SUPREME COURT

केंद्रीय कर्मचारियों की काउंटिंग ड्यूटी पर SC से ममता बनर्जी को झटका,’यह चुनाव आयोग का अधिकार’

Supreme Court verdict on TMC plea: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की मतगणना को लेकर तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है. अदालत ने केंद्र सरकार के कर्मचारियों की तैनाती से जुड़े निर्वाचन आयोग के परिपत्र को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए साफ कहा कि इस मामले में आगे किसी आदेश की जरूरत नहीं है. कोर्ट ने चुनाव आयोग के अधिकारों को बरकरार रखते हुए टीएमसी की याचिका खारिज कर दी.

जानें सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई की 5 बड़े बातें

सुप्रीम कोर्ट ने शनिवार को सुनवाई के दौरान कहा कि इस याचिका पर आगे कोई आदेश आवश्यक नहीं है. यह याचिका कलकत्ता उच्च न्यायालय के उस फैसले के खिलाफ दायर की गई थी, जिसमें पहले ही टीएमसी की याचिका खारिज की जा चुकी थी. न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की विशेष पीठ ने कहा कि निर्वाचन आयोग को मतगणना कर्मियों के चयन का अधिकार है और 13 अप्रैल के परिपत्र को गलत नहीं कहा जा सकता.
निर्वाचन आयोग ने अदालत में कहा कि परिपत्र में स्पष्ट रूप से लिखा है कि केंद्रीय और राज्य सरकार के कर्मचारी मिलकर काम करेंगे. आयोग ने टीएमसी की गड़बड़ी की आशंका को निराधार बताया और अदालत को आश्वासन दिया कि परिपत्र का पालन किया जाएगा.
टीएमसी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि परिपत्र 13 अप्रैल का था, लेकिन उन्हें इसकी जानकारी 29 अप्रैल को मिली. सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि निर्वाचन आयोग चाहे तो केवल केंद्र सरकार के कर्मचारियों से भी मतगणना कर्मियों का चयन कर सकता है इसलिए परिपत्र को गलत नहीं कहा जा सकता.
निर्वाचन आयोग की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता डी.एस. नायडू ने कहा कि निर्वाचन अधिकारी राज्य सरकार का कर्मचारी होता है और उसे किसी भी सरकारी समूह से कर्मचारियों की तैनाती का पूरा अधिकार है. इसके बाद कपिल सिब्बल ने कहा कि उनकी मांग सिर्फ इतनी है कि परिपत्र को यथावत लागू किया जाए. इस पर न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची ने सवाल किया कि अगर वे परिपत्र का पालन चाहते हैं, तो फिर अदालत में क्यों आए हैं?
दोनों पक्षों की दलीलों के बाद सुप्रीम कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि आगे किसी आदेश की आवश्यकता नहीं है. इससे पहले कलकत्ता उच्च न्यायालय ने 30 अप्रैल को भी टीएमसी की याचिका खारिज करते हुए कहा था कि केंद्र सरकार और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (पीएसयू) के कर्मचारियों को मतगणना सुपरवाइजर और सहायक नियुक्त करने में कुछ भी अवैध नहीं है.

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