नई दिल्ली में चल रहे 18वें BRICS सम्मेलन के बिजनेस फोरम में विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर और केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने वैश्विक अर्थव्यवस्था और व्यापार से जुड़ी चुनौतियों पर चर्चा की। जयशंकर ने युद्ध, वैश्विक अस्थिरता और जलवायु संकट से बढ़ते जोखिमों को लेकर चिंता जताई, जबकि पीयूष गोयल ने BRICS देशों के बीच आपसी व्यापार और आर्थिक सहयोग को मजबूत करने पर जोर दिया।
विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने कहा कि दुनिया इस समय राजनीतिक और आर्थिक स्तर पर बड़े बदलावों और अस्थिरता के दौर से गुजर रही है। उन्होंने कहा कि भू-राजनीतिक संघर्ष, युद्ध, महामारियां और जलवायु परिवर्तन वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए नई चुनौतियां पैदा कर रहे हैं। ऐसे माहौल में आर्थिक क्षेत्र में जोखिम के साथ-साथ नए अवसर भी सामने आ रहे हैं।
तकनीक और डिजिटल क्रांति से उम्मीद का रास्ता
वैश्विक संकटों के बीच विदेश मंत्री ने तकनीक और डिजिटल विकास को नई उम्मीद बताया। उन्होंने कहा कि तेजी से बढ़ता डिजिटलाइजेशन और तकनीकी बदलाव आर्थिक विकास, उत्पादकता और नए अवसरों को बढ़ावा दे रहे हैं। उनके मुताबिक, बदलती वैश्विक परिस्थितियों में वही देश और संगठन आगे बढ़ पाएंगे, जो समय रहते बदलावों को समझकर खुद को उसके अनुरूप ढालने और प्रभावी कदम उठाने में सक्षम होंगे।
ग्लोबल ट्रेड का एक-चौथाई हिस्सा BRICS के पास: पीयूष गोयल
इसी मंच पर केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने आंकड़ों के जरिए BRICS की बढ़ती ताकत को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि BRICS देश दुनिया की करीब आधी आबादी का प्रतिनिधित्व करते हैं और वैश्विक GDP में उनकी हिस्सेदारी लगभग 40 फीसदी है। वहीं, दुनिया के कुल व्यापार में भी BRICS देशों का योगदान करीब 25 फीसदी है।
फार्मेसी ऑफ द वर्ल्ड’ के रूप में भारत की भूमिका
पीयूष गोयल ने कहा कि भारत इंट्रा-BRICS व्यापार में अहम भूमिका निभाता है और इंजीनियरिंग उत्पादों, इलेक्ट्रॉनिक्स व फार्मास्यूटिकल्स के क्षेत्र में उसकी मजबूत वैश्विक पहचान है। उन्होंने BRICS और साझेदार देशों से भारतीय उत्पादों के लिए बाजार खोलने और रेगुलेटरी प्रक्रियाओं को आसान बनाने की अपील की, ताकि सामान की क्लीयरेंस और डिलीवरी तेजी से हो सके।

