। यहीं से शाह की पहचान राष्ट्रीय स्तर पर हुई। उन्हें एक बड़ा रणनीतिकार माने जाने लगा। 2014 की इस सफलता को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने 2017 और 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में भी भाजपा को ऐतिहासिक जीत दिलाई। इसके बाद 2019 के लोकसभा चुनाव में उनके नेतृत्व में पार्टी ने और भी बड़ी प्रचंड जीत हासिल करते हुए लगातार दूसरी बार केंद्र में पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई।

यूपी में मिले जीत के सिलसिले को आगे बढ़ाया

यूपी से भाजपा की जीत का जो सिलसिला शाह ने शुरू किया, उसे वह आने वाले चुनावों में आगे बढ़ाते रहे। 2014 के बाद महाराष्ट्र और हरियाणा में भाजपा ने बड़ी सफलता हासिल की। महाराष्ट्र में पार्टी ने शिवसेना के साथ गठबंधन में सरकार बनाई, जबकि हरियाणा में पहली बार अपने दम पर पूर्ण बहुमत हासिल कर सरकार बनाई। इसके बाद झारखंड में भी भाजपा सत्ता में आई और स्थिर सरकार देने में सफल रही। 2016 में असम में भाजपा ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की। यह पूर्वोत्तर भारत में भाजपा की सबसे बड़ी राजनीतिक सफलता मानी गई। असम में जीत के बाद पार्टी ने पूर्वोत्तर के अन्य राज्यों जैसे त्रिपुरा, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर और नागालैंड में भी अपना प्रभाव तेजी से बढ़ाया। विशेष रूप से 2018 में त्रिपुरा में वामपंथी शासन को समाप्त कर भाजपा ने बड़ी राजनीतिक उपलब्धि हासिल की।

एक-एक कर जीतते गए राज्य

उत्तर प्रदेश में 2017 का विधानसभा चुनाव अमित शाह की रणनीति का सबसे बड़ा उदाहरण माना जाता है। भाजपा ने प्रचंड बहुमत हासिल कर राज्य की राजनीति में नया इतिहास बनाया। बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करना, सामाजिक समीकरणों को साधना और कार्यकर्ताओं को सक्रिय रखना इस जीत के प्रमुख कारण रहे। इसी अवधि में उत्तराखंड में भी भाजपा ने भारी बहुमत से सरकार बनाई। 2017 में ही भाजपा ने मणिपुर और गोवा में गठबंधन के जरिए सरकार बनाई, जबकि 2018 में कर्नाटक में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। हालांकि वहां शुरुआत में सरकार नहीं बन सकी, लेकिन बाद में राजनीतिक समीकरण बदलने पर भाजपा सत्ता में आई।

2022 में यूपी में फिर बनी BJP की सरकार

2019 के बाद भाजपा ने हरियाणा में दोबारा सरकार बनाई और महाराष्ट्र में भी महत्वपूर्ण राजनीतिक भूमिका निभाई। इसी दौरान पार्टी ने बिहार में गठबंधन के साथ अपनी स्थिति मजबूत बनाए रखी। 2022 में उत्तर प्रदेश में लगातार दूसरी बार सरकार बनाना भी अमित शाह और भाजपा नेतृत्व की बड़ी उपलब्धि माना गया, क्योंकि लंबे समय बाद किसी पार्टी ने राज्य में लगातार दूसरी बार पूर्ण बहुमत हासिल किया। पूर्वोत्तर राज्यों में भाजपा का विस्तार अमित शाह की सबसे बड़ी राजनीतिक सफलताओं में गिना जाता है। अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, त्रिपुरा और असम में भाजपा या उसके सहयोगी दलों की सरकारें बनीं। इससे भाजपा ने ‘कांग्रेस मुक्त पूर्वोत्तर’ के अपने अभियान को काफी हद तक सफल बनाया।

तमिलनाडु-केरल में भी हुई भाजपा की एंट्री

इसके अलावा गुजरात, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में भी संगठन को मजबूत बनाए रखने में अमित शाह की महत्वपूर्ण भूमिका रही। मध्य प्रदेश में 2020 में राजनीतिक बदलाव के बाद भाजपा ने दोबारा सत्ता हासिल की। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार अमित शाह की चुनावी रणनीति तीन प्रमुख आधारों पर टिकी रही। मजबूत संगठन, बूथ स्तर पर सक्रियता और सामाजिक समीकरणों का विस्तार। यही कारण है कि 2014 के बाद भाजपा देश के कई नए क्षेत्रों में अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने में सफल रही। आज भाजपा का देश के अधिकांश राज्यों में संगठनात्मक ढांचा मजबूत माना जाता है और इसके पीछे अमित शाह की रणनीतिक भूमिका को अहम माना जाता है। बंगाल जीत के पीछे भी अमित शाह की बड़ी भूमिका रही है।

उन्होंने राज्य का लगातार दौरा किया। संगठन क्षमता मजबूत की और वोटरों को भरोसा दिलान में सफल रहे कि उन्हें वोट डालने से कोई नहीं रोक सकता। असम में भी भाजपा ने हैट्रिक लगाई है। भाजपा के लिए दक्षिण के राज्यों तमिलनाडु और केरल में भी जीत के लिए दरवाजा खुल गया है। केरल में भाजपा ने तीन और तमिलनाडु में एक सीट सीती है।

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