दीपावली से पहले मनाई जाने वाली नरक चतुर्दशी का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। इसे छोटी दिवाली और रूप चौदस के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन भगवान यमराज के साथ पितरों के नाम दीपक जलाने की भी परंपरा है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आखिर पितरों के लिए दीपक क्यों जलाया जाता है और इसे किस दिशा में रखना चाहिए?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नरक चतुर्दशी पर पितरों के नाम दीपक जलाना उनके प्रति सम्मान और श्रद्धा प्रकट करने का प्रतीक है। माना जाता है कि ऐसा करने से पूर्वजों का आशीर्वाद परिवार पर बना रहता है और घर में सुख-शांति आती है।
परंपरा के अनुसार, पितरों के लिए दीपक घर की दक्षिण दिशा में जलाया जाता है। दक्षिण दिशा को पितरों और यमराज से जुड़ा माना गया है। कुछ परिवार मुख्य द्वार के बाहर भी दीपक रखते हैं।
दीपदान के लिए मिट्टी का दीपक लेकर उसमें सरसों या तिल का तेल डाल सकते हैं। इसके बाद पूर्वजों का स्मरण करते हुए श्रद्धापूर्वक दीपक जलाएं।ध्यान रखें, यह धार्मिक मान्यता और पारिवारिक परंपरा का विषय है। अलग-अलग क्षेत्रों में इसकी विधि अलग हो सकती है।
1. दक्षिण दिशा में जलाएं दीपक: दक्षिण दिशा को यमराज और पितरों की दिशा माना जाता है. इसलिए पितरों और यमराज के नाम का दीपक हमेशा दक्षिण दिशा की तरफ मुख करके या घर की दक्षिण दिशा में रखना चाहिए.
2. सरसों या तिल के तेल का करें इस्तेमाल: इस दीपक में सरसों के तेल या तिल के तेल का उपयोग करना शुभ माना जाता है. कई जगहों पर चार मुख वाला यानी चौमुखी दीपक जलाने की परंपरा है. इसके अलावा सामान्य दीपक भी जलाया जा सकता है.
3. कुल 14 दीपक जलाने की है परंपरा: नरक चतुर्दशी पर कुल 14 दीपक जलाने की परंपरा है. इन्हें घर के अलग-अलग स्थानों जैसे मुख्य द्वार, रसोई, तुलसी, पीपल, बाथरूम और छत आदि पर रखा जाता है. इनमें से एक दीपक पितरों और एक यमराज के लिए समर्पित होता है.
4. किस समय करना चाहिए दीपदान: नरक चतुर्दशी के दिन पितरों और यमराज के लिए दीपदान प्रदोष काल या संध्या के समय यानी सूर्यास्त के बाद किया जाता है.
नरक चतुर्दशी पर पितरों के नाम दीपक जलाने का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नरक चतुर्दशी पर पितरों का स्मरण करके उनके नाम का दीपक जलाने से उनकी आत्मा को शांति मिलती है. माना जाता है कि इस दिन दीपदान करने से पितर प्रसन्न होते हैं और परिवार पर उनका आशीर्वाद बना रहता है. वहीं, यमराज के निमित्त दीपक जलाने से अकाल मृत्यु का भय दूर होने और घर में सुख-समृद्धि आने की मान्यता है.

