दिल बेचारा Review: दमदार अभिनय से आखिरी सलाम दे गए Sushant Singh राजपूत

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‘एक था राजा एक थी रानी दोनों मर गए खत्म कहानी’ ये है फिल्म ‘दिल बेचारा’ की कहानी।

दिवंगत एक्टर सुशांत सिंह राजपूत (Sushant Singh Rajput) के निधन के बाद से ही एक्टर के फैन उनकी आखिरी फिल्म ‘दिल बेचारा (Dil Bechara)’ का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। जो अब लोगों के दिलों में सुशांत की यादों को ताजा कर रही है। लेकिन कैंसर पेशेंट के रूप में सामने आए सुशांत ने एक बार फिर सबको इमोशनल कर दिया। सुशांत का चुलबुला रूप सबके दिलों को छू रहा है।

पहले फिल्म शाम 7:30 बजे रिलीज होने वाली थी। लेकिन फिल्म आधे घंटे पहले ही शुरू कर दी गई। कोरोना के चलते सुशांत की फिल्म (Sushant Singh Rajput Last Film) भले ही सिनेमा हॉल नहीं पहुंची लेकिन अब इस फिल्म ने हर घर में पहुंचकर सुशांत की आवाज को हर घर में गुंजा दिया है।

फिल्म का हर गाना दिल को छू लेने वाला है। काफी टची और इमोशनल गानों के साथ यह कहानी काफी सहजता से आगे बढ़ती जाती है।कहानी के साथ हर गाना उसे बेहतरीन सपोर्ट देने वाला है।

सुशांत सिंह राजपूत की मौत के पूरे डेढ़ महीने बाद उनकी आखिरी फिल्म ‘दिल बेचारा’ देश-विदेश के दर्शको में एक साथ OTT प्लेटफॉर्म्स पर रिलीज कर दी गई है। सुशांत के फैन्स को उनकी आखिरी फिल्म पसंद आएगी लेकिन फिल्म का दर्द भरा थीम शायद इस फिल्म को उतने लोगों से ना जोड़ पाए जैसे सुशांत की पिछली फिल्म छिछोरे ने जोड़ा था। कल हो ना हो, आनंद और अंखियों के झरोखे से जैसी फिल्मों के इमोशन जगाने की पूरी कोशिश की गई है। जो कहीं पर हैं और कहीं पर नहीं हैं।

फिल्म का थीम है मौत और प्यार और अजीब बात है कि सुशांत की रियल लाइफ मौत ने भी सबके लिए सवाल पैदा कर दिए लेकिन इस फिल्म में उन्होंने मौत के लड़ने के कई फलसफे बताए हैं।

कहानी-

‘दिल बेचारा’ की कहानी किज्जी बासु की आवाज से शुरू होती है. किज्जी के किरदार में संजना सांघी हैं, जो टर्मिनल कैंसर से जूझ रही हैं। उसकी लाइफ में एंट्री होती है इम्मानुअल राजकुमार जूनियर उर्फ मैनी (सुशांत सिंह राजपूत) की। जो काफी चुलबुला है। फिल्म में सुशांत की एंट्री काफी कूल और मजेदार अंदाज में होती है, इसके बाद किज्जी को भी जैसे एक जीने की वजह मिल जाती है। लेकिन किज्जी का एक अधूरा सपना है जो उसे पूरा करना है। उसे अपने एक पसंदीदा म्यूजिशियन और राइटर आफताब खान (सैफ अली खान) से मिलना है जिसने एक गाना अधूरा छोड़ा है. लेकिन वह लंदन में रहता है।

यहां मैनी अपनी जिद से किज्जी के परिवार को मनाता है और उसे लंदन लेकर जाता है। लेकिन अफसोस कि आफताब के बारे में किज्जी ने जैसा सोचा था वह उसके अपोजिट एकदम बददिमाग निकलता है। यहां सैफ की एक्टिंग दमदार है।

दोनों उदास लेकिन एक दूसरे के ज्यादा करीब होकर वापस भारत आते हैं, लेकिन यहां से ही आता है कहानी में एक ट्विस्ट। जहां अब तक किज्जी सीरियस हालत में नजर आ रही थी वहीं मैनी की तबियत ज्यादा बिगड़ जाती है। यहां हर सीन काफी इमोशनल होता जाता है।

कहानी आगे बढ़कर और भी दुखद हो जाती है जब एक रात अचानक मस्ती करते करते मैनी की हालत काफी बिगड़ जाती है। ये सीन किसी पत्थर दिल इंसान को भी रुला सकता है। किज्जी, मैनी को अस्पताल पहुंचाती है। लेकिन सब को एक अनहोनी का डर लगा रहता है।

मैनी किज्जी को खुश करते-करते खुद ही मौत से जा मिलता है। लेकिन इस फिल्म का अंत गहरी उदासी के साथ एक सरप्राइज भी देती है, लेकिन इसे जानने के लिए आपको फिल्म देखनी होगी।

आपको बता दें कि ‘दिल बेचारा’ साल 2014 में आई हॉलीवुड फिल्म फॉल्ट इन आर स्टार्स का ऑफिशियल हिंदी रीमेक है। जो कि जॉन ग्रीन की सन 2012 में प्रकाशित हुई नॉवेल पर आधारित है। अमेरिका का लोकेशन यहां जमशेदपुर बन गया है और फिल्म को शुद्ध देसी और आज के जमाने का बनाया गया है। जमशेदपुर की गलियों से कहानी पेरिस भी जाती है।

फिल्म का मुख्य आकर्षण है सुशांत और संजना की केमिस्ट्री। संजना ने कीजी बासु के किरदार को खूबसूरती से निभाया है। फिल्म में ढेर सारे क्यूट मोमेंट्स हैं जो दर्शकों को अच्छे लगेंगे। सुशांत ने छिछोरे और धोनी के बाद एक और मंजी हुई परफॉर्मेंस दी है। फिल्म उड़ान के बाद जमशेदपुर के लोकेशंस फिल्म में काफी अच्छे लगे है।

सुशांत सिंह राजपूत की आखिरी फिल्म होने की वजह से फिल्म को ज्यादा लोग देखेंगे चूंकि फिल्म सिनेमाघरों में रिलीज नहीं हुई है। डिजिटल माध्यम से इससे ज्यादा लोग देख पाएंगे। फिल्म का विषय हल्का फुल्का नो होकर थोड़ा संजीदा होने से फिल्म में मनोरंजन का पुट थोड़ा कम है। फिल्म में ए आर रहमान का संगीत मधुर है और कहानी को सूट करता है।

सुशांत और संजना के अलावा फिल्म में बांग्ला फिल्मों के कलाकार जैसे स्वास्तिक मुखर्जी, शाश्वता, साहिल वेद ने भी अपने किरदारों को खूबसूरती से निभाया है। सैफ अली खान का रोल फिल्म में खास है। फिल्मों के कास्टिंग डायरेक्टर के रूप में मशहूर मुकेश छाबड़ा ने फिल्म में पूरी कोशिश की है किरदारों के इमोशंस को पेश करने की। कुल मिलाकर सुशांत की आखिरी फिल्म के रूप में यादगार रहेगी ‘दिल बेचारा’।

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