तबाही अभी थमी नहीं… नेपाल में फिर आसमानी आफत का साया, भोटेकोशी में बारिश और आंधी का अलर्ट

नेपाल की भोटेकोशी नदी का जलस्तर एक बार फिर से बढ़ रहा है, जिसके चलते नई आपदा का डर पैदा हो गया है. नदी के आसपास अलर्ट जारी किया गया है. अब तक 675 लोगों की मौत हो चुकी है, वहीं कई लोग लापता हैं.

4 मुख्य बातें

भोटेकोशी में फिर बढ़ा जलस्तर, नई आपदा का खतरा

675 लोगों की मौत, 2400 से ज्यादा अब भी लापता

320 भारतीय नागरिकों की तलाश जारी

बचाव अभियान में 18 हजार पुलिसकर्मी तैनात

नेपाल में भोटेकोशी में भारी तबाही मचाई थी, ऐसी तबाही जिसे लफ्जों में बयां करना मुमकिन नहीं है. 26 अगस्त को आई विनाशकारी अचानक बाढ़ के बाद एक तरफ राहत और बचाव कार्य जारी है, तो दूसरी तरफ नदी का जलस्तर एक बार फिर से बढ़ रहा है. जिससे एक बार फिर से आसमानी आफत का साया मंडरा रहा है.

नेपाल में राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन प्राधिकरण (NDRRMA) के मुताबिक रसुवा में फिर तेज बारिश और आंधी का अलर्ट जारी किया गया है. जिससे एक बार फिर से लोगों में दहशत फैल गई है. बताया जा रहा है कि भोटेकोशी के आसपास अलर्ट जारी किया गया है. रसुवा, नुवाकोट, धाडिंग, चितवन और आस-पास के इलाकों में खोज, बचाव और राहत कार्यों में लगे सभी कर्मचारियों, साथ ही नदी के किनारे रहने वाले लोगों से अपील की गई है कि वो पूरी सावधानी बरतें.

अब तक 675 लोगों की मौत

नेपाल के रसुवा इलाके में अचानक आई बाढ़ के बाद बड़ी संख्या में लोग लापता हो गए हैं. इनमें नेपाल के ही नहीं बल्कि अन्य देशों के लोग भी शामिल हैं. बताया जा रहा है कि अब भी 320 भारतीय नागरिक अब भी लापता हैं, जिनकी तलाश की जा रही है. मौत का आंकड़ा भी बढ़ता जा रहा है. अब तक 675 लोगों की मौत हो चुकी है. वहीं 2400 से ज्यादा लोग अभी भी लापता हैं. सेना के जवान लगातार बचाव कार्य में जुटे हुए हैं. 7500 लोगों का रेस्क्यू किया गया है, जिनमें भारतीय नागरिक भी शामिल हैं. 108 भारतीयों को सुरक्षित निकाला गया है.

खराब मौसम की वजह से बचाव कार्य में दिक्कत

रेस्क्यू ऑपरेशन में करीब 18000 पुलिस कर्मी तैनात हैं. बाढ़ से जान-माल का भारी नुकसान हुआ है और सड़क, पुल, आवासीय इलाकों समेत बड़ी संख्या में बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा है. मलबे में कई लोग दबे हुए हैं. इधर खराब मौसम की वजह से बचाव कार्य में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है.

शवों की शिनाख्त करना मुश्किल

इस विनाशकारी बाढ़ के बाद कई दर्दनाक तस्वीरें सामने आ रही हैं. कई लोगों के शवों की शिनाख्त करना भी मुश्किल हो गया गया है. मोर्चरी (Mortuary) में शव रखे हुए हैं, जिनकी पहचान नहीं हो सकी है. ऐसे लोगों की संख्या 200 से भी ज्यादा है. अधिकारियों ने कहा कि लाशों के सड़ने से लोगों की सेहत को खतरा हो सकता है, ऐसे में इन शवों को दफनाया जा रहा है. बताया जा रहा है कि शवों को दफनाने से पहले सभी का DNA सैंपल लिया जा रहा है और आइडेंटिफिकेशन नंबर का इस्तेमाल करके रिकॉर्ड रखा जाएगा. ताकि DNA मैच होने पर रिश्तेदार उन्हें कब्र से निकाल सकें.

भारत कर रहा मदद

इधर आपदी की इस घड़ी में भारत लगातार नेपाल की मदद कर रही है. भारत ने नेपाल के लिए 11 टन आपूर्ति सामग्री और खोज-बचाव दल लेकर चौथी राहत उड़ान भेजी. विदेश मंत्रि एस जयशंकर ने सोशल मीडिया पर बताया कि भारत की चौथी उड़ान काठमांडू पहुंच गई है. उन्होंने बताया कि यह उड़ान नेपाल में चल रहे बचाव और राहत कार्यों में मदद के लिए ज़रूरी सामान लेकर आई है.

100 पर्यटक नागपुर लौटे

इस बीच नागपुर के लगभग 100 पर्यटकों का एक समूह, जो नेपाल में आई बाढ़ में फंस गया था, रविवार को सुरक्षित नागपुर लौट आया. उस भयावह अनुभव को याद करते हुए, यात्रियों में से एक, योगेश गावंडे ने बताया कि तबाही उनके स्थान से लगभग 50 किलोमीटर दूर हुई थी. उन्होंने बताया कि वो राजधानी काठमांडू में ही फंसे रह गए. उन्होंने आगे बताया कि जलस्तर बढ़ने के कारण उन्होंने एक बस को डूबते हुए देखा.

गावंडे ने बताया ‘हम घटना स्थल से लगभग 50 किलोमीटर दूर ठहरे हुए थे. हम काठमांडू में फंस गए थे, लेकिन मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने हमारी मदद की, हमें नेपाल से बचाया और भारत वापस ले आए. भारत लौटते समय हमारी चार बसें बुक की गई थीं. पाxच में से एक बस पानी में बह गई. हमने वहां सब कुछ देखा, मौसम बेहद खराब था और बारिश हो रही थी’.

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