Bihar CM Controversy

हिजाब खींचने को लेकर क्या नीतीश कुमार को मिलेगी सजा, जानिए क्या कहता है कानून?

Nitish Kumar Hijab Controversy: आयुष डॉक्टरों को अपॉइंटमेंट लेटर बांटने के एक सरकारी कार्यक्रम के दौरान बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का एक वीडियो मुस्लिम महिला डॉक्टर का हिजाब बिना उनकी मर्जी के हटाते हुए वायरल हो रहा है. इस घटना ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. अब सवाल यह उठता है कि क्या नीतीश कुमार को भारतीय कानून के तहत सजा मिल सकती है और कानूनी प्रावधान असल में क्या कहते हैं.

क्यों उठा विवाद

दरअसल भारतीय कानून किसी भी व्यक्ति की स्थिति की परवाह किए बिना एक महिला की निजता और व्यक्तिगत गरिमा की रक्षा पर जोर देता है. इस बात का सबूत है कि यह घटना एक सरकारी कार्यक्रम में सार्वजनिक रूप से हुई है.

आपराधिक कानून के तहत महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाना

भारतीय अपराधिक न्यायशास्त्र के तहत कोई भी ऐसा काम जो किसी महिला की गरिमा को ठेस पहुंचता हो उसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं. भारतीय न्याय संहिता की धारा 74 किसी महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने के इरादे से उस पर हमला या आपराधिक बल का इस्तेमाल से संबंधित है. बिना इजाजत के हिजाब हटाना व्यक्तिगत जगह, निजता और गरिमा पर हमला करने वाला काम माना जा सकता है.

अगर अपराध साबित होते हैं तो संभावित सजा

अगर कोई भी अदालत इस नतीजे पर पहुंचती है कि यह काम जानबूझकर किया गया था और इससे महिला महिला की गरिमा को ठेस पहुंची है तो सजा गंभीर हो सकती है. कानून में 1 साल से लेकर 5 साल तक की कैद और जुर्माने का प्रावधान है. आपको बता दें कि यह अपराध संज्ञेय और गैर जमानती है. जिसका मतलब है कि पुलिस बिना किसी पूर्व अदालती मंजूरी के कार्रवाई कर सकती है और जमानत अधिकार का मामला नहीं है.

धार्मिक स्वतंत्रता और भावनाओं को ठेस पहुंचाना

हिजाब सिर्फ कपड़ा नहीं है बल्कि यह कई मुस्लिम महिलाओं के लिए धार्मिक प्रतीक के तौर पर पहचाना जाता है. इसे जबरदस्ती हटाने पर धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़े प्रावधान भी लागू हो सकते हैं. भारतीय न्याय संहिता की धारा 299 जानबूझकर और दुर्भावना पूर्ण कृतियों से संबंधित है.

क्या मुख्यमंत्री का पद छूट देता है

एक आम गलतफहमी यह है कि संवैधानिक अधिकारियों को आपराधिक कानून से छूट मिल जाती है. दरअसल कोई भी कानून से ऊपर नहीं है. हालांकि सरकारी कर्मचारियों के लिए काफी सुरक्षा उपाय मौजूद है लेकिन अगर कोई संज्ञेय अपराध होता है तो यह जांच या मुकदमा चलाने से नहीं रोकते.

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