मालेगांव में साल 2006 में हुए बम धमाके मामले में हाई कोर्ट ने सभी चारों आरोपियो को बरी कर दिया है। मामले की सुनवाई के दौरान बॉम्बे हाई कोर्ट ने आरोपी लोकेश शर्मा, धन सिंह, राजेंद्र चौधरी और मनोहर नरवरिया को निर्दोष माना और उन्हें सभी आरोपों से बरी कर दिया। मस्जिद के पास हुए सीरियल धमाके में 37 लोगो की जान चली गयी थी।
एनआईए कोर्ट ने भी किया था बरी
इससे पहले विशेष राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) अदालत ने 2008 के मालेगांव धमाका मामले में सभी सात आरोपियों को बरी कर दिया था। इन सात आरोपियों में पूर्व सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर, मेजर (रिटायर्ड) रमेश उपाध्याय, सुधाकर चतुर्वेदी, अजय राहिरकर, सुधाकर धर द्विवेदी (जिन्हें शंकराचार्य के नाम से भी जाना जाता है) और समीर कुलकर्णी शामिल थे। अदालत ने पर्याप्त सबूतों की कमी का हवाला देते हुए गैर-कानूनी गतिविधियाम (रोकथाम) अधिनियम (UAPA), शस्त्र अधिनियम और भारतीय दंड संहिता (IPC) के तहत सभी आरोप हटा दिए थे।
मालेगांव में कब हुआ था धमाका
यह धमाका 29 सितंबर, 2008 को हुआ था, जब महाराष्ट्र के नासिक ज़िले के मालेगांव में भिक्कू चौक मस्जिद के पास एक मोटरसाइकिल में लगा बम फट गया था। यह धमाका रमज़ान के पवित्र महीने के दौरान और हिंदू त्योहार नवरात्रि से ठीक पहले हुआ था। इस सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील शहर में इस घटना में कई लोगों की जान चली गई थी और 100 से ज़्यादा लोग घायल हो गए थे। मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष ने 323 गवाहों को कोर्ट में पेश किया। हालांकि, उनमें से 34 गवाह अपने बयान से पलट गए, जिससे अभियोजन पक्ष का मामला काफ़ी कमज़ोर हो गया।
इस मामले की शुरुआती जांच महाराष्ट्र आतंकवाद निरोधक दस्ता (ATS) ने की थी, जिसने आरोपियों को गिरफ़्तार किया था और चार्जशीट दाख़िल की थी। 2011 में जांच NIA को सौंप दी गई, जिसने 2016 में एक पूरक चार्जशीट दाख़िल की, जिसमें सख़्त आतंकवाद विरोधी कानूनों के तहत अपर्याप्त सबूतों का हवाला देते हुए, साध्वी प्रज्ञा सहित कई आरोपियों के खिलाफ आरोप हटा दिए गए थे।

