तो क्या है ‘BJP’ का मिशन ‘RJD’ ? बिहार में शाहनवाज हुसैन के ‘तीर’ से बंगाल के ‘TMC’ पर भी होगा निशाना

elections Special Report देश बिहार राजनीति

बीजेपी ( BJP ) विश्व की सबसे बड़ी पार्टी बनी क्योंकि, एक चुनाव के बाद BJP के कार्यकर्ता दूसरे चुनाव की तैयारी में जुट जाते हैं। 2020 बिहार विधानसभा चुनाव में बेहतर प्रदर्शन करने वाली BJP अब पूरी तरह से बंगाल चुनाव ( BENGAL ELECTION) पर केंद्रित है। BJPके रणनीतिकारों ने बिहार में अपने राष्ट्रीय प्रवक्ता सैयद शाहनवाज हुसैन ( SHAHNAWAZ HUSSAIN ) के जरिए एक ऐसा तीर चलाया है जिससे ना सिर्फ बिहार में RJD को नुकसान हो सकता है बल्कि, पड़ोसी राज्य बंगाल की सत्तारूढ़ टीएमसी (TMC) पर भी असर डाल सकता है।

28 जनवरी को बिहार विधान परिषद की 2 सीटों पर उप – चुनाव होना है। बिहार विधान परिषद की यह दोनों सीट BJP की है जो पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी के राज्यसभा सांसद बनने और बिहार सरकार के पूर्व मंत्री विनोद नारायण झा के एमएलए ( MLA ) बनने से खाली हुई थी। आज BJP की ओर से राष्ट्रीय प्रवक्ता और पूर्व केंद्रीय मंत्री सैयद शाहनवाज हुसैन बिहार विधान परिषद के लिए नामांकन पत्र दाखिल करेंगे। वहीं विकासशील इंसान पार्टी ( VIP ) की ओर से मुकेश साहनी भी अपना पर्चा दाखिल करेंगे। बता दें कि एनडीए (NDA) में BJP ने ही मुकेश सहनी की पार्टी ( VIP) को शामिल कराया था और चुनाव पूर्व BJP ने मुकेश सहनी को विधान परिषद की एक सीट देने का वादा किया था। हालांकि 2 दिन पहले मुकेश सहनी ने विधान परिषद जाने से मना कर दिया था। इसके पीछे का कारण यह बताया जा रहा था कि मुकेश सहनी को बिहार सरकार के पूर्व मंत्री विनोद नारायण झा की खाली हुई सीट दी जा रही थी, जिसका कार्यकाल 2022 तक ही बचा है। लेकिन BJP और NDA नेताओं से बातचीत के करने के बाद मुकेश सहनी मान गए। सूत्र बताते हैं कि मुकेश सहनी को सुशील कुमार मोदी की खाली हुई सीट से परिषद भेजा जा रहा है। बता दें कि इस सीट का कार्यकाल 2024 तक का है।

2020 में बिहार विधानसभा चुनाव जीतने के बाद बीजेपी की नजर अब 2021 में होने वाले बंगाल चुनाव पर है। पश्चिम बंगाल में मिशन 200+ लेकर चल रही है BJP बिहार में मिशन RJD पर भी काम कर रही है। BJP अपने राष्ट्रीय प्रवक्ता और पूर्व केंद्रीय मंत्री सैयद शाहनवाज हुसैन को बिहार विधान परिषद भेज कर जहां आरजेडी के एमवाई (MY) समीकरण को तोड़ने की कोशिश कर रही है। वहीं बंगाल चुनाव में ममता बनर्जी की TMC की ओर से BJP को सांप्रदायिक और मुस्लिम विरोधी बताए जाने के काट के तौर पर शाहनवाज हुसैन का चेहरा सामने कर दिया है।

READ MORE:   स्वास्थ्य कर्मियों पर देश को गर्व, सबने मिलकर रोका Corona का तूफान- हर्ष वर्धन

आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ‘ MY ‘ यानी मुस्लिम + यादव समीकरण के दम पर ही बिहार में 15 साल तक सत्ता पर काबिज रहे थे। हालांकि बिहार में बेतहाशा बढ़े अपराध और भ्रष्टाचार की वजह से 2005 में लालू प्रसाद यादव चुनाव हार गए। लेकिन उनके मुस्लिम यादव गठजोड़ (MY समीकरण) ने उनका साथ नहीं छोड़ा। लालू यादव की सत्ता गए 15 साल से अधिक हो गए लेकिन उनका समीकरण 2020 के चुनाव में भी उनके साथ खड़ा दिखा। यह अलग बात है कि हैदराबाद के असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन ( AIMIM ) की वजह से सीमांचल के क्षेत्र में मुसलमानों का बंटवारा हो गया। अब BJP ने चारा मामले में जेल में बंद लालू यादव की इसी ताकत को तोड़ने के लिए बिहार में अपने राष्ट्रीय प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन को ला खड़ा किया है।

गौरतलब है कि पूर्व केंद्रीय मंत्री सैयद शाहनवाज हुसैन, किशनगंज से 2014 लोकसभा चुनाव महज 10 हजार वोट से हार गए थे। 2019 के लोकसभा चुनाव में पार्टी शाहनवाज हुसैन को मध्य प्रदेश से चुनाव लड़ना चाहती थी लेकिन शाहनवाज हुसैन ने चुनाव लड़ने से मना कर दिया था। 2020 विधानसभा चुनाव जीत हासिल करने के बाद BJP ने सीमांचल इलाके में पकड़ रखने वाले शाहनवाज हुसैन को बिहार की राजनीति में उतारा है। जाहिर है BJP की मंशा PM के मंत्र, सबका साथ – सबका विकास और सबका विश्वास के तहत मुसलमानों को रिझाने की है। अगर शाहनवाज हुसैन आरजेडी से मुसलमानों को तोड़ने में सफल होते हैं तो वो ना सिर्फ बिहार में BJP ज्यादा मजबूत करेंगे बल्कि, पार्टी में उनका कद और भी बढ़ जाएगा।

बिहार विधानसभा चुनाव 2020 में 17% आबादी वाले मुसलमानों में से महज 19 मुस्लिम ही विधायक चुने गए। जबकि 2015 के चुनाव में 24 मुस्लिम विधायक चुने गए थे। हालांकि 2020 के चुनाव में भी सबसे ज्यादा 8 मुस्लिम विधायक RJD से ही चुने गए हैं। 5 विधायक के साथ दूसरे नंबर पर असदुद्दीन ओवैसी की एआईएमआईएम ( AIMIM ) रही तो कांग्रेस के 4 और सीपीआई -एम ( CPI – M ) और बहुजन समाज पार्टी ( BSP ) से एक-एक मुस्लिम विधायक चुनकर आए हैं। बता दें कि 2020 के विधानसभा चुनाव में JDU ने 11 मुस्लिम उम्मीदवार मैदान में उतारे थे लेकिन JDU का एक भी मुस्लिम उम्मीदवार जीत हासिल नहीं कर सका। यानी 2015 की तुलना में 2020 के विधानसभा चुनाव में 5 मुसलमान विधायकों की संख्या घट गई है।

READ MORE:   दिल्ली तक पहुंचा Coronavirus, दो नए मरीज की पहचान

बिहार विधानसभा चुनाव 2020 में जीत हासिल करने के बाद से ही BJP ने बंगाल को अपने टारगेट पर ले लिया है। इसी साल अप्रैल में होने वाले बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए BJP ने मिशन 200+ पर काम करना शुरू कर दिया है। एक तरफ जहां गृह मंत्री अमित शाह ने बंगाल में चुनाव का शंखनाद कर दिया है। वहीं BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा भी लगातार पश्चिम बंगाल का दौरा कर रहे हैं। दरअसल बंगाल में BJP की नजर हिंदू वोटरों पर है जो ममता बनर्जी के मुस्लिम तुष्टीकरण से भीतर ही भीतर नाराज हैं। यह माना जा रहा है कि चुनाव आते-आते तक बंगाल चुनाव पूरी तरह से हिंदू – मुसलमान पर केंद्रित हो जाएगा। 294 विधानसभा सीटों वाली पश्चिम बंगाल में करीब 113 सीटें ऐसी है जहां मुसलमानों का दबदबा है। यही वजह है कि सत्तारूढ़ ममता बनर्जी की टीएमसी ( TMC ) बीजेपी ( BJP ) को बाहरी बताने के साथ-साथ साम्प्रदायिक और मुसलमान विरोधी बताने का कोई मौका नहीं छोड़ रही है। टीएमसी को जवाब देने के लिए BJP ने बंगाल की सीमा से लगे बिहार में अपने राष्ट्रीय प्रवक्ता और पूर्व केंद्रीय मंत्री सैयद शाहनवाज हुसैन को लाकर खड़ा कर दिया है। बीजेपी ने अपने इस कदम के जरिए पश्चिम बंगाल के मुसलमानों को यह संदेश देने की कोशिश की है कि वह मुसलमान विरोधी नहीं है।

BJP के पूर्व विधायक और पार्टी के प्रवक्ता प्रेम रंजन पटेल का कहना है कि RJD का ‘ MY ‘ ( MUSLIM + YADAV ) समीकरण पूरी तरह से ध्वस्त हो चुका है। उन्होंने यह भी कहा कि अब यादव समाज भी NDA के साथ है। प्रेमरंजन पटेल ने कहा कि चुनाव 2020 के पहले ही चंद्रिका राय, जयवर्धन यादव और महेश्वर यादव जैसे आरजेडी विधायकों का एनडीए में शामिल होना यह साबित करता है कि, यादव समाज का लालू यादव ( LALU YADAV) और RJD से मोहभंग हो चुका है। उन्होंने कहा कि यादव समाज के लोग अब BJP नेता के राष्ट्रीय महामंत्री सह सांसद और बिहार प्रभारी भूपेंद्र यादव के साथ केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय को अपना नेता मान चुके हैं। प्रेम रंजन पटेल ने कहा कि, यादव समाज के लोगो को अब यह समझ में आ चुका है कि, लालू यादव और उनके परिवार के सदस्यों ने सिर्फ अपने फायदे के लिए उनका इस्तेमाल किया है। BJP प्रवक्ता ने यह भी कहा कि RJD के MY समीकरण का Y यानि यादव समाज NDA के साथ जुड़ चुका है। इसके अलावा ‘M’ यानी मुस्लिम समाज ने भी लालू यादव का साथ छोड़ दिया है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि मुस्लिम बहुल सीमांचल इलाके में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम (AIMIM) के टिकट से 5 विधायक का चुना जाना, यह साबित करता है कि मुस्लिम समाज का भी RJD से मोह भंग हो चुका है।

READ MORE:   अमित शाह ने कहा कि मुसलमान नागरिक थे और रहेंगे

बिहार के यादव समाज से ही आने वाले प्रदेश BJP प्रवक्ता निखिल आनंद का कहना है कि RJD ने सिर्फ वोट के लिए यादव समाज को बेवकूफ बनाया है। उनका कहना है कि जब RJD सत्ता में थी तो, यादव समाज के लोगों को समाज के विभिन्न जीवन क्षेत्रों में भागीदारी देने के लिये कुछ नहीं किया। निखिल आनंद का कहना है कि, RJD ने यादव ही नहीं समस्त दलित, अति पिछड़ा और पिछड़ा समाज को ठगा है। यादव और पिछड़ों के लिए न तो ठीक से डेयरी उद्योग को खड़ा किया न ही इस समाज को संस्थागत और आर्थिक भागीदारी दी। जबकि नित्यानंद राय बिहार BJP के प्रदेश अध्यक्ष भी रह चुके हैं और केंद्र सरकार में मंत्री भी हैं। BJP ने कहा कि मौका मिलने पर लालू यादव ने तस्लीमउद्दीन को केंद्रीय गृह राज्यमंत्री बनाया लेकिन, BJP ने यादव समाज के बेटे नित्यानंद राय को केंद्रीय गृह राज्यमंत्री बनाया, जो प्रदेश BJP अध्यक्ष भी थे, और अब जिनकी ओर समस्त बिहार की जनता देख रही है।

बिहार BJP प्रवक्ता निखिल आनंद ने कहा कि आज की तारीख में BJP के राष्ट्रीय महामंत्री, सांसद और बिहार प्रभारी भूपेन्द्र यादव BJP के शीर्ष राष्ट्रीय नेताओं में शुमार हैं। निखिल आनंद ने कहा कि यादवों को वोटबैंक समझने वाली पार्टी RJD या किसी भी पार्टी में भूपेन्द्र यादव के कद का यादव नेता राष्ट्रीय स्तर पर है क्या?” बता दे कि कुछ ही दिन पहले भूपेंद्र यादव ने यह दावा किया था कि खरमास यानी 14 जनवरी के बाद लालू यादव की पार्टी RJD में जबरदस्त टूटने वाली है। BJP के राष्ट्रीय महामंत्री ने RJD को यह भी चुनौती दी कि अगर नेतृत्व में ताकत है तो वह RJD छोड़ने वाले विधायकों को रोक कर दिखाए।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *