कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार की कैबिनेट में योजना एवं सांख्यिकी मंत्री रहे बी. नागेंद्र ने मंत्री पद संभालने के महज 25 दिन बाद अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उनके खिलाफ ‘कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम’ में कथित 89 करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगे थे। इस मामले को लेकर विपक्ष लगातार राज्य सरकार को घेरता रहा और मंत्री की भूमिका पर सवाल उठाता रहा।
हालांकि, बी. नागेंद्र ने इन कथित वित्तीय अनियमितताओं में किसी भी तरह की संलिप्तता से इनकार किया। उन्होंने कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो वह विधानसभा की सदस्यता से भी इस्तीफा देने के लिए तैयार हैं। इससे पहले वर्ष 2024 में भी वाल्मीकि निगम से जुड़े इसी मामले के बीच नागेंद्र ने मंत्री पद छोड़ दिया था। बाद में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने उन्हें गिरफ्तार किया था, हालांकि कुछ समय बाद उन्हें जमानत मिल गई।
घोटाले पर गरमाई सियासत
मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने बी. नागेंद्र का बचाव करते हुए कहा कि वह अपने ऊपर लगे आरोपों से काफी आहत हैं और लगातार खुद को निर्दोष बता रहे हैं। शिवकुमार के मुताबिक, उन्होंने मामले की पूरी जानकारी ली है और उनके वकीलों ने भी उन्हें घटनाक्रम से अवगत कराया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नागेंद्र का कथित घोटाले से कोई लेना-देना नहीं है और उन्होंने कोई गलत काम नहीं किया है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि पार्टी के हित को देखते हुए नागेंद्र ने दूसरी बार मंत्री पद से इस्तीफा दिया है।
दूसरी ओर, भाजपा ने नागेंद्र के इस्तीफे को वाल्मीकि विकास निगम में कथित घोटाले के खिलाफ चलाए गए अपने विरोध प्रदर्शन की बड़ी कामयाबी बताया। कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक ने कहा कि यह इस्तीफा शिवकुमार सरकार के लिए ”पहला विकेट” गिरने के समान है। वहीं, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बी.वाई. विजयेंद्र ने आरोप लगाया कि नागेंद्र इस पूरे मामले में महज ”छोटी मछली” हैं और कथित घोटाले के पीछे इससे भी बड़े लोग शामिल हो सकते हैं।
क्या है वाल्मीकि घोटाला
वाल्मीकि कॉर्पोरेशन घोटाला कर्नाटक में सामने आया एक बड़ा कथित वित्तीय घोटाला है। इस मामले में ‘कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम’ (KMVSTDC) के करीब ₹187 करोड़ के फंड में से ₹89.63 करोड़ की कथित तौर पर अवैध तरीके से हेराफेरी किए जाने के आरोप हैं। यह राशि आदिवासी और अनुसूचित जनजाति (ST) समुदाय के कल्याण और विकास से जुड़ी योजनाओं के लिए निर्धारित थी।
आरोप है कि इस रकम को निर्धारित योजनाओं पर खर्च करने के बजाय सैकड़ों संदिग्ध कंपनियों के बैंक खातों, कुछ IT कंपनियों और एक कोऑपरेटिव क्रेडिट सोसाइटी के जरिए अलग-अलग जगहों पर ट्रांसफर किया गया। जांच में कथित तौर पर रकम को कई खातों में घुमाकर उसके असली स्रोत और इस्तेमाल को छिपाने की कोशिश किए जाने की बात भी सामने आई।
कैसे हुआ इस घोटाले का पर्दाफाश
•यह करोड़ों का घोटाला तब सामने आया जब कॉर्पोरेशन के अकाउंट्स सुपरिटेंडेंट और व्हिसलब्लोअर, 52 वर्षीय चंद्रशेखरन पी. ने दुखद रूप से आत्महत्या कर ली।
•उन्होंने ऐसा करने से पहले एक विस्तृत सुसाइड नोट छोड़ा, जिसमें बताया गया था कि उन पर टॉप मैनेजमेंट और अधिकारियों का कितना ज़बरदस्त दबाव था कि वे बिना मंज़ूरी के गैर-कानूनी तरीके से पैसे ट्रांसफर करें।
•जब इसकी जांच की गई तो पता चला कि कॉर्पोरेशन के यूनियन बैंक ऑफ़ इंडिया के आधिकारिक खाते से लगभग ₹88.62 करोड़ गैर-कानूनी तरीके से अनधिकृत खातों में ट्रांसफर किए गए थे।
•इन पैसों को नकली चेक, RTGS और ऑनलाइन सिस्टम के ज़रिए 600 अलग-अलग खातों में भेजा गया था, जिनमें हैदराबाद की ‘फर्स्ट फाइनेंस क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी’ के खाते भी शामिल थे और बाद में इन्हें कैश के रूप में निकाल लिया गया था।
•इसके खुलासे के बाद राज्य की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) के साथ-साथ केंद्रीय एजेंसियां भी जांच में शामिल हुईं। ED ने औपचारिक रूप से कांग्रेस नेता और पूर्व आदिवासी कल्याण मंत्री बी. नागेंद्र को मनी लॉन्ड्रिंग के इस पूरे खेल का मुख्य “मास्टरमाइंड” और साजिशकर्ता बताया।
•केंद्रीय एजेंसियां चोरी की गई लगभग ₹20 करोड़ की रकम के रास्ते की सक्रिय रूप से जांच कर रही हैं।
इस मामले में आरोप है कि •इस पैसे को कर्नाटक और हैदराबाद के रास्ते राजनीतिक चुनावों को प्रभावित करने और उनके लिए फंड जुटाने में इस्तेमाल किया गया था।
ईडी ने नागेंद्र को बताया साजिशकर्ता
जांच के दौरान प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने विधायक और पूर्व अनुसूचित जनजाति कल्याण मंत्री बी. नागेंद्र को इस कथित वित्तीय घोटाले का प्रमुख आरोपी और साजिशकर्ता बताया। एजेंसी के अनुसार, पूरे मामले की कथित साजिश नागेंद्र ने रची थी। ED का आरोप है कि उन्होंने अपने प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए कॉर्पोरेशन के बैंक खाते को बिना अनुमति बेंगलुरु के एमजी रोड स्थित एक विशेष शाखा में स्थानांतरित करवाया।
जांच एजेंसी ने यह भी आरोप लगाया कि नागेंद्र ने अपने निजी कर्मचारियों, करीबी सहयोगियों और कुछ निजी कंपनियों के माध्यम से करीब ₹89.63 करोड़ की रकम के कथित डायवर्जन, हेराफेरी और लेयरिंग की योजना बनाई। ED के दस्तावेजों के मुताबिक, कथित तौर पर हेरफेर की गई राशि में से लगभग ₹20 करोड़ का इस्तेमाल 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान राजनीतिक गतिविधियों और चुनावी फंड जुटाने से जुड़े कामों में किया गया था।

