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पहलगाम हमले की बरसी पर ऐशान्या द्विवेदी का दर्द भरा संकल्प,’शहीदों की यादें जिंदा रखूंगी’

22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम (बैसरन घाटी) में पाक परस्त आतंकियों ने 26 निर्दोष लोगों की जान ले ली थी। हमले की पहली बरसी पर देश एक बार फिर उस दर्दनाक घटना को याद कर रहा है। इस हमले में कानपुर के 31 वर्षीय शुभम द्विवेदी को भी आतंकियों ने धर्म पूछकर निर्मम तरीके से गोली मार दी थी। उनकी शादी को महज दो महीने ही हुए थे। उनकी पत्नी ऐशान्या द्विवेदी आज भी उस दर्दनाक मंजर को नहीं भूल पा रही हैं। उनके लिए समय अभी भी 22 अप्रैल 2025 को अटका हुआ है। अब हमले की पहली बरसी पर ऐशान्या कानपुर में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन कर रही हैं, जिसमें न सिर्फ अपने पति शुभम बल्कि सभी 26 शहीदों को याद किया जाएगा।

खुशियां इतनी जल्दी खत्म हो जाएंगी..
ऐशान्या कहती हैं, “मेरा पूरा जीवन एक पल में बदल गया। शादी के सिर्फ दो महीने बाद ही मेरा लाइफ पार्टनर हमेशा के लिए चला गया। आज भी यकीन नहीं होता कि वो खुशियां इतनी जल्दी खत्म हो जाएंगी। मैं खुद को व्यस्त रखने की कोशिश कर रही हूं। सामाजिक कार्यों में हाथ बंटा रही हूं ताकि शुभम की यादें कभी धुंधली न पड़ें। 22 अप्रैल को होने वाले कार्यक्रम में सभी शहीदों को श्रद्धांजलि दी जाएगी और उनके परिवारों का सम्मान किया जाएगा।”

खौफनाक मंजर भूल पाना नामुमकिन
घटना का वह भयावह क्षण आज भी ऐशान्या की आंखों के सामने घूमता रहता है। परिवार के 11 सदस्यों के साथ पहलगाम घूमने गए शुभम दोपहर के भोजन के बाद अपनी पत्नी के बगल में बैठे थे। अचानक हथियारबंद आतंकवादी उनके पास आया और गुस्से में चिल्लाया “हिंदू हो या मुसलमान? कलमा पढ़ो!” शुभम ने शांति से जवाब दिया, “हम हिंदू हैं।” बस इतना कहते ही आतंकी ने शुभम के सिर में बंदूक सटाकर गोली दाग दी। उनका सिर पूरी तरह चकनाचूर हो गया और खून से ऐशान्या का पूरा शरीर लथपथ हो गया। ऐशान्या कहती हैं, “साल भर बीत जाने के बाद भी कभी-कभी अपने हाथों पर शुभम का खून दिखाई देता है। वो खौफनाक मंजर भूल पाना नामुमकिन है।”

सभी 26 पीड़ितों को शहीद का दर्जा देने की मांग
ऐशान्या ने जोर देकर कहा कि पहलगाम हमला धार्मिक आधार पर नरसंहार था। जो भी व्यक्ति अपनी धार्मिक पहचान बताने के बाद गोली का शिकार हुआ, वह शहीद का दर्जा पाने का हकदार है। ऐशान्या की मांग है कि सभी 26 पीड़ितों को शहीद का दर्जा दिया जाए। परिवार अब शुभम के नाम पर एक ट्रस्ट बनाने की योजना बना रहा है, ताकि आतंकवाद पीड़ितों की मदद की जा सके और उनकी यादों को जिंदा रखा जा सके।

सेना लगातार आतंकियों के खिलाफ अभियान चला रही
ऐशान्या के पिता संजय द्विवेदी भी बेटी के साथ कार्यक्रम की तैयारियों में लगे हुए हैं। उन्होंने बताया कि शुभम परिवार के सबसे प्यारे सदस्य थे। हमला इतना अचानक था कि परिवार के बाकी सदस्यों को भी समझ नहीं आया कि क्या हो रहा है। ऐशान्या ने आगे कहा, “हमारी सेना लगातार आतंक के खिलाफ अभियान चला रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मेरे ससुर से कहा था कि आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी। मैं उन ऑपरेशनों का स्वागत करती हूं जिनमें आतंकियों को सजा मिली।”

दर्द शायद कभी खत्म नहीं होगा
यह हमला न सिर्फ एक परिवार बल्कि पूरे देश के लिए सदमा था। शुभम एक सफल कारोबारी थे और नई-नई शादीशुदा जिंदगी की शुरुआत कर रहे थे। उनकी मौत ने कई सपनों को चकनाचूर कर दिया। ऐशान्या अब अपने दर्द को ताकत में बदलने की कोशिश कर रही हैं। वे कहती हैं, “दर्द शायद कभी खत्म नहीं होगा, लेकिन शुभम की शहादत को भुलाया नहीं जाएगा। हम सबको मिलकर आतंकवाद के खिलाफ आवाज उठानी होगी।”

22 अप्रैल को कानपुर में आयोजित होने वाला श्रद्धांजलि कार्यक्रम सिर्फ याद करने का नहीं, बल्कि न्याय और सम्मान का प्रतीक होगा। ऐशान्या की यह जद्दोजहद दिखाती है कि सच्चा प्यार और देशभक्ति कभी मरती नहीं। शुभम द्विवेदी हमेशा शहीद के रूप में याद किए जाएंगे और उनकी विधवा ऐशान्या उनकी यादों को जिंदा रखने का संकल्प लिए हुए हैं।

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