अमेरिका और ईरान के बीच 6 महीने से जारी तनाव एक बार फिर बढ़ गया है. अमेरिकी सेना ने रविवार (30 अगस्त 2026) को ईरान के लारक द्वीप पर दो लॉन्चरों को निशाना बनाया. अमेरिका के मुताबिक, इन लॉन्चरों से ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में समुद्री माइंस बिछाने वाले रॉकेट लॉन्च करने की तैयारी कर रहा था. अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, जुलाई के बाद ईरान के खिलाफ यह पहला सार्वजनिक अमेरिकी सैन्य हमला है.
रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने कहा कि उसकी सेना ने IRGC की माइन बिछाने वाली यूनिट के खिलाफ कार्रवाई की. अमेरिकी पक्ष का दावा है कि ईरानी सैनिक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में समुद्री माइंस पहुंचाने की तैयारी कर रहे थे और इससे वहां से गुजरने वाले जहाजों के लिए खतरा पैदा हो सकता था. CENTCOM के मुताबिक, कार्रवाई का मकसद आम सेलर, कमर्शियल शिपिंग और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए महत्वपूर्ण इस समुद्री मार्ग में आवाजाही को सुरक्षित रखना था. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री ऊर्जा मार्गों में से एक है. यहां किसी भी तरह का व्यवधान ग्लोबल ऑयल सप्लाई और एनर्जी मार्केट पर असर डाल सकता है.
अमेरिकी ड्रोन हमले में मौत
ईरान से जुड़े मीडिया संस्थानों ने दावा किया कि लारक द्वीप पर अमेरिकी ड्रोन हमले में दो लोगों की मौत हुई और दो अन्य घायल हुए. अमेरिकी हमले के बाद ईरान ने जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को बैलिस्टिक मिसाइलों से निशाना बनाया. ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड के मुताबिक, किंग हुसैन और अल-अज्राक एयरबेस पर हमला किया गया.
ईरान ने इन हमलों में सैन्य और तकनीकी ढांचे को निशाना बनाने का दावा किया है. हालांकि, जॉर्डन की सेना ने कहा कि उसकी एयर डिफेंस सिस्टम ने 8 मिसाइलों को रोक दिया. शुरुआती जानकारी के मुताबिक, अमेरिकी ठिकानों पर किसी बड़े नुकसान या हताहत की पुष्टि नहीं हुई है.
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर पहले से बढ़ा हुआ तनाव
यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है जब अमेरिका ने पिछले सप्ताह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के मुख्य शिपिंग रूट से समुद्री माइंस हटाने की कार्रवाई पूरी करने की जानकारी दी थी. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले चेतावनी दी थी कि अगर ईरान ने दोबारा समुद्री मार्ग में माइंस लगाने की कोशिश की तो उन्हें लगाने वाले जहाजों या नावों के खिलाफ कड़ी सैन्य कार्रवाई की जाएगी.
अमेरिका और ईरान के बीच जुलाई के बाद कुछ समय तक सैन्य तनाव में कमी देखी गई थी. ऐसे में लारक द्वीप पर अमेरिकी हमला और उसके बाद जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों पर ईरानी मिसाइल हमला क्षेत्र में फिर से सैन्य टकराव बढ़ने का संकेत माना जा रहा है.

