BIHAR MLC ELECTIONS 2022

पहली बार रिजल्ट से पहले MLC चुनाव के संभावित परिणाम:NDA को 15 से 17 और RJD+ को 5-6 सीट मिलने का अनुमान, निर्दलीय भी पीछे नहीं

बिहार विधान परिषद सदस्य ( MLC) के 24 सीटों पर सोमवार को मतदान खत्म हो गया। परिणाम 7 अप्रैल को आएगा। अब जीत हार की चर्चा हर तरफ हो रही है। ऐसे में रिजल्ट से पहले दैनिक भास्कर पर पढ़िए संभावित रिजल्ट। भास्कर के सर्वे में NDA को बढ़त मिलती दिख रही है। उसको 15 से 17 सीट मिल सकती है। हालांकि, पिछले बार 24 में से 21 सीटें NDA के पास थी। वहीं, RJD+ को 5-6 सीट और कांग्रेस को 0 से 1 सीट मिलने का अनुमान है। इस बार निर्दलीय 3 से 5 सीट पर चुनाव जीत सकते हैं।

ढ़िए, किस सीट से कौन जीत सकता है…

पटना: पूरे चुनाव के दौरान पटना सीट को लेकर RJD काफी सजग रही है। पहले यहां से रीतलाल यादव MLC थे। उनके विधायक बनने के बाद यह सीट खाली हुई थी। ये सीट नाक की लड़ाई इसलिए भी बनी हुई है क्योंकि लालू यादव ने खुद उम्मीदवार का ऐलान किया था। वहीं, JDU की तरफ से CM नीतीश कुमार के खास वाल्मिकी सिंह को खड़ा किया गया था। हालांकि, चुनाव बाद निर्दलीय प्रत्याशी कर्णवीर सिंह यादव का पलड़ा भारी है। उनके जीतने की संभावना ज्यादा है।

भोजपुर-बक्सर : भोजपुर-बक्सर से राधाचरण साह पहले भी MLC रह चुके हैं। RJD ने उनके सामने नए चेहरे अनिल सम्राट को टिकट दिया था। बताया जा रहा है कि सम्राट सेठ के सामने टिक नहीं पाए। भोजपुर में मात्र दो ही उम्मीदवार मैदान में थे। इसमें राधाचरण सेठ के जीतने की संभावना ज्यादा है।

गया : गया-जहानाबाद से एक बार फिर JDU की मनोरमा देवी जीत सकती हैं। बताया जा रहा है कि जिस तरह से उन्होंने अपने स्थानीय निकाय के जनप्रतिनिधियों को मैनेज किया है, उससे उनकी जीत पक्की नजर आ रही है।

नालंदा : पूर्व की तरह रीना देवी भी JDU से टिकट लेने में कामयाब रही है और उनके पति राजू यादव और उन्होंने मिलकर जनप्रतिनिधियों को बेहतर तरीके से मैनेज किया। यही कारण है कि इस बार फिर से रीना देवी का MLC बनना तय है।

रोहतास-कैमूर: रोहतास में RJD के कृष्णा सिंह और BJP के संतोष सिंह के बीच कांटे की टक्कर है। वहीं, चिराग पासवान ने BJP सांसद छेदी पासवान के पुत्र रवि शंकर पासवान को समर्थन देकर लड़ाई को और कठिन कर दिया। फिर भी सभी मुश्किलों को पार कर संतोष सिंह आगे निकलते दिख रहे हैं।

औरंगाबाद : चुनाव के ऐन मौके पर औरंगाबाद से भाजपा के MLC रहे राजन कुमार सिंह ने चुनाव लड़ने से मना कर दिया तो आनन-फानन में दिलीप कुमार सिंह को उम्मीदवार बनाया गया। हालांकि, भाजपा के लिए यह सीट नाक की लड़ाई बनी हुई है। ऐसे में भाजपा ने अपनी पूरी मशीनरी औरंगाबाद में लगाई थी। बताया जा रहा है कि दिलीप औरंगाबाद के किले को जीत लेंगे।

सारण : भाजपा से MLC रहे सच्चिदानंद राय का टिकट भाजपा ने अंतिम दिनों में काट दिया तो उन्होंने निर्दलीय पर्चा भरकर चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया। राय ने वहां के जनप्रतिनिधियों को ऐसे मैनेज किया कि आज उनकी जीत पक्की बताई जा रही है।

सीवान : काफी मशक्कत के बाद सीवान में मनोज कुमार सिंह भाजपा से विधान परिषद के स्थानीय निकाय के लिए टिकट लेने में सफल रहे। उन्होंने भाजपा आलाकमान के सामने दावा किया था कि वह इस लड़ाई को जीत लेंगे। स्थानीय जनप्रतिनिधियों को उन्होंने बेहतर तरीके से मैनेज किया है। यही कारण है कि वह चुनाव में सबसे आगे हैं।

दरभंगा : सुनील चौधरी झारखंड के बड़े बिजनेसमैन और एक पत्रकारिता संस्थान के मालिक रहे हैं। चौधरी 2015 में JDU से विधायक बने थे। 2020 में उनका टिकट कट गया था। अब उन्होंने दरभंगा से भाजपा के टिकट पर MLC चुनाव लड़ा है। माना जा रहा है कि उन्होंने स्थानीय जनप्रतिनिधि को बेहतर तरीके से मैनेज किया है और वह इस लड़ाई में सबसे आगे हैं।

पूर्वी चंपारण : पूर्वी चंपारण की लड़ाई त्रिकोणीय जरूर बनी है, लेकिन यहां से निर्दलीय महेश्वर सिंह जीत के करीब दिखाई दे रहे हैं। महेश्वर सिंह RJD से दो बार विधायक रह चुके हैं। यदि महेश्वर सिंह यहां से चुनाव नहीं लड़ते तो RJD मजबूत दिख रही थी। अब RJD और बीजेपी दोनों के उम्मीदवार महेश्वर सिंह से हारते नजर आ रहे हैं।

पश्चिमी चंपारण : पश्चिम चंपारण से एंटी कॉम्बेन्सी काम कर रही है। NDA प्रत्याशी राजेश राम पहले से एमएलसी रह चुके हैं, लेकिन स्थानीय निकाय के जनप्रतिनिधियों के मुताबिक वह वादे पर खरे नहीं उतरे। ऐसे में वहां के स्थानीय निकाय के जनप्रतिनिधि अब नए चेहरे RJD प्रत्याशी सौरभ कुमार को अपना प्रतिनिधि बनाने का मूड बना चुके हैं।

मुजफ्फरपुर : दिनेश सिंह JDU से टिकट लेने में कामयाब रहे तो वह जीत के करीब भी दिख रहे हैं। दिनेश सिंह की पत्नी वीणा सिंह लोजपा से सांसद हैं। वीणा सिंह अभी पशुपति पारस गुट में है, ऐसे भी इनकी जीत पक्की बताई जा रही है।

वैशाली : RJD के तेजतर्रार नेता माने जाने वाले सुबोध कुमार राय एक बार फिर से जीतकर उच्च सदन में पहुंच सकते हैं। उनके सामने पशुपति पारस की लोजपा के तरफ से भूषण राय को खड़ा किया गया है, जो कमजोर चेहरा माने जा रहे हैं। वोटिंग होने से पहले चिराग पासवान का एक ऑडियो वायरल हुआ था, जिसमें उन्होंने इशारों-इशारों में RJD उम्मीदवार सुबोध राय के लिए वोट मांगा था।

सीतामढ़ी : शैलेंद्र कुमार उर्फ कब्बू खिरहर RJD के उम्मीदवार हैं। इनके सामने JDU ने रेखा देवी को उतारा था और कांग्रेस ने नूरी बेगम को। कब्बू खिरहर दोनों पर भारी निकले और इनकी जीत पक्की बताई जा रही है।

मुंगेर-जमुई-लखीसराय : मुंगेर की हवा को तेजस्वी यादव ने अंतिम दिनों में बदल दिया था। वजह यह थी कि मुंगेर की लड़ाई में निर्दलीय उम्मीदवार गुड्डू यादव ने RJD का खेल बिगाड़ दिया था। JDU उम्मीदवार संजय प्रसाद को लेकर स्थानीय प्रतिनिधियों में नाराजगी थी। ऐसे में तेजस्वी ने जाकर अपने यादव जनप्रतिनिधियों को एकजुट किया, इसके बाद अजय सिंह की जीत पक्की बताई जा रही है।

कटिहार : BJP उम्मीदवार अशोक अग्रवाल ने कटिहार में स्थानीय जनप्रतिनिधियों को बेहतर तरीके से मैनेज करके एक बार फिर से अपनी जीत पक्की कर ली है।​​​​​​

सहरसा-मधेपुरा-सुपौल: बिहार सरकार के मंत्री नीरज सिंह बबलू की पत्नी नूतन सिंह एक बार फिर से सहरसा-मधेपुरा-सुपौल स्थानीय निकाय के चुनाव में अपना भाग्य आजमा रही हैं। मंत्री पति का साथ मिलने के साथ-साथ नूतन सिंह को मंत्री विजेंद्र यादव और JDU के तमाम नेताओं का भी भरपूर सहयोग मिला है। एक बार फिर से नूतन सिंह उच्च सदन में पहुंच रही हैं।

मधुबनी: मधुबनी में RJD ने मेराज आलम और JDU ने विनोद कुमार सिंह को मैदान में उतारा है। वहीं, RJD के पूर्व नेता गुलाब यादव ने अपनी पत्नी अंबिका गुलाब यादव और BJP के पूर्व MLC रहे सुमन महासेठ ने निर्दलीय पर्चा भर दिया। अब ऐसे में मेराज आलम का वोट गुलाब यादव काट रहे हैं। वहीं, सुमन महासेठ ने निचले स्तर के जनप्रतिनिधियों के बीच प्रचार किया है कि वह BJP से ताल्लुक रखते हैं और जीतने के बाद BJP में वापस चले जाएंगे। यह बताया जा रहा है कि सुमन महासेठ निर्दलीय के रूप में सबसे आगे हैं।

गोपालगंज :NDA के अंदर गोपालगंज में भीतरघात की वजह से RJD के दिलीप कुमार सिंह जीतते नजर आ रहे हैं। वहां NDA में दो बड़े नेताओं के बीच खींचतान की वजह से नतीजा विपक्ष की तरफ जा रहा है।

बेगूसराय -खगड़िया: इस बार बेगूसराय से BJP को हार का मुंह देखना पड़ सकता है। वजह साफ है कि यहां से JDU के परबत्ता विधायक डॉ. संजीव कुमार के बड़े भाई राजीव कुमार ने कांग्रेस से चुनाव लड़ा है और ऐसे में JDU ने खुलकर बेगूसराय में रजनीश कुमार का साथ नहीं दिया है। इस वजह से वहां से RJD के मनोहर कुमार यादव आगे हैं।

भागलपुर-बांका: भागलपुर खगड़िया से CPI उम्मीदवार संजय सिंह की जीत पक्की बताई जा रही है। भागलपुर के अंदर जिस तरह से वाम दल ने मेहनत की है, उसके बाद यहां से उनकी जीत पक्की है।

पूर्णिया-अररिया-किशनगंज: पूर्णिया से एक बार फिर से डॉ दिलीप कुमार जायसवाल जीत के करीब बताए जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि जायसवाल लगातार अपने स्थानीय निकाय की जनप्रतिनिधियों को बेहतर तरीके से मैनेज करते हैं और उसके बाद जनप्रतिनिधि उनके पक्ष में वोट देते हैं।

समस्तीपुर: समस्तीपुर मे भाजपा के तरुण कुमार जीत के करीब हैं। उनके सामने उमा भारती को RJD ने उतारा है, लेकिन तरुण कुमार ने बेहतर तरीके से जनप्रतिनिधियों को मैनेज किया है।

नवादा: पूर्व की तरह नवादा में एक बार फिर से सलमान रागिब जीत के करीब बताए जा रहे हैं। रागिब JDU के उम्मीदवार हैं और नवादा में उनके और निर्दलीय उम्मीदवार अशोक यादव के बीच कड़ी टक्कर है। RJD यहां तीसरे नंबर पर नजर आ रही है।

सबसे ज्यादा 23 सीटों पर RJD के प्रत्याशी

MLC चुनाव में सबसे ज्यादा 23 सीटों पर RJD चुनाव लड़ रही है। उसने एक सीट CPI को दी है। NDA में भाजपा ने 13 और JDU ने 11 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे हैं। वहीं, कांग्रेस ने 15 और VIP के 7 प्रत्याशी अपनी किस्मत अजमा रहे हैं।

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