फ्रांस के वर्साय महल में 1919 में प्रथम विश्व युद्ध को समाप्त करने वाली वर्साय संधि पर हस्ताक्षर हुए थे. उस समय अमेरिकी राष्ट्रपति वुडरो विल्सन को दुनिया में अमेरिका की बढ़ती ताकत का प्रतीक माना गया था, लेकिन 2026 में उसी वर्साय महल में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ 14 सूत्रीय समझौते पर हस्ताक्षर किए, जिसे लेकर अब अमेरिका में तीखी बहस छिड़ गई है.
इस समझौते का उद्देश्य अमेरिका, इज़राइल और ईरान के बीच लंबे समय से चल रहे तनाव और खाड़ी क्षेत्र के संकट को समाप्त करना बताया गया है. कई विशेषज्ञों और आलोचकों का मानना है कि इस समझौते में अमेरिका ने ईरान के सामने अपेक्षा से अधिक रियायतें दी हैं.
ट्रंप का बदला रुख
28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इज़राइल ने ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान शुरू किया था. उस समय राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा था कि इसका मकसद ईरान की मिसाइल क्षमता को पूरी तरह खत्म करना है. उन्होंने दावा किया था कि ईरान के मिसाइल कार्यक्रम को जड़ से समाप्त कर दिया जाएगा, लेकिन 109 दिन बाद हुए इस समझौते में ट्रंप का रुख बदला हुआ नजर आया. पेरिस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि यदि दूसरे देशों के पास बैलिस्टिक मिसाइलें हैं तो ईरान को भी सीमित संख्या में ऐसी मिसाइलें रखने का अधिकार होना चाहिए. उनके इस बयान को उनकी पुरानी नीति से बड़ा बदलाव माना जा रहा है..
रियायतों पर विवाद
समझौते के अन्य प्रावधान भी चर्चा में हैं. इसके तहत इज़राइल को लेबनान पर भविष्य में हमले रोकने होंगे. अमेरिका ईरान पर लगाए गए नौसैनिक प्रतिबंधों में ढील देने की प्रक्रिया शुरू करेगा. ईरान के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बाकर गालिबाफ ने स्पष्ट किया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य पहले जैसी स्थिति में नहीं लौटेगा. गालिबाफ ने कहा कि 60 दिन की निर्धारित अवधि के बाद ईरान वहां से गुजरने वाले जहाजों से शुल्क वसूलेगा. समझौते का एक महत्वपूर्ण हिस्सा ईरान की वर्षों से जमी हुई संपत्तियों और वित्तीय संसाधनों को मुक्त करना भी है. इससे ईरान को अरबों डॉलर की आर्थिक राहत मिलने की संभावना है.
ईरान या शांति?
इज़राइल समर्थक विश्लेषकों और कई अमेरिकी आलोचकों का कहना है कि यह समझौता ईरान के लिए बड़ी जीत है और इससे इज़राइल की सुरक्षा कमजोर हो सकती है. समर्थकों का तर्क है कि इस समझौते ने एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध को टाल दिया और बिना अधिक रक्तपात के शांति का रास्ता खोला. विशेषज्ञों का मानना है कि वर्साय महल में हुए इस समझौते की तुलना 1919 की ऐतिहासिक वर्साय संधि से की जा रही है. यह तुलना कितनी सही है, इस पर मतभेद हैं. फिर भी यह समझौता आने वाले वर्षों में पश्चिम एशिया की राजनीति और वैश्विक शक्ति संतुलन को प्रभावित कर सकता है.

