मुफ्त UPI का दौर खत्म होने वाला है? MDR पर सरकार के कदम से बढ़ी चर्चा

UPI MDR Rule Change : यह सवाल तेजी से चर्चा में है कि क्या भविष्य में UPI के जरिए भुगतान करना पूरी तरह मुफ्त नहीं रहेगा। इसकी वजह केंद्र सरकार का एक प्रस्तावित कानूनी संशोधन है, जो आगे चलकर UPI लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू करने की संभावना पैदा कर सकता है। हालांकि, फिलहाल UPI ट्रांजैक्शन पर MDR लागू नहीं किया गया है और न ही उपभोक्ताओं पर किसी तरह का शुल्क लगाने का कोई फैसला हुआ है। अभी सरकार केवल संबंधित कानून में बदलाव की प्रक्रिया आगे बढ़ा रही है, जिससे भविष्य में इस विकल्प पर विचार किया जा सके।

केंद्र सरकार ने पेमेंट्स एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट, 2007 में संशोधन के लिए टैक्सेशन एंड अदर लॉज अमेंडमेंट बिल, 2026 पेश किया है। प्रस्तावित बदलाव के तहत सरकार को यह अधिकार मिल जाएगा कि वह अलग-अलग डिजिटल भुगतान माध्यमों के लिए MDR (मर्चेंट डिस्काउंट रेट) से छूट देने या उसे लागू करने का फैसला कर सके। यानी भविष्य में किन डिजिटल पेमेंट प्लेटफॉर्म्स पर MDR नहीं लगेगा और किन पर लागू होगा, इसका निर्धारण सरकार द्वारा किया जाएगा।

क्या है पूरा मामला?
डिजिटल भुगतान को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने वर्ष 2020 में UPI और RuPay डेबिट कार्ड लेनदेन पर MDR (मर्चेंट डिस्काउंट रेट) को शून्य कर दिया था। इसके बाद व्यापारियों को UPI के जरिए भुगतान स्वीकार करने पर किसी तरह का MDR शुल्क नहीं देना पड़ता था। अब सरकार उस कानूनी प्रावधान में बदलाव करने की तैयारी में है, जिसके तहत UPI पर MDR को पूरी तरह समाप्त किया गया था।
प्रस्तावित संशोधन के अनुसार, सरकार अधिसूचना जारी कर यह तय कर सकेगी कि किन इलेक्ट्रॉनिक भुगतान माध्यमों को शुल्क से छूट दी जाएगी और किन्हें नहीं। ऐसे में भविष्य में सरकार जरूरत पड़ने पर बड़े कारोबारियों या विशेष श्रेणी के व्यापारियों के लिए UPI लेनदेन पर MDR लागू करने का फैसला ले सकती है।

क्या ग्राहकों को UPI इस्तेमाल करने के पैसे देने होंगे?
फिलहाल इसका जवाब ‘नहीं’ है। MDR (मर्चेंट डिस्काउंट रेट) का भुगतान ग्राहकों द्वारा नहीं, बल्कि व्यापारियों (मर्चेंट्स) की ओर से बैंकों और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स को किया जाता है। सरकार के मौजूदा प्रस्ताव में कहीं भी आम उपभोक्ताओं से UPI ट्रांजैक्शन पर शुल्क वसूलने का उल्लेख नहीं है।
हालांकि, यदि भविष्य में बड़े व्यापारियों या कुछ विशेष श्रेणियों के कारोबारों पर MDR लागू किया जाता है, तो वे इस अतिरिक्त लागत का कुछ हिस्सा अपने उत्पादों या सेवाओं की कीमतों में शामिल करने पर विचार कर सकते हैं। फिर भी, इस संबंध में अभी तक सरकार की ओर से कोई अंतिम फैसला या आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।

MDR क्या होता है?
मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) एक प्रकार का शुल्क है, जिसे व्यापारी डिजिटल भुगतान स्वीकार करने के बदले बैंकों और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स को चुकाते हैं। यह शुल्क दुकानों, होटलों, रेस्टोरेंट्स, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स और अन्य व्यवसायों पर लागू होता है, जब ग्राहक डिजिटल माध्यम से भुगतान करते हैं। क्रेडिट कार्ड समेत कई डिजिटल पेमेंट विकल्पों पर MDR पहले से लागू है। हालांकि, डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने के लिए जनवरी 2020 से UPI और RuPay डेबिट कार्ड ट्रांजैक्शन्स पर MDR को शून्य कर दिया गया था।

सरकार यह बदलाव क्यों करना चाहती है?
सरकार ने फिलहाल UPI पर MDR लागू करने की कोई स्पष्ट घोषणा नहीं की है। हालांकि, डिजिटल भुगतान उद्योग लंबे समय से इस व्यवस्था की मांग करता रहा है। भुगतान सेवा प्रदाताओं का तर्क है कि UPI के जरिए हर महीने अरबों ट्रांजैक्शन प्रोसेस किए जाते हैं, जिनके संचालन के लिए सर्वर, साइबर सुरक्षा, नेटवर्क और तकनीकी इंफ्रास्ट्रक्चर पर बड़ा खर्च करना पड़ता है।
उद्योग का कहना है कि शून्य MDR व्यवस्था के कारण उनके पास आय का कोई स्थायी स्रोत नहीं है। वहीं, पिछले वित्त वर्ष में सरकार की ओर से UPI प्रोत्साहन राशि भी जारी नहीं की गई थी। ऐसे में कंपनियों का मानना है कि यदि कोई टिकाऊ राजस्व मॉडल नहीं बनाया गया, तो भविष्य में UPI नेटवर्क का विस्तार और उसकी सेवाओं को बेहतर बनाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

संसदीय समिति ने भी जताई थी चिंता
मार्च 2026 में संसद की वित्त संबंधी स्थायी समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि शून्य MDR नीति ने देश में डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने में अहम योगदान दिया है। हालांकि, समिति ने यह भी चेतावनी दी थी कि लंबे समय तक इस व्यवस्था को बनाए रखना आर्थिक दृष्टि से चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, आने वाले वर्षों में UPI के जरिए हर महीने 100 से 150 अरब तक लेनदेन होने की संभावना है, जबकि लगभग 60 करोड़ नए यूजर्स भी इस प्लेटफॉर्म से जुड़ सकते हैं। समिति का मानना है कि इतनी विशाल डिजिटल भुगतान प्रणाली के सुचारू संचालन और विस्तार के लिए एक मजबूत एवं टिकाऊ राजस्व मॉडल विकसित करना आवश्यक होगा।

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